90 मिनट की देरी पर नोएडा में घमासान, युवराज केस की SIT रिपोर्ट तैयार
सूत्रों के अनुसार, टीम ने नोएडा अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों के कर्मियों से अलग-अलग चरणों में लंबी पूछताछ की। CFO, ACP, SHO, CMO समेत जिम्मेदार पदों पर तैनात अफसरों से मौके पर लिए गए फैसलों, अपनाई गई प्रक्रिया और समन्वय की भूमिका को लेकर कड़े सवाल-जवाब हुए

Noida News : नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत ने शहर की प्रशासनिक तत्परता और रेस्क्यू सिस्टम की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की परतें खोलने के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी फैक्ट-फाइंडिंग लगभग पूरी कर ली है और अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक भेजने की तैयारी बताई जा रही है। SIT की जांच का केंद्र यही रहा लापरवाही आखिर किस स्तर पर हुई, निर्णय लेने में देरी क्यों हुई और जिम्मेदार कौन की जवाबदेही तय कैसे होगी।
नोएडा अथॉरिटी में देर रात तक चली पूछताछ
शुक्रवार को जांच की रफ्तार और सख्त हुई, जब SIT टीम दोपहर में नोएडा अथॉरिटी के मुख्यालय पहुंची और देर रात तक वहीं जमी रही। सूत्रों के अनुसार, टीम ने नोएडा अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों के कर्मियों से अलग-अलग चरणों में लंबी पूछताछ की। CFO, ACP, SHO, CMO समेत जिम्मेदार पदों पर तैनात अफसरों से मौके पर लिए गए फैसलों, अपनाई गई प्रक्रिया और समन्वय की भूमिका को लेकर कड़े सवाल-जवाब हुए। इसी दौरान SDRF के जवान और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी फाइलों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड के साथ SIT के सामने पेश हुए। बताया जा रहा है कि पूछताछ से एक दिन पहले टीम ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया था और ग्राउंड रियलिटी समझने के बाद सीधे नोएडा अथॉरिटी में उन अधिकारियों से जवाब मांगा, जिनके कंधों पर रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक तालमेल की जिम्मेदारी थी।
90 मिनट की देरी पर SIT का फोकस
जांच के दौरान सबसे अहम बिंदु यही रहा कि मदद की गुहार के बावजूद करीब 90 मिनट तक युवराज को बचाया क्यों नहीं जा सका। SIT ने रेस्क्यू में इस्तेमाल किए गए उपकरणों की उपलब्धता, संसाधनों की तैनाती, मौके पर मौजूद टीम के प्रतिक्रिया समय और जवानों के समय पर पानी में न उतरने जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, टीम ने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई, या फिर निर्णय प्रक्रिया में देरी, गलत आकलन और समन्वय की कमी ने स्थिति को गंभीर बनाया। SIT ने रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल जवानों के बयान दर्ज किए हैं और उनसे स्पष्ट करने को कहा गया है कि मौके पर मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया गया, किसने निर्देश दिए और किस स्तर पर निर्णय लेने में देरी हुई। जांच का एक अहम पहलू यह भी रहा कि मौके पर मौजूद अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के बीच तालमेल में कमी तो नहीं थी और अगर थी, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
रिपोर्ट सीएम को सौंपने की तैयारी
सूत्रों का दावा है कि SIT ने तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं से जुड़े लगभग सभी तथ्य, दस्तावेज और बयान जांच में शामिल कर लिए हैं। अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की तैयारी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। नोएडा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अगर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो नोएडा अथॉरिटी के संबंधित विभागों के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की आशंका भी जताई जा रही है। Noida News
Noida News : नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत ने शहर की प्रशासनिक तत्परता और रेस्क्यू सिस्टम की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की परतें खोलने के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी फैक्ट-फाइंडिंग लगभग पूरी कर ली है और अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री तक भेजने की तैयारी बताई जा रही है। SIT की जांच का केंद्र यही रहा लापरवाही आखिर किस स्तर पर हुई, निर्णय लेने में देरी क्यों हुई और जिम्मेदार कौन की जवाबदेही तय कैसे होगी।
नोएडा अथॉरिटी में देर रात तक चली पूछताछ
शुक्रवार को जांच की रफ्तार और सख्त हुई, जब SIT टीम दोपहर में नोएडा अथॉरिटी के मुख्यालय पहुंची और देर रात तक वहीं जमी रही। सूत्रों के अनुसार, टीम ने नोएडा अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस प्रशासन और रेस्क्यू से जुड़े विभागों के कर्मियों से अलग-अलग चरणों में लंबी पूछताछ की। CFO, ACP, SHO, CMO समेत जिम्मेदार पदों पर तैनात अफसरों से मौके पर लिए गए फैसलों, अपनाई गई प्रक्रिया और समन्वय की भूमिका को लेकर कड़े सवाल-जवाब हुए। इसी दौरान SDRF के जवान और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि भी फाइलों, दस्तावेजों और रिकॉर्ड के साथ SIT के सामने पेश हुए। बताया जा रहा है कि पूछताछ से एक दिन पहले टीम ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया था और ग्राउंड रियलिटी समझने के बाद सीधे नोएडा अथॉरिटी में उन अधिकारियों से जवाब मांगा, जिनके कंधों पर रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक तालमेल की जिम्मेदारी थी।
90 मिनट की देरी पर SIT का फोकस
जांच के दौरान सबसे अहम बिंदु यही रहा कि मदद की गुहार के बावजूद करीब 90 मिनट तक युवराज को बचाया क्यों नहीं जा सका। SIT ने रेस्क्यू में इस्तेमाल किए गए उपकरणों की उपलब्धता, संसाधनों की तैनाती, मौके पर मौजूद टीम के प्रतिक्रिया समय और जवानों के समय पर पानी में न उतरने जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, टीम ने यह भी जानने की कोशिश की कि क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई, या फिर निर्णय प्रक्रिया में देरी, गलत आकलन और समन्वय की कमी ने स्थिति को गंभीर बनाया। SIT ने रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल जवानों के बयान दर्ज किए हैं और उनसे स्पष्ट करने को कहा गया है कि मौके पर मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल कैसे किया गया, किसने निर्देश दिए और किस स्तर पर निर्णय लेने में देरी हुई। जांच का एक अहम पहलू यह भी रहा कि मौके पर मौजूद अलग-अलग विभागों और अधिकारियों के बीच तालमेल में कमी तो नहीं थी और अगर थी, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
रिपोर्ट सीएम को सौंपने की तैयारी
सूत्रों का दावा है कि SIT ने तकनीकी और प्रशासनिक दोनों पहलुओं से जुड़े लगभग सभी तथ्य, दस्तावेज और बयान जांच में शामिल कर लिए हैं। अब रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपे जाने की तैयारी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। नोएडा से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अगर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो नोएडा अथॉरिटी के संबंधित विभागों के कई अधिकारियों पर कार्रवाई की आशंका भी जताई जा रही है। Noida News












