इस ई-स्क्रूटनी के बाद नोएडा–ग्रेटर नोएडा की रियल एस्टेट गतिविधियों पर निगरानी और सख्त हो गई है। संदिग्ध प्रविष्टियों वाले मामलों में केवल कागजी जांच ही नहीं, बल्कि खरीदार–विक्रेता की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए समानांतर सत्यापन (पैरलल वेरिफिकेशन) भी तेज कर दिया गया है।

Noida News : उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाला गौतमबुद्ध नगर अब संपत्ति रजिस्ट्रेशन की बड़ी जांच के केंद्र में आ गया है। गौतमबुद्ध नगर जिले की 1,000 से ज्यादा रजिस्ट्रियां आयकर विभाग की निगरानी में हैं, क्योंकि बैनामा दस्तावेजों में पहचान और तकनीकी स्तर पर गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच का सबसे बड़ा फोकस नोएडा–ग्रेटर नोएडा पर है, जहां रियल एस्टेट लेन-देन का दबाव और वॉल्यूम सबसे ज्यादा रहता है। सूत्रों के अनुसार, रजिस्ट्री कार्यालय द्वारा जमा SFT (वित्तीय लेन-देन विवरण) की एंट्रीज मिलान के दौरान कई मामलों में पैन–आधार नंबर गलत पाए गए या दोनों का आपस में मेल नहीं बैठा। ऐसे दस्तावेजों पर रजिस्ट्री कार्यालय से जवाब मांगा गया है और साथ ही खरीदार–विक्रेता की पहचान की पैरलल वेरिफिकेशन प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।
जांच की कमान कानपुर स्थित इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन (ICI) यूनिट ने संभाल ली है। रजिस्ट्री दस्तावेज पूरी तरह ऑनलाइन होने के चलते लखनऊ और कानपुर में बैठे अधिकारी डिजिटल ट्रेल के आधार पर फाइल-दर-फाइल छानबीन कर रहे हैं। इस ई-स्क्रूटनी के बाद नोएडा–ग्रेटर नोएडा की रियल एस्टेट गतिविधियों पर निगरानी और सख्त हो गई है। संदिग्ध प्रविष्टियों वाले मामलों में केवल कागजी जांच ही नहीं, बल्कि खरीदार–विक्रेता की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए समानांतर सत्यापन (पैरलल वेरिफिकेशन) भी तेज कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, नवंबर में मेघराज क्लाउड को नेशनल गवर्नमेंट क्लाउड से जोड़ने की प्रक्रिया के चलते जांच की रफ्तार कुछ समय के लिए थमी रही। सर्वर माइग्रेशन पूरा होते ही दिसंबर से ई-जांच दोबारा तेज कर दी गई है। अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रजिस्ट्री रिकॉर्ड के जरिए पुराने और नए, दोनों तरह के संदिग्ध मामलों की एक साथ गहन पड़ताल की जा रही है।
बता दें कि गौतमबुद्ध नगर और खासकर नोएडा में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन की रफ्तार हर दिन तेज रहती है। आंकड़ों के मुताबिक जिले में रोजाना 100 से अधिक रजिस्ट्रियां दर्ज होती हैं। नई तकनीक ने आयकर विभाग की ई-पड़ताल को ज्यादा तेज और अधिक सटीक बना दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कवायद का मकसद रजिस्ट्री सिस्टम में पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-आधारित निगरानी बढ़ाना है, ताकि गलत पहचान, गलत प्रविष्टि या संदिग्ध लेन-देन पर समय रहते कार्रवाई हो सके। Noida News