न्यू नोएडा के विकास की तैयारी तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने तीन वर्क सर्किल बनाकर दो महाप्रबंधकों को जिम्मेदारी सौंपी है। जानिए किन गांवों में जमीन के रिकॉर्ड जुटाए जाएंगे, किसानों के मुआवजे और आबादी भूखंड को लेकर क्या जानकारी सामने आई है और नए शहर का विकास कैसे आगे बढ़ेगा।
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नोएडा के बाद अब दादरी और बुलंदशहर के बीच एक नए नियोजित शहर को बसाने की तैयारी तेज हो गई है। न्यू नोएडा के लिए नोएडा प्राधिकरण ने तीन वर्क सर्किल गठित कर दो महाप्रबंधकों को जिम्मेदारी सौंपी है। पहले दो चरणों में गौतमबुद्ध नगर के दादरी क्षेत्र के 9 और बुलंदशहर के 23 गांवों को शामिल किया गया है। गांवों में किसानों की जमीन का ब्योरा जुटाने, भूमि अधिग्रहण की तैयारी और सड़क निर्माण सहित विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
Noida News : उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और शहरी विकास की तस्वीर बदलने की क्षमता रखने वाला न्यू नोएडा शहर अब केवल मास्टर प्लान और कागजी घोषणाओं तक सीमित नहीं रह गया है। दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इन्वेस्टमेंट रीजन (DNGIR) के नाम से प्रस्तावित इस नए न्यू नोएडा शहर को धरातल पर उतारने की तैयारियां तेज हो गई हैं। नोएडा प्राधिकरण ने इसके लिए अधिकारियों की तैनाती भी कर दी है और विकास कार्यों के संचालन के लिए तीन वर्क सर्किल बनाए हैं। चेतना मंच न्यू नोएडा को लेकर पहले भी प्रमुखता से समाचार प्रकाशित करता रहा है। अब प्राधिकरण की ओर से अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपे जाने और गांवों में जमीन संबंधी तैयारियां शुरू किए जाने से इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अगले चरण की तस्वीर साफ होती दिखाई दे रही है।
न्यू नोएडा के विकास कार्यों को गति देने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने वर्क सर्किल-11, वर्क सर्किल-12 और वर्क सर्किल-14 गठित किए हैं। इनकी जिम्मेदारी सिविल विभाग के दो महाप्रबंधकों को सौंपी गई है।
प्राधिकरण के आदेश के अनुसार:
अधिकारियों की इस तैनाती का उद्देश्य जमीन संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और सड़क निर्माण समेत शुरुआती विकास कार्यों के लिए प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना है।
प्राधिकरण की ताजा तैयारियों के अनुसार, पहले दो चरणों के लिए गौतमबुद्ध नगर के दादरी क्षेत्र के 9 गांवों और बुलंदशहर के 23 गांवों को चिह्नित किया गया है। इस तरह शुरुआती कार्ययोजना में कुल 32 गांव शामिल हैं। गांवों में किसानों की जमीन का विवरण, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित भूखंडों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए गांव स्तर पर कैंप लगाने की तैयारी है। जमीन की पहचान और किसानों से बातचीत के बाद अधिग्रहण या सहमति से जमीन लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। यहां यह समझना जरूरी है कि गांवों को शुरुआती चरण के लिए चिह्नित करना और पूरी जमीन का अधिग्रहण पूरा हो जाना अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल ताजा घटनाक्रम अधिकारियों की तैनाती और जमीन संबंधी प्रारंभिक तैयारियों को लेकर है। Noida News
गौतमबुद्ध नगर जिले में दादरी क्षेत्र के जिन गांवों को पहले दो चरणों के लिए चिह्नित किया गया है, उनमें शामिल हैं :
न्यू नोएडा शहर की शुरुआती कार्ययोजना का बड़ा हिस्सा बुलंदशहर जिले में है। चिह्नित गांवों की सूची में दयानगर, सैधली, नेकरामपुर उर्फ विशनपुर, राजारामपुर, रायपुर खुर्द, मुरादाबाद (आंशिक), सेनवली, सिखैरा (आंशिक), सब्दलपुर (आंशिक), शाहपुर कलां, नैथला, हसनपुर, किशनपुर, गोपालपुर, जोखाबाद, कनवारा, हृदयपुर, लुहाकर (आंशिक), कैथरा (आंशिक), कौन्दू, चोला, धीमरी अदलपुर (आंशिक), बिरौंदी तेजपुर (आंशिक) और बिरौंदी फौलादपुर (आंशिक) के नाम शामिल हैं। इन गांवों में भूमि संबंधी सर्वेक्षण और राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि किन भूखंडों पर किस तरह का निर्माण किया जाएगा। Noida News
