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Noida News: किसानों ने सोमवार को यमुना अथॉरिटी के सीआईओ आरके सिंह से मुलाक़ात की। इससे पहले शनिवार को एयरपोर्ट साइट पर हुए विरोध प्रदर्शन

Noida News :नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन देने वाले कई किसान अब निराश हैं। प्रशासन ने उसने सुरक्षित भविष्य का जो वादा किया था उसे पूरा नहीं किया। अब ये किसान अपनी मांगों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैंं।
किसानों ने सोमवार को यमुना अथॉरिटी के सीआईओ आरके सिंह से मुलाक़ात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके बच्चों को एयरपोर्ट कंसेशनर—यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड—में सीधे तौर पर स्थायी रोजगार दिया जाए, न कि किसी थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर के जरिए।
शनिवार को हुआ था विरोध प्रदर्शन
'द टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक यह बैठक शनिवार को एयरपोर्ट साइट पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद हुई। अथॉरिटी के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों से संपर्क किया और उन्हें ग्रेटर नोएडा स्थित कार्यालय में बातचीत के लिए आमंत्रित किया।
नांगला शरीफ गांव के चांद मोहम्मद ने कहा, “हमने इसलिए विरोध प्रदर्शन किया, क्योंकि हमसे किए गए वादे पूरे नहीं किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने हमारी शिकायतें सुनीं और हमें आश्वासन दिया कि उनका समाधान किया जाएगा।”
रिपोर्ट के मुताबिक सिंह ने कहा, "मैंने उनसे बात की और वे संतुष्ट हैं। यह मामला वाईआईएपीएल के साथ चर्चा के अधीन है।"
क्या कहता है कानून?
भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़े और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013' के तहत, सरकारों को भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को कौशल प्रशिक्षण और रोज़गार के अवसर या पूरा मुआवजा देना जरूरी है।
पहले दो चरणों में विस्थापित हुए लोगों में से, 334 परिवारों ने आर्थिक मुआवज़े के बजाय रोज़गार को चुना।
एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के पहले चरण के लिए जेवर क्षेत्र के कई गांवों में कुल 1,334 हेक्टेयर ज़मीन का अधिग्रहण किया गया था। दूसरे चरण में 1,365 हेक्टेयर का। तीसरे और चौथे चरण में 2,053 हेक्टेयर और ज़मीन का अधिग्रहण किया जाना है।
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