
Noida News (अरुण सिन्हा) : यमुना नदी के किनारे सैकड़ों एकड़ में संचालित हो रहे फार्म हाउस पर अब 'बाबा का बुल्डोजर' नहीं चल पाएगा। दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यहां पर नोएडा प्राधिकरण के ध्वस्तीकरण अभियान पर स्टे ऑर्डर (स्थागनादेश) दिया है।
मालूम हो कि नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी के आदेश पर 1 जून तथा 9 जून को चलाये गये ध्वस्तीकरण अभियान के तहत करीब 90 फार्महाउस को ध्वस्त कर दिया गया था। 1 जून को सेक्टर-150 के तिलवाड़ा तथा गुलावली में अभियान चलाकर 62 फार्म हाउस ध्वस्त किए गए थे। वहीं 9 जून को सेक्टर-135 के तहत सादुल्लापुर व अन्य गांवों के पास ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर 15 फार्म हाउस तोड़े गये थे।
नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी (भूलेख विभाग) प्रसून द्विवेदी ने बताया कि हाईकोर्ट ने ध्वस्तीकरण पर स्टे ऑर्डर पारित किये हैं। इसलिए फिलहाल यह अभियान रोक दिया गया है। प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों ने बताया कि जब-जब ध्वस्तीकरण अभियान चलता है, फार्म हाउस के संचालक अदालत का दरवाजा खटखटाने चले जाते हैं तथा स्टे ऑर्डर लेकर आ जाते हैं। इससे अवैध फार्म हाउस के खिलाफ ध्वस्तीकरण अभियान में रूकावट आ जाती है।
हाईकोर्ट ने 30 दिनों के अंदर फार्म हाउस प्रकरण में प्राधिकरण को निर्णय लेने के लिए कहा है। याचिकाकर्ताओं को तीन सप्ताह का समय अपनी आपत्ति देने के लिए कहा है। इसके साथ ही न तो प्राधिकरण वहां कोई ध्वस्तीकरण अभियान चलागा और न ही फार्म हाउस मालिक वहां कोई निर्माण करेंगे।
इससे पहले भी फार्म हाउस मालिकों ने अपनी आपत्तियों के प्रत्यावेदन प्राधिकरण को दिए थे। जिनका निस्तारण करने हुए प्राधिकरण ने जवाब दिया था। हालांकि इस जवाब से याचिका कर्ता संतुष्ट नहीं हुए। इस क्रम में प्राधिकरण ने हाल ही में यमुना के डूब क्षेत्र में बने फार्म हाउसों पर बुलडोजर चलवा दिया। इस कार्यवाही के विरोध में फार्म हाउस मालिकों ने हाइकोर्ट में याचिका दायर की थी। प्राधिकरण ओएसडी प्रसून द्विवेदी ने बताया कि ध्वस्तीकरण मामले में कोर्ट से स्टे हुआ है। विधि सलाहकार से बातचीत करके ही आगे अपना जवाब प्रस्तुत किया जाएगा।
आपको बता दें यमुना क्षेत्र के करीब 5 हजार हेक्टेयर से ज्यादा की जमीन पर 900 फार्म हाउस है। जिसे ड्रोन सर्वे के जरिए प्राधिकरण ने नोटिफाइ किया था। पहले फेज में प्राधिकरण ने 150 फार्म हाउस और 4 क्लब को ध्वस्त किया था। इसके बाद फार्म हाउस मालिक हाइकोर्ट चले गए। हाइकोर्ट ने मालिकों से कहा कि वे सभी प्राधिकरण ने अपनी लिखित आपत्ति जमा कर सकते हैं। इसके बाद प्राधिकरण इसकी जांच करेगा। प्राधिकरण ने अधिकतर प्रत्यावेदनों का निपटारा कर दिया है। जिसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्यवाही फिर शुरू की गई। लेकिन वहां भी स्टे मिल गया।
प्राधिकरण ने यमुना के अधिसूचित क्षेत्र और बाढ़ के मैदानों में निर्माण के खिलाफ जून में सार्वजनिक नोटिस जारी किया था। जिसमे लिखा था कि यूपी औद्योगिक विकास अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में बिना पूर्व अनुमति के निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। यदि किसी के द्वारा कोई निर्माण किया गया है तो उसे अविलम्ब हटा दें, अन्यथा यदि नोएडा के अधिसूचित क्षेत्र में अनाधिकृत निर्माण पाया जाता है तो उसे ध्वस्त कर दिया जायेगा। Noida News