गांवों (ग्रामीण इलाकों) से आने वाले युवाओं को दिक्कत न हो, एयरपोर्ट अथॉरिटी और एनआईएएल ने बस/यातायात की व्यवस्था करने की बात कही है। इसका मतलब है कि जितने युवाओं ने रोजगार-विकल्प चुना था, अब उन्हें हकीकत में नौकरी पाने का मौका मिल सकता है।

Noida News : जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एनआईएएल) में अब स्थानीय किसानों के लड़के एयरपोर्ट अधिकारी बने हुए नजर आएंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एनआईएएल) ने अब उन प्रभावित परिवारों के युवाओं को इंटरव्यू कॉल-लेटर्स भेजना शुरू कर दिया है, जिन्होंने जमीन अधिग्रहण के दौरान 5 लाख रुपये लेने की बजाय रोजगार का विकल्प चुना था। इस कॉल का नाम है इम्प्लायमेंट सपोर्ट इनीशिएटिव यानी यह रोजगार-समर्थन पहल के तहत किया जा रहा है, और इसके लिए उनकी चयन प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है। इंटरव्यू की तारीख तय की गई है 2 दिसंबर 2025 और इंटरव्यू स्थल होगा जेवर एयरपोर्ट का साइट आॅफिस। साथ ही, गांवों (ग्रामीण इलाकों) से आने वाले युवाओं को दिक्कत न हो, एयरपोर्ट अथॉरिटी और एनआईएएल ने बस/यातायात की व्यवस्था करने की बात कही है। इसका मतलब है कि जितने युवाओं ने रोजगार-विकल्प चुना था, अब उन्हें हकीकत में नौकरी पाने का मौका मिल सकता है।
जब जमीन अधिग्रहण हो रहा था मतलब जेवर एयरपोर्ट के लिए किसानों और जमीन मालिकों से जमीन ली जा रही थी तब किसानों को दो विकल्प दिए गए थे। या तो एकमुश्त मुआवजा ( 5 लाख) लेना, या फिर नौकरी का विकल्प चुनना। यह विकल्प राइट टू फेयर कम्पंसेशन एण्ड ट्रांसपरेसी इन लैंड इक्यूसीशन रिहैबिलिटेशन एण्ड रिसेटेलमेंट एक्ट 2013 और उत्तर प्रदेश भूमि अधिग्रहण नियमावली (रूल 153/154) के तहत था। शुरुआती भूमि-अधिग्रहण के चरण में, लगभग 5000 किसानों ने जमीन दी थी। इनमें से, रिपोर्ट्स के अनुसार केवल 335 परिवारों ने नौकरी विकल्प चुना था। बाकी ने मुआवजा लेना स्वीकार किया। यानी, यह रोजगार-विकल्प उन चुनिंदा परिवारों तक सीमित हुआ था, लेकिन अब उन्हें नौकरी पाने का मौका मिल रहा है।
यह कदम उन किसान परिवारों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जिनकी जमीन एयरपोर्ट को दी गई थी। अब उनके बेटे-बेटियाँ एयरपोर्ट में काम कर सकते हैं। यह पारंपरिक रूप से खेती-किसानी करने वाले परिवारों के लिए सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से बड़ा बदलाव ला सकता है। यह दिखाता है कि अधिग्रहण के समय दिए विकल्प (मुआवजा या रोजगार) सिर्फ शब्द नहीं थे अब उन विकल्पों को व्यावहारिक रूप दिया जा रहा है। यानी, जमीन देने वालों के हक और हितों का ध्यान रखा जा रहा है। यदि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हुई, और युवाओं को अच्छी नौकरियां मिली तो यह क्षेत्रीय विकास, सामाजिक स्थिरता और विश्वास-निर्माण के लिए सकारात्मक कदम हो सकता है।
हालाँकि कॉल-लेटर्स जारी हुए हैं, फिर भी कई सवाल और चुनौतियाँ बरकरार हैं। कॉल-लेटर मतलब है इंटरव्यू के लिए बुलावा लेकिन असल में नौकरी का लेटर मिलना अलग बात है। कितने युवाओं को वास्तविक नौकरी मिलेगी, यह देखना बाकी है। जिन्होंने नौकरी का विकल्प चुना था वे 335 परिवार थे (पहले चरण के आधार पर) लेकिन क्या भविष्य में और लोग भी रोजगार विकल्प चाहते हैं, या पहले चरण के बाद काफी कम लोगों ने विकल्प चुना यह समझना जरूरी है। चयन प्रक्रिया योग्यता, पारदर्शिता, पदों की संख्या, वेतन आदि विषयों पर अभी कोई आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है। इससे यह स्पष्ट नहीं कि एयरपोर्ट में किस स्तर की नौकरियाँ होंगी और वे युवाओं के परिवार, उनकी उम्मीदों, उनकी जरूरतों से कितनी मेल खाती होंगी। भविष्य में एयरपोर्ट का क्या स्वरूप रहेगा यह भी मायने रखता है। क्योंकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है; उसके पहले चरण में भी कई सुविधाओं को तैयार करना बाकी है।
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