
नोएडा के सेक्टर 70 में एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय पुलिस स्टेशन और खुफिया विभाग का दफ्तर चलाने वाला गिरोह पकड़ा गया है। इस गिरोह का सरगना पश्चिम बंगाल का पूर्व तृणमूल कांग्रेस ब्लॉक प्रमुख विभाष चंद है, जिसके खिलाफ बंगाल में भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। आरोपियों का आरोप है कि वे वहां से भागकर नोएडा आ गए थे और यहां अपने साथियों के साथ यह नकली कार्यालय स्थापित किया। Noida Samachar
विभाष चंद पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से संबंध रखते हैं। उनके ऊपर बंगाल में चल रहे कुछ घोटालों की भी जांच जारी है। भागकर नोएडा पहुंचने के बाद उन्होंने फर्जी ‘अंतरराष्ट्रीय पुलिस एवं अपराध जांच ब्यूरो’ का कार्यालय बनाया, जहां से वे सरकारी अधिकारी बनकर लोगों से वसूली कर रहे थे। शनिवार की रात, पुलिस ने नोएडा सेक्टर 70 से विभाष चंद, उनके बेटे और अन्य साथियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि ये लोग लोगों को सरकारी अधिकारी बनाकर धोखा देते और उनसे भारी रकम ऐंठते थे।
पुलिस के अनुसार, विभाष चंद और उनके बेटे ने पश्चिम बंगाल में फर्जी नोटिस भेजकर लोगों से पैसे वसूलते थे। वे जमीन विवाद सुलझाने और अन्य सरकारी काम करवाने का झांसा देकर लोगों को ठगते थे। बेटे की गाड़ियों पर ‘इंटरपोल’ का स्टीकर लगा होता था, जिससे वे आम जनता को भयभीत करते थे। नोएडा में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा जारी था। कोलकाता के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पूर्व टीएमसी नेता विभाष चंद ने बेलियाघाटा इलाके में सीआईटी रोड पर दो फ्लैट किराए पर लेकर वहां ‘इंटरपोल’, ‘सामाजिक न्याय जांच’ और ‘पुलिस’ जैसे बोर्ड लगाकर फर्जी कार्यालय चलाया। आरोपी नीली बत्ती लगी गाड़ी चलाते थे, जो आमतौर पर उच्च सरकारी अधिकारियों के लिए आरक्षित होती है। यह आश्चर्यजनक था कि वह बेलियाघाटा और नारकेलडांगा पुलिस थानों के बीच अपना यह दफ्तर चला रहा था।
पुलिस ने बताया कि विभाष चंद, जो 2021 में टीएमसी से निष्कासित हो चुके हैं, शिक्षक भर्ती घोटाले में भी शामिल थे। इस मामले में सीबीआई ने 2023 में पश्चिम बंगाल की जेल में बंद पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी के करीबी माने जाने वाले इस अधिकारी से कई बार पूछताछ की थी। पुलिस के मुताबिक, विभाष चंद के नाम दिल्ली और कोलकाता में कई आलीशान मकान हैं, साथ ही बीरभूम के सूरी और हुगली के कृष्णापुर में दो कॉलेज भी उनके स्वामित्व में हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी है। Noida Samachar