नोएडा पुलिस कमिश्नरी में DIG एवं अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के पद पर तैनात IPS अधिकारी राजीव नारायण मिश्रा 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त हो गए। 2010 बैच के इस अधिकारी ने वाराणसी, अयोध्या, बरेली, मेरठ, कुशीनगर, लखनऊ और नोएडा में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।

Noida News : नोएडा पुलिस कमिश्नरी की पुलिस व्यवस्था में बहुत बड़ा बदलाव हो गया है। नोएडा की पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव एक बड़े पुलिस अधिकारी के द्वारा पुलिस की वर्दी को अलविदा कहने के रूप में सामने आया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी, जेवर तथा दनकौर आदि को मिलाकर बनाए गए गौतमबुद्धनगर जिले की कानून-व्यवस्था को संभालने वाला यह पुलिस अधिकारी 31 अक्टूबर 2026 को रिटायर हो गया है।
आपको बता दें कि नोएडा की कानून व्यवस्था उत्तर प्रदेश के तेज तर्रार IPS अधिकारी राजीव नारायण मिश्रा के हाथों में रही है। नोएडा पुलिस कमिश्नरी में DIG यानि कि अपर पुलिस आयुक्त (Law and order) के रूप में तैनात राजीव नारायण मिश्रा रिटायर हो रहे हैं। जब आप यह समाचार पढ़ रहे हैं तब राजीव नारायण मिश्रा की रिटायरमेंट की प्रक्रिया चल रही है। रिटायरमेंट की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही राजीव नारायण मिश्रा हमेशा-हमेशा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस की गौरवशाली इतिहास वाली वर्दी को भी अलविदा कह रहे हैं। राजीव नारायण मिश्रा के स्थान पर नए अफसर की तैनाती नहीं हुई है। Noida News :
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राजीव नारायण मिश्रा के रिटायर होने से उत्तर प्रदेश पुलिस के अफसरों में से एक जांबाज अफसर कम हो गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस का एक ऐसा जाबांज ऑफिसर जिनकी पहचान उनके नाम से नहीं बल्कि उनके कामों और योगदान से होती रही है। IPS राजीव नारायण मिश्र आज के समय में किसी पहचान के मोहताज नहीं है। ये नाम तब और बड़ा हो जाता है जब आप आपनी जान की परवाह किये बगैर अपनी ड्यूटी एवं देश की सुरक्षा को शिरोधार्य करते हुए श्री राम जन्मभूमि पर हुए आतंकवादी हमले में दुश्मनों से आमना-सामना करने का मौका मिल जाए। तेज तर्रार IPS अधिकारी ने इस आतंकवादी हमले में CRPF के साथ आतंकवादियों से सीधा मोर्चा लेते हुए हमले में शामिल सभी पांचों आतंकवादियों को मार गिराया था। IPS राजीव नारायण मिश्र की छवि काबिल IPS अधिकारियों में एक तेजतर्रार पुलिस वालों में की जाती रही है। यूपी के कानपुर नगर में 30 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन जन्मे IPS राजीव नारायण मिश्र के पिता प्रदेश सरकार में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी थे। उनकी मां मनोरमा मिश्रा एक शिक्षित गृहस्थ महिला थी। जिन्होंने दो विषयों में स्नातकोत्तर की डिग्री ही नहीं हासिल की थी, अपितु साहित्य रत्न की उपाधि भी प्राप्त की थी। पिता के स्थानांतरण, विभिन्न स्थानों पर होते रहने के कारण IPS राजीव नारायण मिश्र की प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में हुई। इन्होंने माध्यमिक और उच्च शिक्षा कानपुर में प्राप्त की। IPS राजीव नारायण मिश्र ने शासकीय सेवाओं के साथ-साथ, पीएचडी की उपाधि रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से हासिल की थी।यह भी पढ़ें : अमित शाह बनाम चाणक्य : गोमती में फेंक दी बाबा से अदावत
IPS राजीव नारायण मिश्र ने बीकॉम एवं एमकॉम, क्राइस्टचर्च कॉलेज, कानपुर से किया। इन्होंने एमकॉम की पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। विभिन्न विफलताओं एवं सफलताओं के उपरांत आईपीएस राजीव नारायण मिश्र आज भारतीय पुलिस सेवाओं के जाबांज चुनिंदा अधिकारियों में से एक है। IPS राजीव नारायण मिश्र ने भारतीय पुलिस सेवा में आने से पहले कानपुर की एक निजी कंपनी में मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में, उसके उपरांत पीपीएन डिग्री कॉलेज कानपुर में प्रवक्ता का काम किया। आईपीएस राजीव नारायण मिश्र पुलिस सेवाओं में आने से पूर्व मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से पीसीएस संवर्ग में चयनित होकर मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में अपना योगदान दे चुके हैं। एक जांबाज पुलिस अधिकारी के रूप में IPS राजीव नारायण मिश्र की उपलब्धियों की फेहरिस्त बहुत लंबी है। IPS राजीव नारायण मिश्र भारतीय पुलिस सेवा के वर्ष 2010 बैच के साहसिक पुलिस अधिकारी हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इनकी पहली नियुक्ति जनपद वाराणसी में हुई। इसके उपरांत जनपद अयोध्या, बरेली, मेरठ, कुशीनगर एवं लखनऊ तथा नोएडा में यह विभिन्न पदों पर नियुक्त रहे हैं। IPS राजीव नारायण ने प्रशिक्षण की दृष्टि से सिंगापुर पुलिस की कार्यप्रणाली को भी देखा और समझा है। राजीव नारायण मिश्रा एसपी, एटीएस (आतंकवाद निरोधी दस्ता), एसपी और एसटीएफ के रूप में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कमान संभाली। यही नहीं, एक समय पेशेवर अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने वाले इस अधिकारी ने एसएसपी, एसटीएफ के रूप में पूरे उत्तर प्रदेश की कमान संभाली और अभ्यस्त, पेशेवर एवं पलायित अपराधियों पर निशाना साधते हुए उन्हें उनके अंतिम अंजाम तक पहुंचाया।
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