
कहते हैं जो बड़े लोग या ज्ञानी लोग करते हैं। आम लोग भी उनका अनुसरण करते हैं। वैसे तो माना यह भी जाता है कि जो बहुत बड़े सीनियर ऑफिसर होते हैं उनके पास शौक पूरा करने का समय तो बच ही नहीं पाता। उनके घर में स्टडी रूम या उनके पढऩे का कमरा अंधेरा कम ही देख पाता है। 24 में से 18 घंटे तो किताबों के साथ ही बिताते हैं तब जाकर इतने सीनियर पदों पर स्थापित होते हैं। ये भी सच है कि क्या आपने (सीईओ) डॉ. लोकेश एम तथा (ऐसीईओ) संजय खत्री की आँखों में ऐसी चमक पहले कभी देखी थी क्या? बेशक मुहूर्त के समय हवा नहीं चली पर समापन पर तो लुत्फ ही लगा दिया। बरसों बाद इस महोत्सव ने पतंग उड़ाने की कला, संस्कृति और कौशल को एक नया ही मंच प्रदान किया था। पतंगबाजों बल्कि पतंग प्रेमियों व कलाकारों ने भी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़े अधिकारियों ने भी अपने बचपन को पतंग उड़ाकर ताजा किया।
इस आयोजन में करीब 1,000 स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, विशेष रूप से स्फीयर इंटरनेशनल स्कूल के बच्चों ने। ऐसा लग रहा था जैसे की ये बच्चे टेलीफोन या वीडियो गेम्स के विषय में जानते ही न हों, पूरे पतंगबाज से लग रहे थे। दर्शक भी मंत्रमुग्ध थे। समारोह में विभिन्न श्रेणियों में प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की गई, जिनमें समग्र चैम्पियनशिप, रिंग काइट, भारतीय पारंपरिक ट्रेन पतंग, स्पोर्ट्स काइट और शो काइट जैसी प्रतियोगिताएं शामिल की गई थीं।
इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करते हुए नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) के CEO डॉ. लोकेश एम. गद-गद थे, उन्होंने भावविभोर हो कहा कि इस महोत्सव ने न केवल पतंग उड़ाने की कला को बढ़ावा दिया है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के बीच एकता और रचनात्मकता को भी उजागर किया है। विजेताओं में टीम ओडिशा ने समग्र चैम्पियनशिप, टीम केरल और लक्षद्वीप ने रिंग काइट चैंपियनशिप, टीम राजस्थान ने भारतीय पारंपरिक ट्रेन पतंग चैंपियनशिप, टीम गुजरात ने स्पोर्ट्स काइट चैंपियनशिप, और टीम कर्नाटक ने शो काइट चैंपियनशिप में जीत हासिल की। धन्य हैं ये विद्यालय, इन बच्चों के माता-पिता तथा ये बच्चे जो आज के बच्चों के शौक से अलग पल रहे हैं। क्योंकि पतंगबाजी के लिए तो खुले मैदान में गर्मी, धूप, दौड़ भाग यानि पूरा ही व्यायाम करना पड़ता है।
Noida News :सीईओ ने कहा कि पतंग उड़ाना केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक साझा आनंद, एकाग्रता और उससे मिलने वाला उत्साह का प्रतीक है। इससे आमजन को भी लगा है कि शौक जिंदा होने चाहिए। इन सब ही के उत्साहवर्धन के लिए वहां फोनरवा अध्यक्ष योगेंद्र शर्मा, विजय भाटी, लाट साहब अशोक मिश्रा, एमपी सिंह, संजीव तथा नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी उपस्थित रहे। सब ही ने तीन दिन की इस पतंगबाजी को बहुत ही इंजॉय किया लेकिन यह भी सत्य है कि इसके लिए विशेष स्थान पतंग उड़ाने वाले मंजे इत्यादि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
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अभी 3 साल पहले ही सेक्टर-12 के एफ ब्लॉक से एक व्यक्ति ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट के आसपास से कहीं गुजर रहा था वह स्कूटी पर था और मंजे से उसकी गर्दन इतनी कट गई थी कि यदि अस्पताल पास में ना होता उसे वहां ना ले जाया जाता तो शायद आज वह दुनिया में ही ना होता। विशेषकर चाइनीस माँझा से आम मांझा तो टूट जाता है पर चाइनीज मांझा नहीं टूटता। अत: किसी का भी नुकसान कर सकता है इसलिए शौक जिंदा रखना बहुत जरूरी है लेकिन पतंगबाजी के लिए जगह का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण।
नोएडा में हुए इस पतंगबाजी के उत्सव ने जहां आसमान को रंगों से भर दिया। वहीं इस उत्सव में शामिल हुए लोगों के बचपन की यादों को ताजा कर उनके मन को भी अनेक रंगों और नई ताजगी से भर दिया। Noida News :