नोएडा अब कचरा प्रबंधन को नई सोच के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है। नोएडा शहर में अब सूखे पत्ते परेशानी नहीं, बल्कि उपयोगी ऊर्जा का साधन बनेंगे। नोएडा शहर में बागवानी कचरे के निस्तारण को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने एक नई और दूरदर्शी योजना तैयार की है।

Noida News : नोएडा अब कचरा प्रबंधन को नई सोच के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है। नोएडा शहर में अब सूखे पत्ते परेशानी नहीं, बल्कि उपयोगी ऊर्जा का साधन बनेंगे। नोएडा शहर में बागवानी कचरे के निस्तारण को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने एक नई और दूरदर्शी योजना तैयार की है। नोएडा प्राधिकरण ने उद्यानिकी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए एक खास योजना तैयार की है, जिसके तहत सूखे पत्तों से ग्रीन कोल बनाया जाएगा। इस ग्रीन कोल का इस्तेमाल ईंधन के रूप में होगा और इसके जरिए बिजली उत्पादन में भी मदद मिलेगी। यह पहल नोएडा के लिए इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे एक साथ कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है। एक तरफ सूखे पत्तों और बागवानी कचरे का बेहतर निस्तारण होगा, दूसरी ओर प्रदूषण कम करने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
अब तक नोएडा में सूखे पत्तों के निस्तारण के लिए पारंपरिक तरीका अपनाया जाता था। आमतौर पर पत्तों को खाली जगहों पर गड्ढे खोदकर दबा दिया जाता था और ऊपर से मिट्टी डाल दी जाती थी। यह तरीका लंबे समय तक अपनाया गया, लेकिन अब नोएडा प्राधिकरण इसे बदलकर वैज्ञानिक और आधुनिक व्यवस्था लागू करने जा रहा है। नई योजना के तहत नोएडा में निकलने वाले उद्यानिकी कचरे को व्यवस्थित ढंग से प्रोसेस किया जाएगा। इसके लिए प्राधिकरण की ओर से प्रस्ताव आमंत्रित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि इस काम के लिए उपयुक्त कंपनी का चयन किया जा सके।
तेजी से विकसित हो रहे नोएडा में हर दिन बड़ी मात्रा में बागवानी कचरा निकलता है। पार्कों, हरित पट्टियों, सेक्टरों और सार्वजनिक स्थलों की सफाई के दौरान सूखे पत्ते, छोटी टहनियां और अन्य हरित अवशेष बड़ी संख्या में जमा होते हैं। अनुमान है कि नोएडा से रोजाना करीब 300 मीट्रिक टन उद्यानिकी कचरा निकलता है। इस कचरे में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी सूखे पत्तों और टहनियों की होती है। टहनियों का सीमित उपयोग पहले से ईंधन या जलावन के रूप में किया जाता रहा है, लेकिन अब नोएडा में सूखे पत्तों के लिए भी उपयोगी और तकनीकी समाधान तैयार किया जा रहा है। योजना के अनुसार सूखे पत्तों को मशीनों के जरिये प्रोसेस कर ग्रीन कोल ब्लॉक में बदला जाएगा। ये ब्लॉक सामान्य ईंधन की तरह उपयोग किए जा सकेंगे। अधिकारियों का मानना है कि नोएडा में तैयार होने वाला यह ग्रीन कोल बिजली उत्पादन और औद्योगिक इस्तेमाल दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। इन ब्लॉकों का इस्तेमाल एनटीपीसी जैसी बड़ी इकाइयों के साथ-साथ अन्य कंपनियां भी कर सकती हैं। यानी नोएडा का उद्यानिकी कचरा अब बोझ नहीं, बल्कि ऊर्जा के एक उपयोगी स्रोत के रूप में देखा जाएगा।
इस पूरी योजना को लागू करने के लिए नोएडा प्राधिकरण एक निजी कंपनी का चयन करेगा। प्राधिकरण की भूमिका मुख्य रूप से कच्चा माल उपलब्ध कराने तक सीमित रहेगी। यानी नोएडा से निकलने वाला सूखा पत्ता और अन्य उद्यानिकी कचरा चयनित कंपनी को दिया जाएगा। इसके बाद मशीनों का संचालन, ग्रीन कोल तैयार करना और उसकी सप्लाई की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी के चयन की प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे साफ है कि नोएडा इस योजना को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि जल्द से जल्द जमीन पर उतारने की तैयारी में है।
यह पहली बार नहीं है जब नोएडा प्राधिकरण कचरे को संसाधन में बदलने की दिशा में काम कर रहा है। इससे पहले भी शहर के कूड़े को प्रोसेस कर आरडीएफ में बदला गया था, जिसका इस्तेमाल कई कंपनियों ने किया। अब उसी सोच को आगे बढ़ाते हुए नोएडा सूखे पत्तों और हरित कचरे को ग्रीन कोल में बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यह मॉडल बताता है कि नोएडा अब पारंपरिक सफाई व्यवस्था से आगे जाकर संसाधन आधारित शहरी प्रबंधन पर ध्यान दे रहा है। यही वजह है कि इस योजना को शहर के लिए दीर्घकालिक महत्व का कदम माना जा रहा है।
उधर, नोएडा और ग्रेटर नोएडा से निकलने वाले म्यूनिसिपल सॉलिड वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए भी बड़े स्तर पर तैयारी चल रही है। ग्रेटर नोएडा के अस्तौली क्षेत्र में एक प्लांट विकसित किया जा रहा है, जहां दोनों शहरों के कचरे की प्रोसेसिंग की जाएगी। इस व्यवस्था के तहत अलग-अलग कंपनियां विभिन्न प्रकार के प्लांट लगाएंगी। एक प्लांट जैविक कचरे से बायो-सीएनजी तैयार करेगा, जबकि दूसरा प्लांट मिश्रित कचरे से टोरिफाइड चारकोल जैसे ईंधन तैयार करने पर काम करेगा। इस पूरी परियोजना में नोएडा का भी बड़ा हिस्सा होगा, क्योंकि शहर से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
सूखे पत्तों से ग्रीन कोल बनाने की यह योजना नोएडा के लिए कई मायनों में फायदेमंद हो सकती है। सबसे पहला लाभ यह होगा कि खुले में पत्तों के ढेर, उन्हें जलाने या दबाने जैसी पुरानी समस्याओं से राहत मिलेगी। दूसरा बड़ा फायदा यह है कि यह कचरा अब बिजली उत्पादन में योगदान देगा। इससे नोएडा में पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। यदि सूखे पत्तों का सही ढंग से उपयोग शुरू हो जाता है, तो शहर में प्रदूषण घटाने की दिशा में भी इसका सकारात्मक असर दिखाई दे सकता है। खासकर उन महीनों में, जब सूखे पत्तों का ढेर तेजी से बढ़ता है, यह योजना काफी उपयोगी साबित हो सकती है। Noida News