
Kanwad Yatra 2023 : नोएडा। कांवड यात्रा 2023 इस वर्ष 4 जुलाई से शुरू हो रही है। इस पावन पर्व को आसान बनाने के लिए हर स्तर से अनेक उपाय किए जा रहे हैं। इन्हीं उपायों में एक उपाय यह भी है कि इस वर्ष कांवड यात्रा के दौरान नोएडा से 44 स्पेशल बस चलाई जाएगी। ये सभी बस नोएडा से हरिद्वार के लिए प्रतिदिन चलेंगी।
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने कांवड यात्रा के लिए नोएडा से 44 बसें चलाने का फैसला किया है। नोएडा के मोरना बस स्टैंड के प्रवक्ता नरेश पाल सिंह ने चेतना मंच को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कांवड यात्रा के दौरान हरिद्वार तक के लिए यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए नोएडा मोरना डिपो से प्रतिदिन सुबह 6.30 बजे से रात 9 बजे तक 44 बस चलाई जाएगी। सोमवार से यह सेवा शुरू हो गई है। इन बसों को हरिद्वार स्पेशल नाम दिया गया है। नोएडा से हरिद्वार तक प्रति यात्री किराया 365 रुपये रखा गया है।
सबसे पहले जान लेते हैं कि कांवड़ यात्रा क्या होती है। दरअसल धर्म शास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग पर गंगा जल चढ़ाने की परंपरा को कांवड़ यात्रा कहा जाता है। ये जल एक पवित्र स्थान से अपने कंधे पर ले जाकर भगवान शिव को सावन की महीने में अर्पित किया जाता है। इस यात्रा के दौरान भक्त बम भोले के नारे लगाते हुए पैदल यात्रा करते हैं। कहा ये भी जाता है कि कांवड़ यात्रा करने वाले भक्तों को अश्वमेघ यज्ञ के समान पुण्य मिलता है।
कांवड़ यात्रा का इतिहास बहुत पुराना है। शास्त्रों के मुताबित भगवान शिव के परम भक्त परशुराम ने पहली बार इस कांवड़ यात्रा को सावन के महीने में ही किया था। तभी ये कांवड़ यात्रा संतों ने शुरू की और सबसे पहले साल 1960 में सामने आई थी। इस यात्रा में पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती हैं। इसके अलावा एक और मान्यता है कि इस यात्रा की शुरूआत श्रवण कुमार ने की थी। श्रवण कुमार ने अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उनको कांवड़ में बैठाकर लेकर आए और हरिद्वार में गंगा स्नान करवाया था। इसके साथ ही श्रवण कुमार वापस आते वक्त गंगाजल भी लेकर आए थे और इसी जल से उन्होंने भोलेनाथ का जलाभिषेक किया था।
कांवड़ यात्रा एक पवित्र और बेहद ही कठिन यात्रा होती है। इस यात्रा के दौरान भक्त पवित्र स्थानों से गंगाजल लेकर आते हैं इसके साथ ही भक्त उसी पवित्र स्थान पर गंगा स्नान भी करते हैं। ज्यादातर लोग गंगाजल गौमुख, गंगोत्री, ऋषिकेश और हरिद्वार से गंगाजल को लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। एक बात और भक्त जो कांवड़ लेकर जाते हैं वो बांस से बनी हुई होती है। इसके दोनों छोरों पर घड़े बंधे होते हैं जिसमें गंगाजल होता है। इन्हीं घड़ों को गंगाजल से भरकर कांवड़ यात्रा को पैदल पूरा किया जाता है। इसके अलावा कुछ लोग तो नंगे पांव ही यात्रा करते हैं। तो कुछ लोग अपनी सहूलियत के मुताबिक, बाइक, स्कूटर, साइकिल या मिनी ट्रक में भी पूरा करते हैं। इसके साथ ही इस यात्रा के दौरान लोग भक्तों को आराम देने के लिए विश्राम स्थल भी बनाते हैं और इनके खाने पीने का इतंजाम भी करते हैं और चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। Kanwad Yatra 2023