Farmer Protest: नया इतिहास रच दिया है नोएडा के किसानों ने!
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2021 08:56 AM
नोएडा। पिछले तीन महीने से नोएडा प्राधिकरण के विरूद्ध चल रहे किसान आंदोलन ने नया इतिहास रच दिया है। यह आंदोलन नोएडा की स्थापना से अब तक का सबसे सफल आंदोलन साबित हुआ है। इतना ही नहीं इस आंदोलन ने नोएडा क्षेत्र के गांवों में संघर्ष की एक नयी ऊर्जा का संचार किया है। विश्लेषकों का दावा है कि किसान आंदोलन सफलता के मुकाम तक पहुंच गया है।
सब जानते हैं कि नोएडा की स्थापना 17 अप्रैल 1976 में हुई थी। इन पिछले 45 वर्षों में इस क्षेत्र में छोटे-बड़े अनेक आंदोलन हुए। ज्यादातर आंदोलन या तो प्रशासनिक सख्ती के सामने विफल हो गए या फिर सरकारी तंत्र ने दलालों के जरिए आंदोलनों को खरीद लिया। 45 वर्षों में यह पहला अवसर है जब कि किसान आंदोलन 93 दिनों से ना कोवल निर्बाध गति से चल रहा है बल्कि इस आंदोलन का संचालन करने वालों ने इसे रोज ही ताजा रखने का सफल प्रयोग भी किया है। किसानों का आरोप है कि नोएडा की स्थापना के समय से ही यहां के किसानों का व्यापक शोषण हुआ है।
विकास के नाम पर उनकी मां जैसी प्यारी जमीनों को औने-पौने दामों पर छीन लिया गया। विकास के नाम पर किसानों के हाथ खास कुछ नहीं आया। पिछले एक दशक से तो मानो नोएडा क्षेत्र में किसानों की पहचान ही नष्ट होती चली गयी। तीन महीने पहले सुखबीर सिंह खलीफा की अगुवाई में भारतीय किसान परिषद के बैनर तले किसान आंदोलन शुरू हुआ। आंदोलन करने वाले किसानों की 6 प्रमुख मांगें हैं। उनकी सबसे बड़ी मांग किसानों व मजदूरों की आबादी के निस्तारण की है। साथ ही जमीन अधिग्रहण के बदले 5 प्रतिशत के भूखंड तथा 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी भवन नियमावली का निरस्तीकरण, 5 प्रतिशत वाले भूखंडों पर व्यवसायिक कार्यों की अनुमति, पुश्तैनी एवं गैर पुश्तैनी किसानों का भेद समाप्त करने एवं प्रत्येक गांव का संपूर्ण विकास करने जैसी मांगें शामिल हैं।
किसी भी दृष्टि से किसानों की एक भी मांग को नाजायज मांग करार नहीं दिया जा सकता। सारी मांगें जायज होने के बावजूद किसानों को सर्दी के इस मौसम में भी खुले आसमान के नीचे बैठकर संघर्ष करना पड़ रहा है। अब तो किसानों ने अपने चूल्हे-चौके भी नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर के बाहर ही रख लिए हैं। किसान परिवारों के पुरूष ही नहीं महिलाएं भी इस आंदेालन में बढ़-चढक़र भाग ले रही हैं।
किसान नेता सुखबीर खलीफा आंदोलन को रोज नयी धार दे रहे हैं। उनकी सलाहकार मंडली प्रतिदिन आंदोलन को ताजा रखने के नए-नए उपाय सुझा रही है। कुल मिलाकर भारतीय किसान परिषद के इस आंदोलन ने एक नया इतिहास रच दिया है। अब देखना यह है कि अन्नदाता की उपाधि से सम्मानित किसानों की मांगें कब तक पूरी की जाती हैं। एक बात तो साफ है कि अपनी सभी मांगों को पूरा कराए बिना यह किसान आंदोलन समाप्त होने वाला नहीं है। इस आश्य की घोषणा बार-बार किसान नेता कर चुके हैं। तमाम विश्लेषक एकमत से इस आंदोलन को नोएडा क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन मान रहे हैं।
दलाल हुए विफल
नोएडा में अब तक जो भी किसान आंदोलन होते थे उनके अंदर प्राधिकरण कुछ दलाल घुसा देता था। ये दलाल आंदोलनकारियों को भ्रमित करके आंदोलन तुड़वा देते थे। पहले के आंदोलनों को जातिवादी रंग भी दिया जाता था। कभी उन्हें गुर्जरों का आंदोलन तो कभी चौहानों अथवा यादवों का आंदोलन कहा जाता था। इस प्रकार की तमाम साजिशें वर्तमान आंदोलन के साथ भी हुई हैं, किन्तु दलालों की सारी योजनाएं विफल साबित हो रही हैं।
सर्वमान्य नेता
सब जानते हैं कि किसी भी आंदोलन की सफलता अथवा विफलता का पूरा दारोमदार उस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेता पर होता है। इस किसान आंदोलन का नेतृत्व सुखबीर खलीफा के हाथों में है। पहलवान से नेता बने खलीफा किसानों के सर्वमान्य नेता बनकर उभरे हैं। उनकी नीति व नीयत ने सबको प्रभावित किया है। सभी किसान मानते हैं कि सुखबीर खलीफा एक ईमानदार नेता साबित हो रहे हैं।