सौरभ चंद्राकर ओमान से भारत प्रत्यर्पित। नोएडा के सेक्टर-108 में 2023 में पकड़े गए महादेव बेटिंग एप नेटवर्क की जांच फिर चर्चा में, 16 आरोपी हुए थे गिरफ्तार।

Noida News : नोएडा के सेक्टर-108 से शुरू हुआ सट्टे का एक छोटा सा नेटवर्क 2 लाख करोड़ रूपए के हवाला कारोबार तथा सट्टा किंग बनने तक पहुंच गया। चेतना मंच ने नोएडा से शुरू हुए सट्टा बाजार के पूरे कारोबार की परत-पर-परत पड़ताल की है। सट्टा कारोबार से लेकर अवैध हवाला कारोबार चलाने वाले मास्टर माइंड को विदेशी धरती से पकडक़र भारत में लाया गया है। नोएडा के सेक्टर-108 के छोटे से कोने से शुरू हुआ सट्टे का घिनौना धंधा भारत की जांच एजेंसियों ने बंद करा दिया है। Noida News :
महादेव एप के नाम से इंटरनेट पर सनसनीखेज शुरूआत नोएडा से ही की गई थी। नोएडा के सेक्टर-108 में किराए का घर (फ्लैट) लेकर महादेव बेटिंग ऐप से सट्टा खिलवाने वाले सौरभ चन्द्राकर को नोएडा पुलिस भी रिमांड पर ले सकती है। वर्तमान में पूरी दुनिया में सट्टा किंग के नाम से कुख्यात सट्टा सरगना सौरभ चन्द्राकर ही महादेव बेटिंग एप का मुख्य प्रमोटर है। सौरभ चन्द्राकर को कानून की जांच एजेंसियां हाल ही में ओमान से प्रत्यार्पण करा कर भारत लाई है। भारत में इस सट्टा किंग सौरभ चन्द्राकर से लम्बी पूछताछ की जा रही है। दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस की एक अर्जी पर उसे दो दिन का ट्रांजिट रिमाण्ड भी दे दिया है।
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महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप के मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत प्रत्यर्पित किए जाने के बाद अब नोएडा में करीब तीन साल पहले पकड़े गए ऑनलाइन सट्टेबाजी के नेटवर्क की जांच फिर चर्चा में आ गई है। फरवरी 2023 में नोएडा पुलिस ने सेक्टर-108 के एक किराये के मकान में छापा मारकर महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप के नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। इस कार्रवाई में 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी और करीब डेढ़ करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। तत्कालीन जांच में इस नेटवर्क के जरिए 400 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन और कथित वित्तीय फर्जीवाड़े की बात सामने आई थी। अब सौरभ चंद्राकर के भारत आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि नोएडा के सेक्टर-108 से संचालित हो रहा सट्टेबाजी का नेटवर्क सीधे उसके नियंत्रण में था या फिर उसके अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट से जुड़े दूसरे संचालक इसे चला रहे थे? क्या इस नेटवर्क के स्थानीय फ्रेंचाइजी संचालकों और फरार आरोपियों की भूमिका का भी नए सिरे से खुलासा होगा?
फरवरी 2023 में नोएडा पुलिस की जांच में सामने आया था कि सेक्टर-108 के तीन मंजिला मकान में बैठकर ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार संचालित किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य लोगों को जल्दी पैसा कमाने का लालच देकर महादेव एप डाउनलोड करवाते थे। इसके बाद क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों पर ऑनलाइन दांव लगवाए जाते थे। इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया था कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में कुछ लोगों को दुबई में ट्रेनिंग दी गई थी। उन्हें ग्राहकों के सवालों का जवाब देने और सट्टेबाजी के कारोबार को संचालित करने का तरीका सिखाया गया था। उस समय पुलिस ने बताया था कि गिरोह के कुछ अन्य सदस्यों को भी दुबई भेजने की तैयारी थी। नोएडा पुलिस की जांच में इस नेटवर्क का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आया था। भारत के अलग-अलग शहरों के अलावा पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों से इसके तार जुड़े होने की जानकारी मिली थी। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपये की रकम जब्त या फ्रीज किए जाने की जानकारी दी थी। इस पूरे मामले में सचिन सोनी नाम के व्यक्ति की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई थी। तत्कालीन पुलिस जांच के अनुसार, सचिन सोनी भारत में सौरभ चंद्राकर की ओर से नेटवर्क के संचालन का काम संभाल रहा था। आरोपियों के दुबई आने-जाने की व्यवस्था, टिकट और होटल आदि का इंतजाम भी उसी के माध्यम से किए जाने की बात सामने आई थी। नोएडा में गिरफ्तार किए गए लोगों को कथित तौर पर फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत काम दिया गया था। इस मॉडल में अलग-अलग पैनल और शाखाएं बनाकर सट्टेबाजी का कारोबार चलाया जाता था। फ्रेंचाइजी संचालकों को कारोबार से कमीशन मिलता था। इसी व्यवस्था के माध्यम से नेटवर्क को अलग-अलग शहरों और देशों तक फैलाया गया। Noida News :
