नोएडा के सेक्टर-107 स्थित ग्रेट वैल्यू रियल्टी के चर्चित प्रोजेक्ट ग्रेट वैल्यू एकानम को अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो यानी FAR दिए जाने के मामले में मंगलवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेट वैल्यू शरणम अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी।

Noida News : नोएडा शहर की एक प्रसिद्ध सोसाइटी में भारत के सुप्रीम कोर्ट का एक ताजा फैसला बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। आपको बता दें कि नोएडा के सेक्टर-107 स्थित ग्रेट वैल्यू रियल्टी के चर्चित प्रोजेक्ट ग्रेट वैल्यू एकानम को अतिरिक्त फ्लोर एरिया रेशियो यानी FAR (Floor Area Ratio) दिए जाने के मामले में मंगलवार को बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेट वैल्यू शरणम अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) की विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी। इसके साथ ही अतिरिक्त FAR को चुनौती देने वाली कानूनी लड़ाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट का 1 जुलाई 2026 का फैसला प्रभावी बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनी गईं। देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप ना करते हुए SLP को खारिज कर दिया। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को अतिरिक्त निर्माण अधिकार दिए जाने का प्रश्न नहीं था, बल्कि अपार्टमेंट मालिकों की सहमति, भविष्य के विकास के लिए आरक्षित भूमि, अतिरिक्त FAR की कानूनी प्रक्रिया और नोएडा प्राधिकरण की भूमिका जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल जुड़े थे। Noida News
आपको बता दें कि ग्रेट वैल्यू शरणम अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन ने नोएडा के सेक्टर-107 में ग्रेट वैल्यू रियल्टी के प्रोजेक्ट से जुड़े अतिरिक्त FAR को चुनौती दी थी। विवाद का केंद्र नोएडा प्राधिकरण द्वारा 19 दिसंबर 2024 को अतिरिक्त FAR स्वीकृत किए जाने तथा उसके बाद की गई परियोजना संबंधी स्वीकृतियां थीं। AOA की ओर से यह तर्क दिया गया था कि अतिरिक्त FAR के आधार पर प्रस्तावित विकास से मौजूदा अपार्टमेंट मालिकों के अधिकार प्रभावित होंगे और इसके लिए आवश्यक सहमति नहीं ली गई। दूसरी ओर, डेवलपर और नोएडा प्राधिकरण की ओर से यह कहा गया कि संबंधित भूमि परियोजना के शुरुआती स्वीकृत नक्शों में ही ‘फ्यूचर डेवलपमेंट’ के लिए चिह्नित थी और अतिरिक्त FAR के लिए बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदारों की सहमति प्राप्त की गई थी। Noida News
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1 जुलाई 2026 को Great Value Sharanam Apartment Owners Association v. State of U.P. and 8 Others, Writ-C No. 40310 of 2025 में याचिका खारिज कर दी थी। न्यायमूर्ति अरुण कुमार के फैसले में अतिरिक्त FAR से जुड़े विभिन्न कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विस्तार से विचार किया गया था। अदालत के सामने रिकॉर्ड के अनुसार परियोजना के लिए मूल लीज 12 जुलाई 2010 को लगभग 72,957.60 वर्गमीटर भूमि के लिए हुई थी। बाद में 16 जुलाई 2015 को लगभग 8,255.65 वर्गमीटर अतिरिक्त भूमि की लीज के बाद परियोजना का कुल क्षेत्रफल लगभग 81,213.25 वर्गमीटर हो गया। हाईकोर्ट के फैसले में कहा गया कि विवादित हिस्सा परियोजना की शुरुआती स्वीकृत योजनाओं में भविष्य के विकास के लिए चिह्नित था। Noida News
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक फ्लैट खरीदारों की सहमति का था। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, अतिरिक्त FAR के संबंध में मूल स्तर पर बड़ी संख्या में सहमतियां सामने आई थीं। नोएडा प्राधिकरण द्वारा कराए गए सत्यापन में डुप्लीकेट और अमान्य प्रविष्टियों को हटाने के बाद 978 वैध सहमतियां और 228 वैध आपत्तियां पाई गईं। अदालत के अनुसार, यह लगभग 1,440 अपार्टमेंट वाले प्रोजेक्ट में 68 प्रतिशत फ्लैट मालिकों की वैध सहमति के बराबर था। भाग लेने वाले आवंटियों में सहमति का अनुपात लगभग 81 प्रतिशत बताया गया। यही आंकड़ा हाईकोर्ट के फैसले में महत्वपूर्ण रहा। मामले का एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल यह भी था कि अतिरिक्त FAR के लिए क्या प्रत्येक फ्लैट मालिक की 100 प्रतिशत सहमति आवश्यक है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में Designarch Infrastructure से संबंधित पूर्व निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि अतिरिक्त FAR के उपयोग के लिए अपार्टमेंट मालिकों की वैध बहुमत सहमति महत्वपूर्ण है और इस मामले में अदालत के सामने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर वैधानिक बहुमत की आवश्यकता पूरी हुई थी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जिन व्यक्तिगत फ्लैट मालिकों की सहमति रिकॉर्ड पर थी, उनमें से किसी ने स्वयं अदालत में आकर अपनी सहमति वापस लेने या उसे रद्द करने की मांग नहीं की थी। Noida News
AOA की ओर से अतिरिक्त FAR की प्रक्रिया, सहमतियों की वैधता और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि सहमतियों की प्रक्रिया में कई गंभीर सवाल थे और अतिरिक्त निर्माण मौजूदा फ्लैट मालिकों के अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। इसके विपरीत, प्रतिवादी पक्ष ने कहा कि नोएडा प्राधिकरण ने सार्वजनिक सूचना, आपत्तियां और सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई तथा सहमति और आपत्तियों के रिकॉर्ड का सत्यापन किया। हाईकोर्ट ने अंततः माना कि याचिका में ऐसे पर्याप्त आधार स्थापित नहीं हुए जिनके कारण नोएडा प्राधिकरण द्वारा अतिरिक्त FAR को मंजूरी देने के आदेश में न्यायिक हस्तक्षेप किया जाए। Noida News
हाईकोर्ट ने अपने 1 जुलाई 2026 के फैसले में 19 दिसंबर 2024 के अतिरिक्त FAR स्वीकृति आदेश और 27 अक्टूबर 2025 के पुनरीक्षण आदेश को बरकरार रखा तथा रिट याचिका खारिज कर दी। अदालत ने साथ ही परियोजना से जुड़े विकास में नोएडा प्राधिकरण द्वारा लगाई गई शर्तों, संरचनात्मक सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, पर्यावरणीय मानकों और पार्किंग संबंधी नियमों के अनुपालन पर भी जोर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद ग्रेट वैल्यू शरणम AOA ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और विशेष अनुमति याचिका दायर की। आज 22 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस SLP को खारिज किए जाने के बाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली यह कार्यवाही भी समाप्त हो गई है। Noida News
सुप्रीम कोर्ट में ग्रेट वैल्यू रियल्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता महेश अग्रवाल, कार्तिकेय दुबे और कानूनी टीम के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अतिरिक्त FAR से जुड़े विवाद में उसे कानूनी स्पष्टता मिली है। Noida News
ग्रेट वैल्यू रियल्टी के निदेशक पायस अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इस निष्कर्ष से कंपनी को मामले को पीछे छोड़कर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। कंपनी ने जिम्मेदार विकास, हितधारकों के साथ पारदर्शी संवाद और दीर्घकालिक मूल्य निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कंपनी की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश एकानम को स्वीकृत अतिरिक्त FAR से संबंधित नियामकीय और कानूनी स्थिति को स्पष्ट करता है। ग्रेट वैल्यू एकानम का मामला सिर्फ एक बिल्डर और एक अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में अतिरिक्त FAR, मौजूदा फ्लैट मालिकों के अधिकार, भविष्य के विकास के लिए आरक्षित भूमि और प्राधिकरण की स्वीकृति प्रक्रिया जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े हैं। नोएडा में पहले से विकसित आवासीय परियोजनाओं में भविष्य में अतिरिक्त निर्माण या अतिरिक्त FAR के प्रस्ताव आने पर इस फैसले का उल्लेख किया जा सकता है। हालांकि किसी दूसरे प्रोजेक्ट पर इसका सीधा प्रभाव उसके अपने स्वीकृत नक्शे, भूमि की स्थिति, सहमति रिकॉर्ड और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। Noida News
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