यह मामला नोएडा से लेकर दिल्ली, बिहार के पटना तथा हैदराबाद तक फैला हुआ है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में जांच का दायर भी बढ़ा दिया है।

Noida News; नोएडा शहर के सेक्टर-76 में पकड़ी गई कैंसर की दवाई की बरामदगी कोई सामान्य मामला नहीं है। नोएडा में अवैध रूप से भंडारण करके रखी गई जीवन बचाने की दवाई की बरामदगी का यह मामला मेडिकल माफिया के ऊपर बड़ा प्रहार है। बताया जा रहा है कि नोएडा में पकड़े गए दवाई के भंडार के तार दूर तक मेडिकल माफिया के साथ जुड़े हुए हैं। यह मामला नोएडा से लेकर दिल्ली, बिहार के पटना तथा हैदराबाद तक फैला हुआ है। जांच एजेंसियों ने इस मामले में जांच का दायर भी बढ़ा दिया है।
नोएडा के सेक्टर-76 में फ्लैट नम्बर-402 बना चर्चा का विषय
नोएडा के सेक्टर-76 में स्थापित आम्रपाली प्रिंसली सोसायटी का फ्लैट नम्बर-402 बड़ी चर्चा का विषय बन गया है। नोएडा के फ्लैट नम्बर-402 में हुई छापेमारी में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने स्वास्थ्य विभाग, पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। सेक्टर-76 स्थित अम्रपाली प्रिंसली सोसाइटी का फ्लैट नंबर-402 बाहर से एक सामान्य आवासीय फ्लैट दिखाई देता था, लेकिन अंदर करोड़ों रुपये की कैंसर और अन्य महंगी बायोलॉजिकल दवाओं का गुप्त भंडार बना हुआ था। संयुक्त छापेमारी में करीब 2 करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं बरामद की गई हैं और एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में इस पूरे नेटवर्क के तार दिल्ली के बड़े दवा गिरोह और देश भर में सरकारी सप्लाई चेन तक जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
दिल्ली की जांच से खुला नोएडा का बड़ा राज
जानकारी के अनुसार दिल्ली में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान एजेंसियों को सूचना मिली थी कि नोएडा के एक फ्लैट में नियंत्रित श्रेणी की महंगी कैंसर रोधी दवाओं का अवैध भंडारण किया जा रहा है। सूचना मिलते ही दिल्ली क्राइम ब्रांच, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और गौतमबुद्ध नगर जिला औषधि विभाग की संयुक्त टीम ने 20 और 21 जुलाई की रात सेक्टर-76 स्थित अम्रपाली प्रिंसली सोसाइटी में छापा मारा। तलाशी के दौरान फ्लैट से बड़ी संख्या में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली अत्यंत महंगी बायोलॉजिकल दवाएं और इंजेक्शन बरामद हुए। अधिकारियों के अनुसार बरामद दवाओं की अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये है। सभी दवाओं को जब्त कर सील कर दिया गया है और उनके बैच नंबर तथा दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
एक आरोपी गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क की तलाश
छापेमारी के दौरान आनंद कुमार नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसका संबंध दिल्ली में सक्रिय एक बड़े दवा नेटवर्क से हो सकता है। पूछताछ के आधार पर अब इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है और आगे कई गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। जांच का सबसे गंभीर पहलू यह है कि अधिकारियों को संदेह है कि बरामद कुछ दवाएं सरकारी आपूर्ति प्रणाली, विशेषकर बिहार सरकार की सप्लाई से जुड़ी हो सकती हैं। यदि जांच में यह आशंका सही साबित होती है तो मामला केवल अवैध भंडारण का नहीं बल्कि सरकारी दवाओं की कालाबाजारी और संगठित तस्करी का बन सकता है। फिलहाल बैच नंबर और रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है।
कैंसर मरीजों की जिंदगी से जुड़ा मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर की दवाएं अत्यंत महंगी और जीवनरक्षक होती हैं। इनकी अवैध खरीद-फरोख्त न केवल मरीजों के जीवन से खिलवाड़ है बल्कि नकली या गलत तरीके से संग्रहित दवाओं के जरिए गंभीर स्वास्थ्य संकट भी पैदा कर सकती है। ऐसे मामलों में दवा की गुणवत्ता, तापमान और वैध सप्लाई चेन का पालन बेहद जरूरी होता है। नोएडा शहर में हुई यह कार्रवाई हाल के वर्षों की सबसे बड़ी दवा बरामदगी में से एक मानी जा रही है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह फ्लैट कब से गुप्त गोदाम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, दवाएं कहां-कहां भेजी जाती थीं और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
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