
विनय की इस सफलता का प्रमुख श्रेय यदि किसी को जाता है तो वे हैं विनय के भाई तथा भाजपा पूर्वांचल मोर्चा के जिलाध्यक्ष हरीश वर्मा। महज 22 दिनों में हरीश वर्मा ने अपनी रणनीति को क्षेत्र के लोगों के बीच ऐसा सामंजस्य बिठाकर क्रियान्वित किया कि विनय वर्मा 25 हजार से अधिक वोटों से जीत गए।
बतौर विधायक उनकी क्या प्राथमिकता रहेगी? इस पर विनय वर्मा ने बताया कि क्षेत्र का सर्वांगीण विकास उनकी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने शोहरतगढ़ क्षेत्र में बच्चों की तकनीकी पढ़ाई के लिए आईटीआई को शासन से मंजूर करा लिया। यही नहीं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से मिलकर बस अडडा की स्वीकृति भी करा दी। लोगाों के ईलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित करने की भी स्वीकृति करा ली। इसके अलावा सड़क, पेयजल, विद्युत आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी प्रयासरत है। उनका दावा है कि क्षेत्रीय जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप विकास कार्य कराने में वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। राजनीतिक यात्रा के बाबत पूछने पर वे कहते हैं कि यह महज एक पड़ाव है, मंजिल अभी बाकी है। इसके लिए प्रयास जारी रहेंगे।
उनके पिता, मित्र तथा सहयोगी बताते हैं कि स्टाफ क्र्वाटर में रहने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का लाल इतना कमाल कर दिखायेगा। इस बात की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन विनय ने अपने दृढ़ संकल्प, मेहनत, ईमानदारी व व्यवहार से इस फंसाने को हकीकत में बदलकर दिखा दिया। ऐसे ही कर्मठ लोगों को प्रेरणा देने के लिए दुनिया के प्रसिद्घ कवि दुष्यंत ने क्या खूब लिखा है-
कैसे आकाश में सुराख हो नहीं सकता।
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो।
प्रस्तुति : अरूण सिन्हा