नोएडा से जुड़ी अहम अपडेट सामने आ रही है। नोएडा से जुड़ी यह बड़ी अपडेट नोएडावासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नोएडा में रेहड़ी-पटरी कारोबार को व्यवस्थित करने और सड़कों-फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में एक बड़ी तैयारी शुरू हो गई है।

Noida News : नोएडा से जुड़ी अहम अपडेट सामने आ रही है। नोएडा से जुड़ी यह बड़ी अपडेट नोएडावासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। नोएडा में रेहड़ी-पटरी कारोबार को व्यवस्थित करने और सड़कों-फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की दिशा में एक बड़ी तैयारी शुरू हो गई है। नोएडा प्राधिकरण शहर के करीब 140 किलोमीटर लंबे नालों को कवर कर वहां वेंडिंग जोन विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इस पहल का मकसद नोएडा में बेतरतीब ढंग से फैल रहे अतिक्रमण, ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित ठेला-व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण करना है। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के निर्देश पर इस परियोजना को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है। विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के लिए महाप्रबंधक सिविल की ओर से नोएडा के सभी 10 वर्क सर्किलों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि योजना को जल्द जमीन पर उतारा जा सके।
नोएडा के कई इलाकों में सड़क किनारे और फुटपाथों पर अवैध रूप से रेहड़ी-पटरी लगने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इससे एक तरफ नोएडा की सूरत प्रभावित हो रही है, तो दूसरी तरफ ट्रैफिक व्यवस्था भी चरमरा रही है। सबसे बड़ी परेशानी पैदल चलने वालों को होती है, जिन्हें फुटपाथ कब्जे में होने की वजह से तेज रफ्तार वाहनों के बीच सड़क पर चलना पड़ता है। नोएडा प्राधिकरण का मानना है कि अगर वेंडरों के लिए तय और सुरक्षित स्थान विकसित कर दिए जाएं, तो शहर में अव्यवस्था काफी हद तक कम की जा सकती है। इसी सोच के तहत अब नालों के ऊपर संरचित वेंडिंग जोन बनाने की योजना को प्राथमिकता दी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, नोएडा प्राधिकरण ने शहर के छोटे-बड़े नालों को चिह्नित कर उनके उपयोग की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। योजना यह है कि नालों को इस तरह कवर किया जाए कि उनकी नियमित सफाई, रखरखाव और गैस निकासी की व्यवस्था प्रभावित न हो। प्राधिकरण इस मॉडल को तकनीकी मानकों के साथ तैयार करना चाहता है, ताकि पर्यावरण संबंधी नियमों का भी पालन हो सके। हालांकि, जल और सीवर विभाग ने इस कार्ययोजना से कोंडली और शहदरा ड्रेन समेत 9 प्रमुख नालों को फिलहाल अलग रखने की सलाह दी है। इन नालों के लिए छोटे-छोटे 24 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) विकसित किए जाने की योजना पर पहले से काम चल रहा है। ऐसे में इन हिस्सों को वेंडिंग जोन परियोजना से बाहर रखा जा सकता है।
नोएडा में इस तरह का प्रयोग पूरी तरह नया नहीं है। सेक्टर-29 में ब्रह्मपुत्र मार्केट के पीछे नाले को कवर कर एक वेंडिंग जोन विकसित किया गया है, जहां करीब 25 वेंडर कारोबार कर रहे हैं। प्राधिकरण इस पायलट मॉडल को सफल मान रहा है और अब इसी तर्ज पर शहर के अन्य हिस्सों में भी व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है। इस मॉडल में नाले को पूरी तरह बंद नहीं किया गया, बल्कि बीच-बीच में लोहे की जाली लगाई गई है, ताकि गैस बाहर निकलती रहे और सफाई व्यवस्था भी बाधित न हो। यही तकनीक अब नोएडा के दूसरे संभावित वेंडिंग जोन में भी अपनाई जा सकती है।
नोएडा प्राधिकरण की प्राथमिकता ऐसे वेंडिंग जोन विकसित करने की है, जहां वेंडरों को अस्थायी रूप से बैठाया जाए। यानी कारोबार खत्म होने के बाद वे अपनी दुकान समेटकर जा सकें और रात में वहां सफाई कराई जा सके। इससे जगह स्थायी अतिक्रमण में तब्दील नहीं होगी और नोएडा में स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना भी आसान होगा। अगर प्राधिकरण क्योस्क बनाकर आवंटन करता है, तो उन्हें व्यवस्थित डिजाइन के साथ विकसित किया जाएगा। इस मॉडल में बड़े ऑपरेटर या एजेंसियों की मदद से संचालन व्यवस्था भी लागू की जा सकती है, ताकि पूरा सिस्टम नियंत्रण में रहे।
इस योजना का एक बड़ा फायदा यह भी माना जा रहा है कि नोएडा के खुले नालों को कवर करने से बदबू, गंदगी और दृश्य प्रदूषण में कमी आएगी। कई जगहों पर खुले नालों से आसपास का माहौल खराब होता है। ऐसे में यदि नालों को वैज्ञानिक तरीके से ढंक दिया जाता है, तो नोएडा के शहरी ढांचे को भी नया रूप मिल सकता है। साथ ही, नालों से निकलने वाली गैस और नमी से आसपास के ढांचे और उपकरणों को होने वाले नुकसान में भी कमी आने की उम्मीद है। यानी यह योजना सिर्फ वेंडिंग जोन तक सीमित नहीं, बल्कि नोएडा के शहरी प्रबंधन से भी जुड़ी हुई है।
नोएडा प्राधिकरण इस परियोजना को राजस्व मॉडल के तौर पर भी देख रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत 2x2 वर्ग मीटर के हिसाब से क्योस्क या वेंडिंग स्पेस आवंटित किए जा सकते हैं। इसके बदले प्राधिकरण को सर्किल रेट के आधार पर लगभग 1800 से 2400 रुपये प्रति माह प्रति यूनिट किराया मिल सकता है। इससे एक ओर नोएडा प्राधिकरण की आय बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर छोटे कारोबारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और कमजोर आय वर्ग के लोगों को वैध और संगठित रूप से रोजगार का अवसर मिलेगा। यदि योजना सफल रही, तो नोएडा में वेंडिंग कारोबार का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है। Noida News