
Noida News : नोएडा-ग्रेटर नोएडा के फ्लैट खरीदारों के लिए एक बार फिर उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है। तय समय सीमा 31 मई 2025 निकल जाने के बाद भी सैकड़ों यूनिटों की रजिस्ट्री अधर में लटकी है। प्रशासन ने इस लापरवाही पर अब सख्त रुख अपनाते हुए बिल्डरों को अंतिम चेतावनी दी है—या तो समय रहते रजिस्ट्री पूरी करें या फिर कानूनी कार्रवाई का सामना करने को तैयार रहें।
गुरुवार को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने क्रेडाई और बिल्डर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इसमें उन बिल्डर प्रोजेक्ट्स को चिह्नित किया गया है, जिन्होंने अमिताभ कांत समिति की नीतिगत छूटों का लाभ तो लिया, लेकिन अभी तक अपने रजिस्टर्ड फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं कराई। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि यदि जल्द रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, तो न सिर्फ दी गई छूटें वापस ली जाएंगी, बल्कि रेरा एक्ट और भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई भी तय मानी जाए।
अधिकारियों ने यह साफ कर दिया है कि रजिस्ट्री में देरी के लिए केवल बिल्डर ही नहीं, बल्कि अनदेखी करने वाले फ्लैट खरीदार भी जिम्मेदार माने जाएंगे। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि जो खरीदार स्वेच्छा से रजिस्ट्री प्रक्रिया से बचते हैं, उनके फ्लैटों का आवंटन रद्द किया जा सकता है। यह कदम उन मामलों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है, जहां जानबूझकर प्रक्रिया को टालने की प्रवृत्ति सामने आ रही है। बैठक के दौरान सामने आया कि 9 रियल एस्टेट परियोजनाओं में करीब 1431 फ्लैटों की रजिस्ट्री अब भी लंबित है, जबकि इन प्रोजेक्ट्स को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और रजिस्ट्री की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। इसके बावजूद बिल्डर रजिस्ट्री में लापरवाही बरत रहे हैं, जो अब प्रशासन की सख्ती के घेरे में है।
बता दें कि जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बीते महीने ही रियल एस्टेट कंपनियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी थी कि सभी पात्र फ्लैटों की रजिस्ट्री 31 मई 2025 तक अनिवार्य रूप से पूरी की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया था कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती, तो जिम्मेदार बिल्डरों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने 15 दिनों की अंतिम मोहलत देते हुए यह भी संकेत दिया था कि प्रशासन अब लापरवाही के किसी भी रूप को सहन नहीं करेगा। Noida News