अब सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद सचिन सोनी की भूमिका, नोएडा के स्थानीय संचालकों और उस समय फरार बताए गए आरोपियों के संबंध में नए सिरे से पूछताछ और जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। महादेव ऑनलाइन बुक का नेटवर्क केवल ऑनलाइन सट्टेबाजी तक सीमित नहीं था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस कारोबार से मिलने वाली रकम को छिपाने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। इन खातों के जरिए कई स्तरों पर लेनदेन किया जाता और बाद में हवाला चैनलों के माध्यम से रकम विदेश भेजने के आरोप हैं। सीबीआई की जांच में भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट के पैनल और फ्रेंचाइजी नेटवर्क के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश और अन्य आयोजनों पर सट्टा लगाया जाता था। नोएडा के सेक्टर-108 में पकड़ा गया मॉड्यूल इस पूरे नेटवर्क की एक स्थानीय कड़ी था। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि यहां से संचालित कारोबार का पैसा किन बैंक खातों में पहुंचा, किन लोगों को कमीशन मिला और विदेश में बैठे संचालकों तक रकम किस रास्ते से पहुंचाई गई।
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महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप के प्रमुख प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर 2026 को ओमान से भारत लाया गया। सीबीआई की विशेष टीम उसे भारत लेकर पहुंची। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। इसी आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। 2 नवंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सीबीआई को सौरभ चंद्राकर का दो दिन का ट्रांजिट रिमांड दे दिया। अदालत ने उसे छत्तीसगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है और महादेव ऑनलाइन बुक मामले में प्रमुख आरोपियों में शामिल है। उसके खिलाफ दो सीबीआई मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि ईडी के मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की गई है। सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। ईडी ने रायपुर की विशेष पीएमएलए अदालत में उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने और उसकी संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर को भारत लाया जाना उसके खिलाफ चल रही भगोड़ा आर्थिक अपराधी संबंधी कार्यवाही को अपने आप समाप्त नहीं करता। एजेंसी का कहना है कि वह अपनी मर्जी से कानून के सामने पेश नहीं हुआ, बल्कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया के जरिए भारत लाया गया है। ईडी ने मार्च 2026 में महादेव ऑनलाइन बुक मामले में दुबई और नई दिल्ली स्थित संपत्तियों को मिलाकर करीब 1,700 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच करने की जानकारी दी थी। इनमें दुबई की आलीशान संपत्तियां और दिल्ली की संपत्तियां शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि अवैध सट्टेबाजी से हासिल रकम को अलग-अलग माध्यमों से निवेश किया गया था। Noida News :
सौरभ चंद्राकर के भारत आने के बाद नोएडा में फरवरी 2023 में पकड़े गए महादेव बेटिंग एप के मॉड्यूल की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है। नोएडा पुलिस पहले ही इस नेटवर्क के स्थानीय संचालन, गिरफ्तार आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की पड़ताल कर चुकी है। नोएडा के एडीसीपी अभय कुमार मिश्र के अनुसार पुलिस इस मामले पर नजर बनाए हुए है। अन्य जांच एजेंसियों के साथ समन्वय करके आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुराने मामले से जुड़े तथ्यों और कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सौरभ चंद्राकर से पूछताछ के दौरान नोएडा के सेक्टर-108 में संचालित नेटवर्क के बारे में भी जानकारी हासिल की जाएगी? क्या उस समय पकड़े गए आरोपियों के पीछे काम कर रहे असली संचालकों के नाम सामने आएंगे? और क्या 400 करोड़ रुपये से अधिक के कथित लेनदेन से जुड़े लोगों तक जांच एजेंसियां पहुंच पाएंगी?
फरवरी 2023 की पुलिस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया था कि नोएडा केवल इस नेटवर्क के ग्राहकों का केंद्र नहीं था, बल्कि यहां से ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन करने वाला एक संगठित मॉड्यूल भी सक्रिय था। इस मॉड्यूल के तार विदेश में बैठे संचालकों तक जुड़े होने की बात सामने आई थी। अब करीब तीन साल बाद इस नेटवर्क के प्रमुख प्रमोटर की भारत वापसी ने पुराने मामले को फिर महत्वपूर्ण बना दिया है। यदि केंद्रीय जांच एजेंसियों की पूछताछ में नोएडा के मॉड्यूल से संबंधित नए तथ्य सामने आते हैं तो स्थानीय स्तर पर गिरफ्तार हुए आरोपियों से लेकर विदेश में बैठे संचालकों तक की भूमिका की नई तस्वीर सामने आ सकती है। नोएडा के सेक्टर-108 से शुरू हुई पुलिस की उस कार्रवाई के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सौरभ चंद्राकर की पूछताछ में नोएडा कनेक्शन को लेकर क्या खुलासे होते हैं। Noida News :
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