
Noida News : भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता व प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा है कि फ्रंट लाइन पर लड़ने वाले पत्रकार आज भी ईमानदार हैं, लेकिन मीडिया हाउसों ने इन पत्रकारों की कलम पर पहरा लगा दिया है जिस वजह से देश में घट रही घटनाओं की सच्चाई सामने नहीं आ पाती।
कोविड 19 काल में शहीद हुए देशभर के पत्रकारों की याद में नोएडा के सेक्टर 72 में बनाए गए राष्ट्रीय स्मारक के लोकार्पण के मौके पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने चेतना मंच के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि पत्रकार किसी गांव, शहर व कस्बे का नहीं होता। उसका जीवन सार्वजनिक होता है और वह हमेशा फ्रंटलाइन पर लड़ता है। कोरोना काल के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकारों ने फ्रंटलाइन में रहते हुए अपने प्रांण गंवाए उन्हीं पत्रकारों को आज श्रद्धांजलि देने यहां आए हैं।
मीडिया की स्वतंत्रता पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पत्रकार आज भी ईमानदार हैं, लेकिन मीडिया हाउस ईमानदार नहीं है। उन्होंने उदाहरण दिया कि कल दिल्ली में पेंशन बहाली की मांग को लेकर लाखों लोग रामलीला मैदान में जुटे थे, लेकिन किसी भी न्यूज चैनल ने उसकी कवरेज नहीं दिखाई। यह इसलिए हुआ कि मीडिया हाउस ने प्रेस की स्वतंत्रता पर कब्जा कर लिया है। देश में क्या घटनाक्रम हो रहा है तथा उसकी सच्चाई क्या है यह जनता के सामने नहीं आ पाता।
श्री टिकैत ने कहा कि नोएडा मीडिया क्लब द्वारा देश में पहला ऐसा स्मारक स्थापित किया गया है जो पत्रकारों की याद में बनाया गया है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिस स्थान पर यह स्मारक स्थापित किया गया है उसमें लगे हर पेड़ पर कोरोना काल के दौरान शहीद पत्रकारों के नाम लिखे जाएं। जो वृक्ष फल देता हो उस पर महिला पत्रकार तथा जो वृक्ष छाया देता हो उस पर पुरुष पत्रकारों के नाम होने चाहिए। इससे मृत पत्रकारों के परिवारों की भावनाएं भी जुड़ेंगी।