नोएडा में बकाया वसूली और फ्लैट खरीदारों की अटकी रजिस्ट्रियों के मुद्दे पर अब प्राधिकरण पूरी सख्ती के साथ मैदान में उतर आया है। लंबे समय से देनदारी टाल रहे बिल्डरों पर शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

Noida News : नोएडा में बकाया वसूली और फ्लैट खरीदारों की अटकी रजिस्ट्रियों के मुद्दे पर अब प्राधिकरण पूरी सख्ती के साथ मैदान में उतर आया है। लंबे समय से देनदारी टाल रहे बिल्डरों पर शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खासतौर पर 8 ऐसी बिल्डर परियोजनाएं प्राधिकरण के निशाने पर हैं, जिनके प्रमोटरों ने न तो शासन की व्यवस्था के तहत जरूरी रकम जमा की और न ही मामले को सुलझाने के लिए कोई गंभीर पहल दिखाई। ऐसे में अब उनकी अनसोल्ड इनवेंट्री, बची हुई संपत्तियों और अन्य परिसंपत्तियों को चिह्नित कर सीज करने की तैयारी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर इन संपत्तियों की नीलामी कर बकाया वसूला जाएगा, ताकि खरीदारों को राहत और व्यवस्था को गति मिल सके।
नोएडा में कुल 57 बिल्डर परियोजनाओं पर करीब 28 हजार करोड़ रुपये का बकाया सामने आया था। इस संकट का असर सिर्फ प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति पर ही नहीं, बल्कि हजारों घर खरीदारों की रजिस्ट्री पर भी पड़ा। इसी समस्या के समाधान के लिए शासन ने अमिताभ कांत रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू किया था, ताकि बिल्डरों से चरणबद्ध तरीके से पैसा लिया जा सके और खरीदारों को राहत मिल सके। प्राधिकरण के पास उपलब्ध स्थिति के अनुसार, 22 बिल्डरों ने शासन की सिफारिशों के तहत कुल बकाया का 25 प्रतिशत हिस्सा जमा कर दिया है। वहीं 14 बिल्डर ऐसे हैं जिन्होंने योजना पर सहमति तो जता दी, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं किया। इसके अलावा कुछ बिल्डरों ने आंशिक रकम जमा कराई है, लेकिन 8 बिल्डर ऐसे हैं जिन्होंने न तो स्पष्ट सहमति दी और न ही भुगतान के लिए गंभीरता दिखाई। अब नोएडा प्राधिकरण ऐसे ही बिल्डरों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है।
नोएडा प्राधिकरण ने इन 8 बिल्डरों को नोटिस जारी कर दिया है। इसके बाद अब उनकी अनसोल्ड प्रॉपर्टी, उपलब्ध स्टॉक, परियोजनाओं से जुड़ी परिसंपत्तियां और अन्य संपत्तियों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। प्राधिकरण की योजना साफ है पहले इन संपत्तियों को सीज किया जाएगा और फिर नीलामी के जरिये बकाया रकम वसूल की जाएगी। नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में इसे बड़ा और सख्त कदम माना जा रहा है। प्राधिकरण की अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी वंदना त्रिपाठी के मुताबिक, इन 8 बिल्डरों पर इस समय करीब दो हजार करोड़ रुपये का बकाया है। पहले चरण में इन्हें कुल देनदारी का सिर्फ 25 प्रतिशत, यानी 251.40 करोड़ रुपये, जमा करना था। यदि यह रकम समय पर जमा हो जाती, तो 533 खरीदारों की रजिस्ट्री का रास्ता खुल सकता था। वहीं यदि ये बिल्डर पूरा 1171.94 करोड़ रुपये जमा कर देते, तो करीब 2123 बायर्स को राहत मिल सकती थी। इससे साफ है कि बिल्डरों की ढिलाई का सीधा नुकसान नोएडा के फ्लैट खरीदारों को उठाना पड़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इन 8 बिल्डरों की परियोजनाओं में कुल 10,328 यूनिट स्वीकृत हैं। इनमें से 9,348 यूनिट का निर्माण पूरा हो चुका है। 4,850 यूनिट के लिए ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट भी जारी हो चुका है, लेकिन अब तक सिर्फ 3,839 यूनिट की ही रजिस्ट्री हो पाई है। बाकी मामलों में या तो प्रक्रिया अधूरी है या बिल्डरों की ओर से जरूरी शर्तें पूरी नहीं की गई हैं। नोएडा में यह स्थिति उन खरीदारों के लिए चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है, जो वर्षों से अपने फ्लैट की वैधानिक रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं। इन परियोजनाओं की साइट पर नोएडा प्राधिकरण पहले ही चेतावनी बोर्ड लगा चुका है। इसका मकसद न सिर्फ मौजूदा खरीदारों को स्थिति से अवगत कराना है, बल्कि संभावित निवेशकों को भी सतर्क करना है। अब बोर्ड लगाने के बाद अगला चरण वास्तविक कार्रवाई का है, जिसमें संपत्तियों की पहचान, जब्ती और नीलामी जैसी प्रक्रिया शामिल होगी।
जिन बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, उनमें एमपीजी रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 38.92 करोड़ रुपये, एजीसी रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड पर 20.80 करोड़ रुपये, मनीषा कीबी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड पर 0.38 करोड़ रुपये, आईवीआर प्राइम पर 659.92 करोड़ रुपये, आरजी रेजीडेंसी पर 170 करोड़ रुपये, गार्डेनिया इंडिया लिमिटेड पर 111.84 करोड़ रुपये और फ्यूटेक शेल्टर प्राइवेट लिमिटेड पर 114.71 करोड़ रुपये का बकाया बताया गया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि नोएडा के हजारों परिवारों और बड़े शहरी आवास ढांचे से जुड़ा हुआ है। Noida News