भारतीय राजनीति की एक सधी हुई, सौम्य और प्रभावशाली आवाज अब हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और मेरठ से तीन बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने वाली मोहसिना किदवई का बुधवार तड़के निधन हो गया।

Noida News : भारतीय राजनीति की एक सधी हुई, सौम्य और प्रभावशाली आवाज अब हमेशा-हमेशा के लिए खामोश हो गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और मेरठ से तीन बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व करने वाली मोहसिना किदवई का बुधवार तड़के निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं किदवई के निधन की खबर ने कांग्रेस खेमे से लेकर व्यापक राजनीतिक गलियारों तक गहरा शोक फैला दिया है। दशकों तक सक्रिय राजनीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने वाली यह वरिष्ठ नेता अब नोएडा से अपनी अंतिम यात्रा पर विदा होंगी।
मोहसिना किदवई का पार्थिव शरीर नोएडा के सेक्टर-40 स्थित उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। यहीं से दोपहर बाद उनकी अंतिम यात्रा निकाले जाने की तैयारी की गई है। इसके बाद दिल्ली के निजामुद्दीन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। नोएडा में उनके घर के बाहर सुबह से ही शोक जताने वालों का आना शुरू हो गया है और राजनीतिक व सामाजिक हलकों में गमगीन माहौल बना हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मोहसिना किदवई का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने मेरठ का कई बार संसद में प्रतिनिधित्व किया और जनता के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई। संसदीय राजनीति में उनका सफर केवल चुनावी जीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने संगठन, सरकार और जनसरोकार तीनों मोर्चों पर प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। यही वजह है कि उनके निधन को कांग्रेस के एक अनुभवी दौर के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
मोहसिना किदवई ने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के दौर में केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभाई। स्वास्थ्य, शहरी विकास, पर्यटन और नागरिक उड्डयन जैसे विभागों में उनकी भूमिका उल्लेखनीय मानी जाती है। प्रशासनिक अनुभव, राजनीतिक समझ और संगठनात्मक पकड़ ने उन्हें कांग्रेस के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल किया, जिन पर पार्टी लंबे समय तक भरोसा करती रही।
मोहसिना किदवई केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रहीं। वह दो बार राज्यसभा की सदस्य भी रहीं और पार्टी संगठन में भी शीर्ष स्तर पर सक्रिय रहीं। कांग्रेस महासचिव के रूप में काम करने के साथ-साथ उन्होंने पार्टी की महत्वपूर्ण समितियों में भी अपनी भूमिका निभाई। उन्हें गांधी परिवार के करीबी और भरोसेमंद नेताओं में गिना जाता था, जबकि सार्वजनिक जीवन में उनकी छवि एक संतुलित, अनुभवी और सुलझी हुई नेता की रही।