विज्ञापन
Jewar Airport: जेवर एयरपोर्ट को केवल एक आधुनिक एयरपोर्ट के रूप में नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रतीक के रूप में भी विकसित किया गया है। टर्मिनल भवन के डिजाइन में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विशेष महत्व दिया गया है।

उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। लंबे इंतजार के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से कमर्शियल उड़ानों का संचालन शुरू हो गया। सुबह लखनऊ से उड़ान भरकर आई पहली इंडिगो फ्लाइट ने सफलतापूर्वक जेवर एयरपोर्ट पर लैंडिंग की। इसके साथ ही एयरपोर्ट ने आधिकारिक रूप से यात्री सेवाओं के नए अध्याय की शुरुआत कर दी। इस खास मौके पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू भी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे। उन्होंने बोर्डिंग गेट का उद्घाटन कर सेवा की शुरुआत की। एयरपोर्ट परिसर में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आम लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला।
जेवर एयरपोर्ट की शुरुआत को यादगार बनाने के लिए उन किसानों को विशेष सम्मान दिया गया जिन्होंने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अपनी जमीन दी थी। एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले पहले विशेष विमान में करीब 170 किसानों को लखनऊ ले जाया गया। लखनऊ पहुंचने के बाद किसानों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात का कार्यक्रम रखा गया। इसके बाद वही विमान किसानों को वापस नोएडा लेकर आएगा। इस पहल को एयरपोर्ट निर्माण में योगदान देने वाले किसानों के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट को केवल एक आधुनिक एयरपोर्ट के रूप में नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और विरासत के प्रतीक के रूप में भी विकसित किया गया है। टर्मिनल भवन के डिजाइन में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विशेष महत्व दिया गया है। यात्रियों को एयरपोर्ट के अंदर वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों की झलक देखने को मिलेगी। इसके अलावा भवन की संरचना में भारतीय वास्तुकला और आधुनिक तकनीक का संतुलित मिश्रण दिखाई देता है। इसका उद्देश्य यात्रियों को यात्रा के साथ-साथ सांस्कृतिक अनुभव भी देना है।
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। डिजी यात्रा जैसी सुविधा के जरिए यात्रियों को तेज और आसान चेक-इन प्रक्रिया मिलेगी। इस तकनीक में यात्री का चेहरा ही उसकी पहचान और बोर्डिंग पास का काम करेगा। इसके अलावा एयरपोर्ट पर आधुनिक बैगेज सिस्टम, हाई-स्पीड एस्केलेटर, लिफ्ट और अन्य विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं जिससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके।
लखनऊ और नोएडा के बीच हवाई सेवा की शुरुआत 15 जून से हो चुकी है। उम्मीद की जा रही है कि 1 जुलाई 2026 से इस रूट पर नियमित उड़ानों का संचालन शुरू हो जाएगा। इस सेवा के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। पहले जहां सड़क या रेल मार्ग से कई घंटे लगते थे वहीं अब हवाई सफर लगभग एक घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत बनाया गया है। यहां सीआईएसएफ, उत्तर प्रदेश पुलिस और निजी सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई है। पूरे परिसर की निगरानी आधुनिक कैमरों और एआई आधारित सिस्टम के जरिए की जाएगी। इसके साथ ही एयरपोर्ट को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए हैं। बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा के उपयोग की योजना बनाई गई है। लक्ष्य है कि एयरपोर्ट की बड़ी ऊर्जा जरूरतें नवीकरणीय स्रोतों से पूरी की जा सकें।
जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने का फायदा सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर के लाखों लोगों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। अभी ज्यादातर यात्रियों को उड़ान पकड़ने के लिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर निर्भर रहना पड़ता है जहां अक्सर भारी भीड़ और लंबा ट्रैफिक देखने को मिलता है। जेवर एयरपोर्ट शुरू होने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, पलवल, बुलंदशहर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अपने घर के नजदीक ही हवाई यात्रा की सुविधा मिलेगी। इससे यात्रा का समय बचेगा और एयरपोर्ट तक पहुंचने की परेशानी भी कम होगी। यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट को सिर्फ एक एयरपोर्ट नहीं बल्कि पूरे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का नया केंद्र माना जा रहा है।
विज्ञापन