
उसका ताला खुलवाया गया वहां पर डॉ. विमल राय ने कोरोना के समय में पेड़ लगाना शुरू किया। प्रदीप वोहरा ने उनके लिए पानी की व्यवस्था करवाई। सुमित राम भक्त टीम के साथ उनकी पूरी मदद करने लगे। कोरोना काल घर के अंदर रहकर काटना बहुत कठिन था। उस कठिन समय को इन्होंने वहां पर पौधा रोपण करने में बिताया। हम सभी जानते हैं कोरोना लगभग हमारे 2 साल ले गया। इस बीच ना तो वहां पर बच्चे खेलने निकले। ना ही किसी ने पेड़ों को तोडऩे की कोशिश की। क्योंकि ग्रीन बेल्ट है तो ट्रीमिंग का तो सवाल ही नहीं। और इतने समय में एक बगिया नाले के किनारे की पूरी ग्रीन बेल्ट में बन गई।
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सेक्टर-22 में अयोध्या में भगवान श्रीराम की मूर्ति के प्राण-प्रतिष्ठïा की पहली वर्षगांठ पर अकूट भंडारा चल रहा था। वहीं हमारे वीर सैनानी सुभाष चंद्र बोस की जयंती का का कार्यक्रम हुआ। चारों तरफ हरियाली नीचे घनी घास। हालांकि पानी का वहां ज्यादा अच्छा इंतजाम नहीं है। लेकिन पेड़ जहां बड़े हो जाते हैं। वह अपने इंतजाम भी स्वयं करने लगते हैं। बाउंड्री वॉल के उस तरफ सेक्टर-22 का गंदा नाला बह रहा है। जिसमें पूरे सेक्टर-22 का गंदा पानी जाता है पहले उस नाले के कारण वहां आसपास के घरों में दुर्गंध रहती थी। वहां मकान सस्ते बिकते थे। आज वहां ग्रीन बेल्ट एक हरा-भरा पार्क बन चुकी है। वहां पर सारे चार मंजिले घर हैं। एक-एक मकान में चार परिवार रहते हैं। बच्चे भी खेलते हैं। पेड़ भी बड़े हैं। वहां पर घास भी नहीं सूखती इससे अच्छा समय का सदुपयोग और क्या हो सकता था? गर्मी अब पहले से बहुत अधिक पडऩे लगी है इसलिए प्रदीप वोहरा प्राधिकरण के चक्कर काट रहे हैं कि उनको वहां पर एचटीसी जल की सप्लाई दे दी जाए। क्योंकि यह सूखी बेल्ट आज सचमुच ग्रीन होकर सेक्टर-22 की प्राण वायु बन रही है।
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गर्मी की सुबह शाम में ओपन जिम, योग सब कुछ यहीं पर हो रहा है। लेकिन बहुत उपयोगी है कि अब सब मिलकर इस ग्रीन बेल्ट को ऐसे ही संवारे जिसे देखकर स्वयं ही मुंह से निकलता है कि- कर्म करें तो फल मिलता है आज नहीं तो कल मिलता है। किस प्रकार हरियाली ने नाले की बदबू को ही सोक लिया यह इसका जीता जागता उदाहरण है। Noida News :