नोएडा का बहुचर्चित निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। करीब दो दशक पुराने इस मामले के चर्चित अभियुक्त सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद कई पुराने सवाल फिर सामने आ गए हैं।

Noida News : करीब दो दशक पहले पूरे देश को झकझोर देने वाला निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। निठारी कांड के चर्चित अभियुक्त सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत और उसके बाद हुए अंतिम संस्कार ने इस पुराने मामले से जुड़े सवालों को फिर सामने ला दिया है। हरिद्वार पुलिस ने कोली की मौत के कारणों की जांच शुरू कर दी है और फिलहाल पोस्टमार्टम तथा फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार प्रथमदृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हुआ, लेकिन अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। शनिवार को चिकित्सकों के पैनल ने सुरेंद्र कोली का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया और हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके 20 वर्षीय बेटे शिवम ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। Noida News
साल 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी में बच्चों और युवतियों के लापता होने तथा मानव अवशेष मिलने की घटनाओं ने देश को हिला दिया था। कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले और आसपास से मानव अवशेष मिलने के बाद पुलिस जांच तेज हुई थी। सुरेंद्र कोली उस समय पंढेर के यहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था और बाद में उसे निठारी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। निठारी कांड के बाद सुरेंद्र कोली पर हत्या समेत कई गंभीर आरोप लगे और विभिन्न मामलों में उसे दोषी ठहराया गया। लंबे समय तक वह जेल में रहा और उसके खिलाफ कई मामलों में मृत्युदंड तक सुनाया गया। लेकिन आगे की न्यायिक प्रक्रिया में इन दोषसिद्धियों पर सवाल उठे और अंततः अदालतों ने उसे राहत दी। Noida News
निठारी कांड की कानूनी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव नवंबर 2025 में आया। सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम लंबित मामले में सुरेंद्र कोली की क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया और यदि किसी अन्य मामले में उसकी जरूरत न हो तो तत्काल रिहाई का आदेश दिया। इसके साथ निठारी कांड से जुड़े उसके खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों का अंत हो गया। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में यह भी सामने आया कि निठारी जैसे जघन्य अपराधों में भी केवल संदेह या अनुमान के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती। अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोष साबित करने के लिए विश्वसनीय और स्वीकार्य साक्ष्य जरूरी हैं। यही वजह है कि आज सुरेंद्र कोली को खबरों में “निठारी कांड का आरोपी/अभियुक्त” कहा जाना तो उसके अतीत का तथ्य है, लेकिन उसे निठारी हत्याओं का दोषी बताना न्यायिक स्थिति के अनुरूप नहीं होगा। Noida News
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद हरिद्वार पुलिस की जांच का एक नया पहलू सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक वह पिछले चार-पांच महीनों से हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। वहां उसने कथित तौर पर 'सदाराम' नाम का इस्तेमाल किया और अलग-अलग जगहों पर काम किया। पुलिस के अनुसार उसने कुछ समय सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम किया था। बाद में पहचान संबंधी दस्तावेज मांगे जाने पर नौकरी बदलने की बात भी सामने आई है। मौत से कुछ दिन पहले उसने चाय की दुकान किराये पर ली थी। उसकी मृत्यु के बाद मिले आधार कार्ड और वोटर आईडी से उसकी वास्तविक पहचान सामने आई।
हरिद्वार पुलिस अब उन लोगों से भी पूछताछ कर रही है जिन्होंने उसे काम दिलाने या चाय की दुकान किराये पर लेने में मदद की थी। पुलिस इस दौरान उसकी गतिविधियों और संपर्कों की भी जांच कर रही है। Noida News
शुक्रवार को सप्तसरोवर मार्ग क्षेत्र में वैष्णो देवी मंदिर के पास एक चाय के खोखे के अंदर सुरेंद्र कोली का शव फंदे पर मिला था। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची थी। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर आत्महत्या की आशंका जताई थी, लेकिन पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट के बाद ही मौत के कारणों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है। यही कारण है कि अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सबसे ज्यादा नजर है। Noida News
सुरेंद्र कोली की मौत के बाद निठारी कांड के पीड़ित परिवारों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं। एक पीड़ित के पिता ने उसकी मौत को लेकर हत्या की आशंका जताई है। यह उनका आरोप है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और हरिद्वार पुलिस की जांच जारी है। इस पूरे मामले में इसलिए जल्दबाजी में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पोस्टमार्टम, फोरेंसिक और पुलिस जांच के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। Noida News
निठारी कांड नोएडा के इतिहास की उन घटनाओं में शामिल है जिसने पूरे शहर की छवि और देश की अपराध संबंधी बहस को प्रभावित किया। बच्चों और युवतियों के गायब होने, मानव अवशेष मिलने, जांच, गिरफ्तारियों, अदालतों में चली लंबी कानूनी लड़ाई और बाद में हुई दोषसिद्धियों के पलटने तक इस मामले की कहानी करीब दो दशक तक चलती रही। सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत ने इस पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। एक तरफ अदालतों से उसे सभी मामलों में बरी किया जा चुका था, वहीं दूसरी तरफ निठारी कांड से जुड़ी सामाजिक स्मृति आज भी बेहद गहरी है। Noida News
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