नोएडा को देश के आधुनिक शहरों में गिना जाता है, लेकिन शहर के हजारों आवंटियों की संपत्तियां यदि छोटी-छोटी आपत्तियों और वर्षों से लंबित फाइलों के कारण खरीद-बिक्री, नामांतरण और बैंक ऋण जैसी प्रक्रियाओं में फंस जाएं तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

Noida News : नोएडा को देश के आधुनिक शहरों में गिना जाता है, लेकिन शहर के हजारों आवंटियों की संपत्तियां यदि छोटी-छोटी आपत्तियों और वर्षों से लंबित फाइलों के कारण खरीद-बिक्री, नामांतरण और बैंक ऋण जैसी प्रक्रियाओं में फंस जाएं तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। धारा-10 के नोटिसों का मामला इसी तस्वीर का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। नोएडा विधायक पंकज सिंह लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर 2025 में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी धारा-10 के नोटिसों का मामला रखा था। अक्टूबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी विधायक के हवाले से कहा गया कि मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा जा चुका है और समाधान की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। Noida News
आपके द्वारा उपलब्ध कराई गई समाचार-पत्र की कटिंग में बताया गया है कि नोएडा प्राधिकरण के आवासीय भवन और संबंधित विभागों में धारा-10 के नोटिसों से जुड़ी शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। कटिंग के मुताबिक, एक चरण में लगभग 31 हजार प्रॉपर्टी पर धारा-10 के नोटिस जारी किए गए थे।
आवंटियों की शिकायत है कि नाली को कवर करने, बालकनी का मामूली विस्तार करने, घर के बाहर रैंप या स्लैब बनाने जैसी छोटी निर्माण संबंधी आपत्तियों के चलते पूरी संपत्ति से जुड़े काम प्रभावित हो जाते हैं। इसका असर केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहता। नोटिस लंबित रहने पर संपत्ति के क्रय-विक्रय, नामांतरण तथा बैंक ऋण जैसी प्रक्रियाएं भी प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई हैं। धारा-10 उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 के तहत प्राधिकरण को कुछ परिस्थितियों में स्थल या भवन के हस्तांतरी/अधिभोगी को नोटिस देने की शक्ति प्रदान करती है। कानून में ऐसी स्थिति का उल्लेख है जिसमें स्थल या भवन की दशा अथवा उपयोग से क्षेत्र के नियोजन, सुविधा या सामान्य जनता के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हो या पड़ने की संभावना हो। Noida News
धारा-10 के नोटिसों का मामला केवल आवंटियों और प्राधिकरण के बीच का विवाद बनकर नहीं रह गया। नोएडा विधायक पंकज सिंह इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी उठा चुके हैं। अक्टूबर 2025 की हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर-22 के निवासियों का प्रतिनिधिमंडल धारा-10 के नोटिस हटवाने की मांग लेकर विधायक पंकज सिंह से मिला था। रिपोर्ट में विधायक के हवाले से कहा गया कि उन्होंने यह मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा है।
उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि विधायक की ओर से न्यायसंगत नीति बनाकर धारा-10 के मामलों का निस्तारण करने की मांग की गई थी। एक अन्य रिपोर्ट में करीब 3,500 आवंटियों को धारा-10 के नोटिस दिए जाने का उल्लेख है। यानी आंकड़ों को लेकर अलग-अलग चरणों और रिपोर्टों में अलग संख्या सामने आती है—कहीं करीब 3,500 आवंटियों का उल्लेख है तो एक चरण में 31 हजार संपत्तियों पर नोटिस जारी होने की बात कही गई है। इसलिए इन दोनों आंकड़ों को एक ही श्रेणी मानने के बजाय प्राधिकरण से आधिकारिक आंकड़ा सामने आना जरूरी है। Noida News
नोएडा में विधायक पंकज सिंह लगातार अधिकारियों और जनता के बीच संवाद की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। उनके जनसंवाद कार्यक्रमों में सड़क, बिजली, पानी, सीवर, अतिक्रमण और अन्य स्थानीय समस्याएं सामने आती रही हैं। मई 2026 के एक जनसंवाद कार्यक्रम में भी इन समस्याओं को लेकर निवासियों ने शिकायतें रखी थीं और अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे। इसी व्यापक संदर्भ में धारा-10 का विवाद नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है। विधायक का जोर इस बात पर रहा है कि जनता की वास्तविक समस्याओं को केवल फाइलों और कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय उनका व्यावहारिक समाधान किया जाए। आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विधायक ने मुख्यमंत्री से मुलाकातों के दौरान यह विषय भी उठाया है कि प्राधिकरण के अधिकारी अपने वातानुकूलित कार्यालयों से बाहर निकलकर शहरवासियों की वास्तविक परेशानियों को समझें। यह विधायक का पक्ष है; दूसरी ओर प्राधिकरण की ओर से यह तर्क रहा है कि अनधिकृत निर्माण या लीज शर्तों के उल्लंघन के मामलों में नियमों के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है। कानून में भी प्राधिकरण को निर्धारित परिस्थितियों में नोटिस और सुधारात्मक कार्रवाई की शक्ति दी गई है। Noida News
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि लगभग 31 हजार संपत्तियों पर धारा-10 के नोटिस जारी हुए थे तो:
इन सवालों के आधिकारिक और अद्यतन आंकड़े सार्वजनिक होना जरूरी हैं। 19 सितंबर 2026 की एक स्थानीय रिपोर्ट में भी 31 हजार नोटिसों के निस्तारण और लंबित फाइलों की संख्या को लेकर प्राधिकरण से आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक न होने का मुद्दा उठाया गया है। Noida News
नोएडा के आवंटियों की मांग का एक प्रमुख हिस्सा यह है कि यदि निर्माण संबंधी कोई कमी है तो उसे ठीक कराने का अवसर दिया जाए और आवश्यक होने पर निर्धारित शुल्क/जुर्माने के माध्यम से नियमितीकरण का रास्ता तलाशा जाए। वहीं प्राधिकरण के लिए यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि भवन नियमों और लीज शर्तों का उल्लंघन अनियंत्रित न हो। यही वह संतुलन है जिसके लिए स्पष्ट, पारदर्शी और एक समान नीति की जरूरत दिखाई देती है। चेतना मंच ने भी दिसंबर 2025 में धारा-10 के नोटिसों को लेकर नोएडा के निवासियों की शिकायतों को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उस समय सेक्टर-22 के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक पंकज सिंह से मुलाकात की थी और नई नीति बनने तक नए धारा-10 नोटिसों पर रोक की मांग उठी थी। Noida News
नोएडा आज एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा शहर है। जेवर एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, औद्योगिक निवेश और तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों के बीच शहर की प्रशासनिक व्यवस्था भी उतनी ही पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित होने की अपेक्षा है। ऐसे में धारा-10 का मामला केवल कुछ हजार आवंटियों की परेशानी का विषय नहीं रह जाता। यह सवाल बन जाता है कि प्राधिकरण और शहर के नागरिक के बीच व्यवस्था कितनी सरल, पारदर्शी और जवाबदेह है। विधायक पंकज सिंह द्वारा इस मामले को मुख्यमंत्री स्तर तक ले जाना बताता है कि समस्या को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर संवाद हुआ है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नोएडा प्राधिकरण धारा-10 के हजारों मामलों के निस्तारण के लिए कौन-सी स्पष्ट नीति और समयबद्ध व्यवस्था सामने लाता है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि नोटिस कितने जारी हुए, कितने निस्तारित हुए और कितने आवंटी आज भी अपनी ही संपत्ति की फाइल लेकर प्राधिकरण के चक्कर लगा रहे हैं? Noida News
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