
Greater Noida (By RAJ KUMAR CHAUDHARY) शहर में सरेराह भाजपा कार्यकर्ता संचित शर्मा उर्फ़ सिगां पण्डित पर हुए जान लेवा हमले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब यह मामला जनपद गौतमबुद्धनगर की सीमा से निकलकर प्रदेश और देश में चर्चा का विषय बनता दिख रहा है। 11 दिन बाद भी हाईटेक पुलिस के हाथ खाली हैं। योगी राज में हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं। Greater Noida
बता दें कि उत्तर प्रदेश में अपराध मुक्त माहौल देने के लिए योगी सरकार कृत संकल्प है। योगी सरकार के दौरान बड़े-बड़े माफियाओं की कमर तोडऩे का काम किया जा रहा है। माफियाओं पर एक हद तक अंकुश लग चुका है। लेकिन गौतमबुद्धनगर को जनपद पुलिसिंग से कमिश्नरी व्यवस्था में तब्दील इसलिए किया गया था कि यहां रहने वाले देशी-विदेशी लोगों को त्वरित न्याय मिलेगा। भयमुक्त माहौल देने के लिए इस जनपद में एक दर्जन से अधिक आईपीएस अधिकारी पुलिस व्यवस्था को संभाल रहे हैं।
बता दें कि 50 लाख लोगों की आबादी वाले नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे के अधिकृत क्षेत्र में कानून का राज रहे। लोग अपने आपको सुरक्षित महसूस करें। इसलिए पुलिस को अधिक अधिकार दिए गए हैं। लेकिन इसके बावजूद यहां अपराधियों के मंसूबे बुलंद हैं। 3 नवंबर को अपराधियों ने सरेराह भाजपा नेता और ग्रेटर नोएडा के मंडल प्रभारी महेश चंद शर्मा और पार्टी कार्यकर्ता संचित शर्मा उर्फ सिंगा पंडित को हथियारों के बल पर घेर लिया। अपराधियों ने सिंगा पंडित के एक पैर को तीन जगह से तोड़ दिया। उसके शरीर के अन्य भागों पर भी वार किया गया है।
सिंगा पंडित के परिजनों का आरोप है कि उसे सोची-समझी रणनीति के तहत निशाना बनाया गया है। इस मामले की जांच में गौतमबुद्धनगर कमिश्नरेट पुलिस उलझ गई है। इस प्रकरण को रमी यानि ऑन लाइन ताश खेलने के लेन-देन से जोड़कर जांच की गई है। लंबी जांच के बावजूद पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। जिसकी वजह से पुलिस की भारी बदनामी हो रही है।
पहले भी यूं बदनाम हुआ है नोएडा इतिहास के पन्नों को पलटते हैं तो पता चलता है कि पुलिस की लापरवाही की वजह से नोएडा पहले भी देश और दुनिया भर में बदनाम हुआ है। नोएडा शहर के बीचोंबीच बसे निठारी गांव से सटे डी-5 में व्यवसाई मोहिंदर सिंह पंधेर अययाशी करता था। उसकी देखा-देख नौकर सुरेन्द्र कोली अपनी हवश मिटाने के लिए अबोध बच्चों के साथ दुष्कर्म किया करता था। मामला खुलने के डर से वह इन बच्चों की हत्या कर शवों को ठिकाने लगा दिया करता था। मामले में पुलिस के पास दर्जनों शिकायतें गईं थी। लेकिन प्रभाव के चलते पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। 29 दिसंबर 2006 को यह मामला मीडिया में उजागर हुआ तब कहीं जाकर पुलिस की कुंभकर्णी नींद खुली और मामले की जांच शुरु हुई।
Uttar pradesh News कर्ज से परेशान युवक ने उठाया आत्मघाती कदम, पेड़ से लटक दी जानपुलिस की लीपापोती की वजह से इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई जांच में पता चलता है कि निठारी चौकी पर तैनात तत्कालीन चौकी इंचार्ज मोहिंदर सिंह पंधेर की चाकरी किया करते थे। धीरे-धीरे मामला तूल पकड़ता गया और तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार को इस प्रकरण में खासी बदनामी झेलनी पड़ थी । स्थानीय पुलिस की लापरवाही का असर यह हुआ कि सरकार को इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी। सीबीआई की जाँच से नर पिशाच सलाखों के पीछे पहुंचे।
दूसरा प्रकरण 15 मई 2008 के आरूषि हत्याकांड से जुडा है। सेक्टर-25 में डा. राजेश तलवार अपने परिवार के साथ रहते थे। उनकी बेटी डीपीएस स्कूल की 9वीं कक्षा की छात्रा थी। डा. तलवार को नौकर हेमराज और आरूषि के हत्या के मामले में जेल भेजा गया था। इस मामले में जांच के दौरान पुलिस ने शुरूआती दौर में घोर लापरवाही बरती थी। जिसके चलते बाद में मायावती की बसपा सरकार पर दबाव बढ़ा और उन्होंने इस हत्याकांड की सीबीआई जांच की सिफारिश की। ये दोनों प्रकरण उत्तर प्रदेश या यूं कहें नोएडा पुलिस के ऊपर बड़े धब्बे की तरह आज तक चिपके हुए हैं।
एक गिरोह उलझा रहा है मसले को भाजपा कार्यकर्ता संचित शर्मा पर हुए हमले को ब्राहमण वर्सिज ठाकुर बनाने का प्रयास निरंतर जारी है। जबकि समाज को जानने वालों का कहना है। कि कुछ लोगों ने संचित शर्मा पर हमला कर पुलिस को सीधी चुनौती दी है । हमलावर कानून का मखौल उड़ा रहे हैं। पुलिस को इस मामले में अपराधियों को गिरफ्तार करके अपने होने का अहसास कराना चाहिए। इस मामले को किसी जाति या जातीयता से बिल्कुल जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। क्योंकि जातीय व्यवस्था समाज को जोडऩे का काम करती है। एक-दूसरे के सुख-दुख में सभी जातीयताओं के लोग सरीक होते रहे हैं इसके पीछे केवल सामाजिक ताने-बाने को बनाये रखने की मंशा रहती है। जिस तरह से इस प्रकरण में अलग-अलग जातियों के लोग उलझ रहे हैं वह किसी के लिए भी ठीक नहीं है।
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