नोएडा के इस व्यस्त रूट पर एलिवेटेड रोड को मिली रफ्तार, बनेगी नई DPR
नोएडा में लंबे समय से अटकी रजनीगंधा चौक से सेक्टर-57 चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान रोड-1 पर बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए नए सिरे से सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

Noida News : नोएडा में लंबे समय से अटकी रजनीगंधा चौक से सेक्टर-57 चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान रोड-1 पर बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए नए सिरे से सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए आईआईटी को पत्र भेजकर मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर ताजा सर्वेक्षण करने को कहा गया है। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद इस परियोजना की नई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जमीनी हालात काफी बदल चुके हैं, इसलिए पुरानी डिजाइन और डीपीआर अब व्यावहारिक नहीं मानी जा रही। इसी वजह से एलिवेटेड रोड की पूरी योजना को फिर से तकनीकी नजरिए से परखा जाएगा। खास तौर पर नोएडा के रजनीगंधा चौराहे को इस परियोजना का सबसे जटिल हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से नीचे अंडरपास और ऊपर मेट्रो कॉरिडोर मौजूद है।
रजनीगंधा चौराहे पर सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि नई डीपीआर तैयार करते समय सबसे ज्यादा ध्यान रजनीगंधा चौक के डिजाइन पर दिया जाएगा। अब यह देखा जाएगा कि एलिवेटेड रोड को मेट्रो लाइन के ऊपर से निकाला जा सकता है या फिर इसे दो हिस्सों में विकसित करना ज्यादा व्यवहारिक होगा। इसी तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर अंतिम खाका तैयार किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि पहले भी इस परियोजना के लिए DPR बनाई जा चुकी थी, लेकिन मौजूदा ट्रैफिक, संरचनात्मक बदलाव और नोएडा के बढ़ते शहरी दबाव को देखते हुए अब नए सिरे से योजना तैयार करना जरूरी हो गया है।
दिल्ली-नोएडा ट्रैफिक को मिल सकती है बड़ी राहत
यदि यह एलिवेटेड रोड बनती है तो नोएडा आने-जाने वाले हजारों वाहन चालकों को सीधा फायदा मिलेगा। डीएनडी के पास से सेक्टर-57 चौराहे तक निर्बाध कनेक्टिविटी बनने से नोएडा के सेक्टर-57, 58, 59, 65, मामूरा और आसपास के इलाकों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। यही नहीं, इस रूट का इस्तेमाल करने वाले लोग खोड़ा कॉलोनी के रास्ते गाजियाबाद की ओर भी सुगमता से आ-जा सकेंगे। इस परियोजना के पूरा होने पर ट्रैफिक सिग्नलों, बार-बार रुकने और जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, नोएडा की इस महत्वाकांक्षी एलिवेटेड रोड परियोजना पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।
पीक ऑवर में नोएडा की इस सड़क पर लगते हैं लंबे जाम
रजनीगंधा चौक से सेक्टर-12/22/56 तिराहे तक का मार्ग नोएडा के सबसे व्यस्त हिस्सों में गिना जाता है। सुबह दफ्तर जाने और शाम को लौटने के समय यहां ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी सेक्टर-22 चौड़ा मोड़ से सेक्टर-57 चौराहे तक दोनों दिशाओं में देखने को मिलती है। स्थानीय स्तर पर ऑटो की अव्यवस्थित आवाजाही, सड़क किनारे खड़े वाहन और कुछ हिस्सों में अनियोजित पार्किंग जाम की बड़ी वजह बनते हैं। सेक्टर-10 के सामने भी सड़क पर वाहनों के खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में नोएडा के इस कॉरिडोर पर एलिवेटेड रोड को ट्रैफिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
2015 में हुआ था शिलान्यास
इस परियोजना की सबसे अहम बात यह है कि इसका शिलान्यास करीब 11 साल पहले, वर्ष 2015 में किया गया था। उस समय उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस योजना की आधारशिला रखी थी। शुरुआती प्रस्ताव के मुताबिक, एलिवेटेड रोड को सेक्टर-10 से सेक्टर-12/22 तिराहे तक विकसित किया जाना था। आज भी सेक्टर-22 चौड़ा मोड़ के पास इस परियोजना से जुड़ा बोर्ड लगा हुआ है।
