नोएडा में सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शहर को साफ-सुथरा रखने के दावों के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है।

Noida News : नोएडा में सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शहर को साफ-सुथरा रखने के दावों के बीच एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। प्राधिकरण की जांच में पता चला कि कचरा उठाने के लिए तैनात 300 गाड़ियों में से 157 गाड़ियां अपने तय रूट पर चली ही नहीं। इसीलिए प्राधिकरण ने भारी जुर्माना लगाया है।
नोएडा अथॉरिटी द्वारा की गई औचक जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि सिर्फ 143 गाड़ियां ही मैदान में काम कर रही थीं, जबकि बाकी 157 गाड़ियां गैरेज से बाहर ही नहीं निकलीं। यह जांच 25 मार्च से 31 मार्च के बीच की गई, जिसमें जीपीएस डेटा के आधार पर यह गड़बड़ी पकड़ी गई।
गाड़ियों के रूट पर नहीं चलने का सीधा असर शहर के लाखों लोगों पर पड़ा। करीब 1.5 लाख घरों से कूड़ा नहीं उठ पाया, जिसके चलते:
* सड़कों पर कचरे के ढेर लग गए
* खाली प्लॉटों में गंदगी फैलने लगी
* शहर की सुंदरता और स्वच्छता पर असर पड़ा।
लोग मजबूरी में कचरा खुले में फेंकने लगे, जिससे हालात और बिगड़ गए।
मामला सामने आते ही नोएडा प्राधिकरण हरकत में आया। पहले चरण में 3.92 लाख का जुर्माना और बाद में 6.5 लाख का अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया। कुल मिलाकर 10.38 लाख का भारी जुर्माना कचरा निस्तारण कंपनी एजी इनवाईरो पर लगाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि:
* करीब 25% गाड़ियां खराब हालत में थीं
* समय पर मरम्मत नहीं कराई गई
* ठेकेदारों ने जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।
यह साफ दिखाता है कि सिर्फ संसाधन होना काफी नहीं, बल्कि उनकी सही मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस भी जरूरी है।
नोएडा अथॉरिटी के ओएसडी इंदु प्रकाश के अनुसार:
* शहर के कई सेक्टर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं
* गाड़ियां समय पर नहीं आ रही थीं
* लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा था।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर जांच की गई और सख्त कार्रवाई की गई।
कंपनी के मैनेजर शिवान्धु कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि:
* 300 गाड़ियों में 220 टेंपो और 80 ई-रिक्शा शामिल हैं
* 157 गाड़ियां नहीं चलीं, जिसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की है।
* मेंटेनेंस में लापरवाही के कारण समस्या आई।
हालांकि अब कंपनी ने सभी गाड़ियों की मरम्मत कराने की बात कही है। नोएडा जैसे स्मार्ट सिटी में इस तरह की लापरवाही कई सवाल खड़े करती है। क्या निगरानी तंत्र कमजोर है?, क्या ठेकेदारों पर नियंत्रण नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल आखिर जिम्मेदारी किसकी है?। यह मामला साफ करता है कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो शहर की सफाई व्यवस्था और बिगड़ सकती है।