
Greater Noida: बाल विकास सेवा और पुष्टाहार विभाग के तहत संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों के बेहतरी के लिए शासन की तरफ से एक नया प्रयास किया जा रहा है। अब जिले में आदर्श सरकारी स्कूल बनाने की तर्ज पर अब हर ब्लॉक में संचालित होने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों को ‘आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र’ बनाने पर जोर दिया जाएगा। इसमें डीएम-सीडीओ समेत अन्य प्रशासनिक अफसर व जनप्रतिनिधि के साथ ही शैक्षिक संस्थान से जुड़े लोग व उघमी भी जिले में ’आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र्’ को गोद लेंगे।
शासन स्तर से इसको लेकर आदेश जारी हो गया है। हर जिले में अफसरों को आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रों पर कुर्सियां, मेज, खिलौने, वजन मशीन आदि की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के साथ ही केंद्र को भी आधुनिक बनाया जाएगा।
जिला कार्यक्रम अधिकारी पूनम तिवारी ने बताया कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अफसर अब जिला स्तरीय अफसरों के लिए अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्र चिह्नित किए जा रहे है। जिले में 1108 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे है। इसमें करीब 972 आगनबाड़ी वर्कर काम करती है। पांच से छह आयुवर्ग के लगभग पांच हजार बच्चों का नामांकन है। इसमें बच्चे नर्सरी और प्री नर्सरी के साथ ही पढ़ाई की बारिकिया सिखा रहे है। इन केंद्रों पर करीब ढाई लाख से अधिक नौनिहाल पंजीकृत हैं। अब शासन स्तर से आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र को लेकर एक आदेश जारी हुआ है। इसमें मंडलायुक्त, डीएम समेत अन्य अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने जिलों में आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र तैयार करेंगे।
जिला कार्यक्रम अधिकारी पूनम तिवारी ने बताया कि अभी तक जिले में सीडीओ, जिलाधिकारी, सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी सहित अन्य लोगों ने 123 केंद्रों को अब तक गोद ले लिया है। शासन के आदेश अनुसार आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें मंडलायुक्त, डीएम समेत अन्य अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने जिलों में आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र तैयार करेंगे। इनके सहयोग से केंद्रों पर बच्चों के लिए पंखे, कुर्सियां, खेल-खिलौने, वजन मशीन आदि की व्यवस्था कराई जाएगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार के साथ ही स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाता है। उन्होंने बताया कि इस केंद्रों पर सुविधाओं के साथ ही बच्चों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जाएगा। विभाग की ओर से सैम और मैम बच्चों की सूची तैयार की जा रही है। इन बच्चों की अधिक संख्या वाले केंद्रों को प्राथमिकता से गोल लिया जाएगा