उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल अब खुलकर दिखाई देने लगी है। बड़े दलों की सक्रियता के बीच अब सहयोगी पार्टियां भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गई हैं।

Noida News : उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल अब खुलकर दिखाई देने लगी है। बड़े दलों की सक्रियता के बीच अब सहयोगी पार्टियां भी अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गई हैं। इसी कड़ी में निषाद पार्टी ने नोएडा से अपने चुनावी अभियान का जोरदार आगाज करते हुए साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले चुनाव में वह सिर्फ सहयोगी की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि हिस्सेदारी भी बढ़ाना चाहती है। रविवार को नोएडा राजनीतिक गतिविधियों का अहम केंद्र बना रहा, जहां निषाद पार्टी ने बड़े मंच से अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने साफ शब्दों में कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी करीब 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की दावेदार है। इस बयान के बाद नोएडा से उठी यह राजनीतिक आवाज प्रदेश की सियासत में नई चर्चा का विषय बन गई है।
पार्टी ने इस बार नोएडा को सिर्फ कार्यक्रम स्थल नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने के मंच के रूप में चुना। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे नोएडा से चुनावी शंखनाद कर निषाद पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पूरे प्रदेश में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की रणनीति अपनाई है। महर्षि कश्यप जयंती के अवसर पर नोएडा स्टेडियम के इनडोर परिसर में आयोजित महासम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक और पदाधिकारी पहुंचे। पार्टी के लिए यह आयोजन महज एक सांस्कृतिक या सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का बड़ा अवसर साबित हुआ। नोएडा में जुटी भीड़ ने यह संदेश देने की कोशिश की कि पार्टी अब अगले चुनाव को लेकर पूरी तैयारी में है।
कार्यक्रम से पहले नोएडा के सेक्टर-37 में आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. संजय निषाद ने पार्टी की चुनावी रणनीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि निषाद पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन अब वह अपनी राजनीतिक भागीदारी को पहले से अधिक मजबूत रूप में देखना चाहती है। उनके मुताबिक, पार्टी कार्यकर्ता 40 सीटों पर लड़ने की मानसिक और संगठनात्मक तैयारी के साथ मैदान में हैं। नोएडा में दिया गया यह बयान सिर्फ सीटों की मांग भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा नेतृत्व के सामने राजनीतिक मोलभाव की शुरुआती दस्तक के रूप में भी देखा जा रहा है। डॉ. निषाद ने यह भी जताने की कोशिश की कि उनकी पार्टी उन क्षेत्रों में प्रभाव रखती है, जहां निषाद, मछुआरा, कश्यप और संबंधित समुदाय चुनावी नतीजों पर असर डाल सकते हैं।
डॉ. संजय निषाद ने अपने संबोधन में यह भरोसा जताया कि उनकी पार्टी गठबंधन को जीत दिलाने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहा कि जहां अवसर मिलता है, वहां पार्टी अपने संगठन और सामाजिक आधार के बूते मजबूत प्रदर्शन करती है। नोएडा से दिए गए इस संदेश का राजनीतिक अर्थ यही निकाला जा रहा है कि निषाद पार्टी अब गठबंधन में अधिक सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है। उनका फोकस साफ तौर पर उन सीटों पर है, जहां सामाजिक समीकरण पार्टी के पक्ष में बन सकते हैं। यही वजह है कि नोएडा के मंच से उन्होंने संगठन, समाज और चुनाव तीनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की।
नोएडा में हुए इस महासम्मेलन के दौरान डॉ. संजय निषाद ने अपने पारंपरिक सामाजिक एजेंडे को भी फिर मजबूती से उठाया। उन्होंने निषाद समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलने की बात कही और यह भी दोहराया कि उनके समुदाय से जुड़े मुद्दों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया। इस दौरान उन्होंने निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग भी फिर दोहराई। उनका कहना था कि अब राजनीति में उन वर्गों की आवाज भी आगे आ रही है, जो पहले हाशिये पर थे। नोएडा के कार्यक्रम में इस मुद्दे को प्रमुखता देकर पार्टी ने यह संकेत दिया कि वह आने वाले समय में सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व को अपने प्रमुख राजनीतिक एजेंडे के तौर पर आगे बढ़ाएगी। Noida News