साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'आॅपरेशन साइबर वज्र' के तहत नोएडा पुलिस ने नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पदार्फाश किया है।

Noida News : साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान 'आॅपरेशन साइबर वज्र' के तहत नोएडा पुलिस ने नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पदार्फाश किया है। थाना फेस-1 पुलिस ने सेक्टर-2 में छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद को प्रतिष्ठित एयरलाइन कंपनी स्पाइस जेट से जुड़ा बताकर बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देते थे और रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग व डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के नाम पर उनसे हजारों रुपये ऐंठते थे। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।
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पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह विभिन्न जॉब पोर्टल और वेबसाइटों से नौकरी तलाश रहे युवाओं का मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी जुटाता था। इसके बाद कॉल सेंटर से फोन कर उन्हें एयरलाइन में नौकरी का भरोसा दिया जाता था। विश्वास जीतने के लिए फर्जी आॅफर लेटर, नियुक्ति पत्र और ईमेल भी भेजे जाते थे। जब उम्मीदवार भरोसा कर लेते थे, तब उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, मेडिकल चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और अन्य मदों में रकम जमा कराई जाती थी।
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आरोपी ठगी से प्राप्त रकम सीधे अपने खातों में नहीं मंगाते थे। पुलिस के अनुसार, इसके लिए कथित म्यूल अकाउंट यानी दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि लेन-देन का वास्तविक स्रोत छिपा रहे। रकम जमा होने के बाद उसे अलग-अलग खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे ट्रांसफर कर दिया जाता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 9 डेबिट कार्ड, 13 सिम कार्ड, 3 बैंक पासबुक और 4 यूपीआई साउंड बॉक्स बरामद किए हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंकिंग दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कर साइबर नेटवर्क की पूरी कड़ी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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पूछताछ में सामने आया कि आरोपी वारदात के बाद इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और सिम कार्ड नष्ट कर देते थे। जरूरत पड़ने पर गरीब और जरूरतमंद लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नए सिम हासिल किए जाते थे, ताकि पुलिस तक उनकी पहचान न पहुंच सके। यही तरीका अपनाकर गिरोह लंबे समय से साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार इस गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी का यह नेटवर्क किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है और इसमें कितने अन्य लोग शामिल हैं।
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पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 'आॅपरेशन साइबर वज्र' के दौरान 159 संदिग्ध बैंक खातों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान इस गिरोह के नेटवर्क का सुराग मिला। जांच में 19 रेड जोन भी चिन्हित किए गए, जहां लगभग 2500 मोबाइल नंबर संदिग्ध पाए गए। तकनीकी निगरानी और सूचना के आधार पर पुलिस ने कॉल सेंटर तक पहुंचकर पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। बरामद मोबाइल, लैपटॉप और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि इस साइबर ठगी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितने लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर ठगा गया और ठगी की कुल रकम कितनी है।
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