नोएडा प्राधिकरण ने लंबे समय से अटकी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को बड़ी राहत देते हुए सेक्टर-78, 79, 150 और 152 में लगी रोक हटा दी है। इस फैसले के बाद इन क्षेत्रों में फंसे करीब 40 हजार फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

Noida News : नोएडा प्राधिकरण ने लंबे समय से अटकी स्पोर्ट्स सिटी परियोजना को बड़ी राहत देते हुए सेक्टर-78, 79, 150 और 152 में लगी रोक हटा दी है। इस फैसले के बाद इन क्षेत्रों में फंसे करीब 40 हजार फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। नोएडा प्राधिकरण अब तय शर्तों के साथ बिल्डरों को कंडीशनल ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी करेगा, जिससे वर्षों से इंतजार कर रहे खरीदारों के लिए अपने घर का सपना पूरा होने की राह खुल सकती है। बता दें कि नोएडा में यह रोक पिछले करीब पांच वर्षों से लागू थी। प्राधिकरण ने वर्ष 2021 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़े नक्शों और अनुमोदनों पर प्रतिबंध लगाया था। अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और बोर्ड स्तर पर मंजूरी के बाद इस रोक को हटाने का फैसला लिया गया है। हालांकि राहत के साथ सख्त शर्तें भी जोड़ी गई हैं, ताकि परियोजना का मूल उद्देश्य प्रभावित न हो।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, संबंधित बिल्डरों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट तभी दिया जाएगा, जब वे तय समयसीमा के भीतर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण पूरा करने का लिखित आश्वासन और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करेंगे। इसके साथ ही निर्माण कार्य पूरा होने तक 20 प्रतिशत इन्वेंट्री प्राधिकरण के पास गिरवी रखी जाएगी। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि बिल्डर परियोजना से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे न हट सकें। प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल के मुताबिक, बिल्डरों को तीन साल के भीतर खेल गतिविधियों से जुड़ा निर्माण पूरा करना होगा। इसके अलावा मानचित्र स्वीकृति और अन्य अनुमतियां भी उन्हीं मामलों में आगे बढ़ेंगी, जहां कुल बकाया का 20 प्रतिशत जमा कराया जाएगा।
नोएडा की इस बहुप्रतीक्षित कार्रवाई का सीधा फायदा उन हजारों परिवारों को होगा, जो लंबे समय से अपने फ्लैट पर मालिकाना हक मिलने का इंतजार कर रहे हैं। स्पोर्ट्स सिटी परियोजना में कई टावर तैयार होने के बावजूद वैधानिक अड़चनों के कारण खरीदारों को न तो कब्जा मिल पा रहा था और न ही जरूरी दस्तावेज। अब प्राधिकरण के फैसले के बाद इन खरीदारों को राहत की उम्मीद बंधी है। कई खरीदार ऐसे हैं, जिन्होंने वर्षों पहले नोएडा में घर लेने के लिए अपनी जमा-पूंजी लगा दी थी, लेकिन परियोजना पर रोक के कारण वे असमंजस में थे। ऐसे में यह फैसला उनके लिए बड़ी प्रशासनिक राहत माना जा रहा है।
नोएडा में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्पोर्ट्स सिटी परियोजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत बड़े भूखंड आवंटित कर ऐसे मिश्रित विकास मॉडल की परिकल्पना की गई थी, जिसमें खेल ढांचे के साथ आवासीय और सीमित व्यावसायिक विकास भी हो। शुरुआती योजना 2008 में लाई गई थी, जिसे बाद के वर्षों में विस्तारित किया गया। इसके तहत 2010-11 से 2015-16 के बीच सेक्टर-78, 79, 101, 150 और 152 में बड़ी मात्रा में जमीन आवंटित की गई। इस दौरान कई कंसोर्टियम और डेवलपर्स को भूखंड दिए गए, जिन्होंने आगे सब-लीज के जरिए अलग-अलग बिल्डरों को परियोजना विकसित करने का अधिकार दिया।
नोएडा प्राधिकरण के सामने सबसे बड़ी समस्या यह रही कि परियोजना से जुड़े बिल्डरों और कंसोर्टियम ने प्राधिकरण का भारी बकाया समय पर जमा नहीं किया। बताया जाता है कि करीब 12 हजार करोड़ रुपये की देनदारी लंबित रही। इसी के चलते प्राधिकरण ने 2021 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजना के नक्शों की स्वीकृति और आगे की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा प्राधिकरण का यह भी आरोप रहा कि जिन बिल्डरों को स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना था, उन्होंने उस दिशा में अपेक्षित काम नहीं किया। योजना के अनुसार कुल जमीन का 70 प्रतिशत हिस्सा खेल सुविधाओं और उनसे जुड़े ढांचे के लिए इस्तेमाल होना था, जबकि शेष हिस्से में आवासीय और सीमित व्यावसायिक विकास की अनुमति थी। लेकिन जमीन के उपयोग और विकास की वास्तविक स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
नोएडा की स्पोर्ट्स सिटी योजना कई महत्वपूर्ण सेक्टरों में फैली हुई है। सेक्टर-78, 79, 101, 150 और 152 में अलग-अलग डेवलपर्स को बड़े भूखंड आवंटित किए गए थे। इन परियोजनाओं में आवासीय टावर तो विकसित हुए, लेकिन खेल सुविधाओं का निर्माण अपेक्षानुसार आगे नहीं बढ़ सका। यही वजह रही कि पूरी योजना कानूनी और प्रशासनिक विवादों में उलझ गई। अब प्राधिकरण ने स्पष्ट कर दिया है कि राहत का मतलब पूरी छूट नहीं है। जो भी आगे की मंजूरी मिलेगी, वह नियमों के कड़ाई से पालन और तय शर्तों के अधीन होगी।
प्राधिकरण ने बिल्डरों के लिए कई शर्तें तय की हैं। इनमें स्पोर्ट्स सिटी के निर्धारित क्षेत्र का मूल स्वरूप बनाए रखना, संबंधित विभागों से समय विस्तार प्रमाणपत्र लेना, पर्यावरण और भवन नियमों का पालन करना, एनबीसी के मानकों को लागू करना और स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही निर्माण करना शामिल है। इसके साथ ही परियोजना के भीतर पार्किंग, हरित क्षेत्र, जल आपूर्ति, सीवरेज, अग्निशमन, लिफ्ट, वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण, रिसाइक्लिंग और विद्युत जैसी सभी सेवाओं को कार्यशील स्थिति में रखना होगा। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार का बदलाव या संशोधन अनधिकृत माना जाएगा और उसे हटाया जा सकता है। नोएडा प्राधिकरण ने कहा है कि बिल्डर अपने खरीदारों को फ्लैट पर कब्जा तभी देंगे, जब प्राधिकरण की ओर से अधिभोग प्रमाण पत्र जारी हो जाएगा। परियोजना में टावरों की सुरक्षा, विजिटर पार्किंग, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होंगी। इसके अलावा दो महीने के भीतर परियोजना से जुड़ी मूलभूत सेवाओं जैसे सीवरेज, वाटर सप्लाई, ड्रेनेज, बिजली, सड़क और हरित क्षेत्र के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्राधिकरण ने दस्तावेजी प्रक्रिया को भी समयबद्ध रूप से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। Noida News