न्यू नोएडा शहर की परियोजना में किसानों को मिलने वाला मुआवजा इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण की 5 सितंबर की बोर्ड बैठक में पहले दो चरणों के लिए 5,725 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर और ग्रेटर नोएडा की तर्ज पर 6 प्रतिशत आबादी भूखंड देने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, तीसरे और चौथे चरण के लिए अलग मुआवजा व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इन चरणों में 4,558 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर तथा 7 प्रतिशत आबादी भूखंड से संबंधित व्यवस्था की जानकारी दी गई है। Noida News
न्यू नोएडा के लिए वर्क सर्किल-11, 12 और 14 बनाए गए हैं, जबकि वर्क सर्किल-13 नहीं बनाया गया। इस बारे में प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं बताया गया है। इस संबंध में यह चर्चा जरूर है कि पुराने नोएडा शहर में सेक्टर-13 विकसित नहीं किया गया था और संभव है कि इसी परंपरा का असर वर्क सर्किल की संख्या पर पड़ा हो। लेकिन इसे आधिकारिक वजह नहीं माना जा सकता। वर्क सर्किल का नंबर और भविष्य में न्यू नोएडा के सेक्टरों का नामकरण दो अलग विषय हैं। न्यू नोएडा में सेक्टरों की शुरुआत और उनका क्रम किस आधार पर तय होगा, इस पर आधिकारिक जानकारी का हमे इंतजार रहेगा। आपको बता दें कि अंग्रेजों के जमाने से भारत में 13 की संख्या को अपवित्र संख्या माना जाता है। इसी कारण नोएडा शहर को बसाते समय नोएडा शहर को बसाने वालों ने 13 की संख्या को नोएडा शहर के किसी भी सेक्टर के रूप में शामिल नहीं किया था। इसी व्यवस्था को न्यू नोएडा शहर को बसाते समय लागू करने का फैसला नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने कर लिया है।
न्यू नोएडा को दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इन्वेस्टमेंट रीजन के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका व्यापक नियोजित क्षेत्र लगभग 209 वर्ग किलोमीटर है और परियोजना में गौतमबुद्ध नगर तथा बुलंदशहर के करीब 80 गांवों को शामिल करने की मूल योजना रही है। यह परियोजना केवल आवासीय कॉलोनियां बसाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य औद्योगिक विकास, रोजगार, लॉजिस्टिक्स, कारोबार और आधुनिक शहरी सुविधाओं को एक नियोजित ढांचे में विकसित करना है। दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे तथा समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर से जुड़ाव भी इस क्षेत्र की आर्थिक संभावनाओं को महत्वपूर्ण बनाता है। मास्टर प्लान के अनुसार विकास को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाना है। सड़कें, औद्योगिक क्षेत्र, आवासीय क्षेत्र, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाएं इस शहर की भावी संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। Noida News
न्यू नोएडा का विकास आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल दादरी और बुलंदशहर के चिह्नित गांवों तक सीमित नहीं रहेगा। औद्योगिक निवेश बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। परिवहन और सड़क नेटवर्क विकसित होने से कारोबार तथा माल की आवाजाही को गति मिल सकती है। साथ ही, आसपास के क्षेत्रों में आवास, बाजार और दूसरी सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है। लेकिन इन संभावनाओं को वास्तविकता में बदलने के लिए समयबद्ध भूमि प्रक्रिया, किसानों के हितों की सुरक्षा, पारदर्शी मुआवजा, मजबूत बुनियादी ढांचा और पर्यावरण के अनुकूल नियोजन जरूरी होगा। Noida News
चेतना मंच न्यू नोएडा से जुड़े घटनाक्रम को लगातार प्रमुखता से सामने लाता रहा है। अब अधिकारियों की तैनाती, तीन वर्क सर्किल का गठन और शुरुआती गांवों में जमीन संबंधी तैयारियों का आगे बढ़ना इस परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम है। आने वाले समय में सबसे अधिक नजर इस बात पर रहेगी कि गांवों में कैंप कब शुरू होते हैं ? किसानों से जमीन लेने की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है ? सड़क निर्माण की शुरुआत कहां से होती है ? न्यू नोएडा शहर के पहले सेक्टर की रूपरेखा कब सामने आती है ?
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि न्यू नोएडा को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई है। अब इस महत्वाकांक्षी शहर का भविष्य जमीन पर होने वाले वास्तविक काम, किसानों के साथ संवाद और विकास की रफ्तार से तय होगा ।
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