हालांकि, शिलान्यास के इतने वर्षों बाद भी नोएडा की यह महत्वाकांक्षी परियोजना जमीन पर नहीं उतर सकी। अब नए सर्वे और नई DPR के जरिए एक बार फिर उम्मीद जगी है कि शायद इस बार नोएडा को उसका बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर मिल सके। Noida News
Noida News : नोएडा में लंबे समय से अटकी रजनीगंधा चौक से सेक्टर-57 चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान रोड-1 पर बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए नए सिरे से सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए आईआईटी को पत्र भेजकर मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर ताजा सर्वेक्षण करने को कहा गया है। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद इस परियोजना की नई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जमीनी हालात काफी बदल चुके हैं, इसलिए पुरानी डिजाइन और डीपीआर अब व्यावहारिक नहीं मानी जा रही। इसी वजह से एलिवेटेड रोड की पूरी योजना को फिर से तकनीकी नजरिए से परखा जाएगा। खास तौर पर नोएडा के रजनीगंधा चौराहे को इस परियोजना का सबसे जटिल हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से नीचे अंडरपास और ऊपर मेट्रो कॉरिडोर मौजूद है।
रजनीगंधा चौराहे पर सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि नई डीपीआर तैयार करते समय सबसे ज्यादा ध्यान रजनीगंधा चौक के डिजाइन पर दिया जाएगा। अब यह देखा जाएगा कि एलिवेटेड रोड को मेट्रो लाइन के ऊपर से निकाला जा सकता है या फिर इसे दो हिस्सों में विकसित करना ज्यादा व्यवहारिक होगा। इसी तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर अंतिम खाका तैयार किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि पहले भी इस परियोजना के लिए DPR बनाई जा चुकी थी, लेकिन मौजूदा ट्रैफिक, संरचनात्मक बदलाव और नोएडा के बढ़ते शहरी दबाव को देखते हुए अब नए सिरे से योजना तैयार करना जरूरी हो गया है।
दिल्ली-नोएडा ट्रैफिक को मिल सकती है बड़ी राहत
यदि यह एलिवेटेड रोड बनती है तो नोएडा आने-जाने वाले हजारों वाहन चालकों को सीधा फायदा मिलेगा। डीएनडी के पास से सेक्टर-57 चौराहे तक निर्बाध कनेक्टिविटी बनने से नोएडा के सेक्टर-57, 58, 59, 65, मामूरा और आसपास के इलाकों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। यही नहीं, इस रूट का इस्तेमाल करने वाले लोग खोड़ा कॉलोनी के रास्ते गाजियाबाद की ओर भी सुगमता से आ-जा सकेंगे। इस परियोजना के पूरा होने पर ट्रैफिक सिग्नलों, बार-बार रुकने और जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, नोएडा की इस महत्वाकांक्षी एलिवेटेड रोड परियोजना पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।
पीक ऑवर में नोएडा की इस सड़क पर लगते हैं लंबे जाम
रजनीगंधा चौक से सेक्टर-12/22/56 तिराहे तक का मार्ग नोएडा के सबसे व्यस्त हिस्सों में गिना जाता है। सुबह दफ्तर जाने और शाम को लौटने के समय यहां ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी सेक्टर-22 चौड़ा मोड़ से सेक्टर-57 चौराहे तक दोनों दिशाओं में देखने को मिलती है। स्थानीय स्तर पर ऑटो की अव्यवस्थित आवाजाही, सड़क किनारे खड़े वाहन और कुछ हिस्सों में अनियोजित पार्किंग जाम की बड़ी वजह बनते हैं। सेक्टर-10 के सामने भी सड़क पर वाहनों के खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में नोएडा के इस कॉरिडोर पर एलिवेटेड रोड को ट्रैफिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
2015 में हुआ था शिलान्यास
इस परियोजना की सबसे अहम बात यह है कि इसका शिलान्यास करीब 11 साल पहले, वर्ष 2015 में किया गया था। उस समय उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस योजना की आधारशिला रखी थी। शुरुआती प्रस्ताव के मुताबिक, एलिवेटेड रोड को सेक्टर-10 से सेक्टर-12/22 तिराहे तक विकसित किया जाना था। आज भी सेक्टर-22 चौड़ा मोड़ के पास इस परियोजना से जुड़ा बोर्ड लगा हुआ है।
हालांकि, शिलान्यास के इतने वर्षों बाद भी नोएडा की यह महत्वाकांक्षी परियोजना जमीन पर नहीं उतर सकी। अब नए सर्वे और नई DPR के जरिए एक बार फिर उम्मीद जगी है कि शायद इस बार नोएडा को उसका बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर मिल सके। Noida News












