हाईकोर्ट के कटघरे में जल्द खड़ा होगा नोएडा प्राधिकरण! करोड़ों के घोटाले की जांच करेगी CBI
Noida News
नोएडा
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 03:33 AM
नोएडा
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 03:33 AM
Noida News : उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ी एक बड़ी भ्रष्टाचार की घटना का खुलासा करते हुए CBI को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट में शामिल नोएडा प्राधिकरण, बिल्डरों और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। अगर जांच में मिलीभगत का कोई भी प्रमाण मिलता है तो CBI को बिना देरी के कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
नौ साल तक नहीं हुई कोई कार्रवाई
बता दें कि, यह मामला नोएडा के स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ा है जिसे कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए शुरू किया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए यह भी निर्देश दिया कि, इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जाए, जो 2004 में शुरू हुआ था, लेकिन नौ साल तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इस परियोजना में नोएडा प्राधिकरण ने पांच सेक्टरों में बिल्डरों को भूखंड आवंटित किए थे, लेकिन बिल्डरों ने समय पर किसी भी प्रकार का विकास कार्य शुरू नहीं किया और प्राधिकरण को भी अपनी किश्तें जमा नहीं कीं।
राज्य सरकार और खरीदारों को हुआ भारी नुकसान
कोर्ट ने यह भी बताया कि 2010 में प्रोजेक्ट का क्षेत्र बढ़ाकर 346 हेक्टेयर किया गया था, लेकिन अंत में इसे सिर्फ 150 हेक्टेयर तक सीमित कर दिया गया। हालांकि, इसके बावजूद बिल्डरों द्वारा विकास कार्यों को न करने से प्राधिकरण, राज्य सरकार और खरीदारों को भारी नुकसान हुआ। 2011 से 2020 तक मिलीभगत और घपले की घटनाएं चलती रही। जब इस मामले का पर्दाफाश सीएजी रिपोर्ट में हुआ तब सरकार हरकत में आई।
नोएडा प्राधिकरण पर 10 हजार करोड़ का बकाया
प्राधिकरण ने चार प्रमुख बिल्डरों को भूखंड आवंटित किए थे – थ्रीसी, लाजिक्स, जनाडू और एटीएस। इन बिल्डरों ने इन भूखंडों को छोटे टुकड़ों में बेच दिया, जिसमें से 74 सब-डिवीजन को प्राधिकरण ने मंजूरी दी थी। इसके अलावा, प्राधिकरण ने 46 ग्रुप हाउसिंग के नक्शे भी पास किए थे। हालांकि, बिल्डरों ने बकाया राशि समय पर नहीं जमा की जिससे नोएडा प्राधिकरण पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये का बकाया हो गया। जानकारी के मुताबिक, इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इस घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी है और संबंधित अधिकारियों व बिल्डरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।