नोएडा भाजपा की पुरानी राजनीति से लेकर आज के डिजिटल संगठन तक का सफर। जानिए नवाब सिंह नागर, योगेंद्र चौधरी समेत पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर क्यों उठ रहे सवाल।

Noida News : भारतीय जनता पार्टी वर्तमान में पूरे देश के साथ ही उत्तर प्रदेश की भी सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकतों में शामिल है। भारत का कोई भी कोना हो, उत्तर प्रदेश का कोई भी गांव, कस्बा अथवा शहर हो, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर नोएडा तक भाजपा का संगठन बूथ स्तर तक फैला हुआ है। लेकिन आज की मजबूत भाजपा को समझने के लिए उस दौर में लौटना जरूरी है, जब पार्टी के पास न सत्ता थी, न संसाधनों की वह ताकत थी और न ही आज जैसा व्यापक संगठनात्मक विस्तार। नोएडा में भाजपा की पुरानी राजनीति की कहानी इसी बदलाव की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करती है। स्थानीय स्तर पर पार्टी से लंबे समय से जुड़े कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने वह दौर भी देखा है जब भाजपा के कार्यक्रमों के लिए दरी बिछाने, झंडे लगाने, पोस्टर चिपकाने और घर-घर जाकर पर्चे बांटने का काम भी पार्टी के नेताओं को स्वयं ही करना पड़ता था। आज उन्हीं कार्यकर्ताओं के सामने एक अलग सवाल खड़ा दिखाई देता है—जिस संगठन को खड़ा करने में उन्होंने अपनी जवानी लगा दी, सत्ता और संगठन के विस्तार के बाद उसमें उनकी भूमिका क्या रह गई है?
भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश में सत्ता के सफर को लेकर एक तथ्य अक्सर चर्चा में आता है। भाजपा ने 1991 के विधानसभा चुनाव में 425 में से 221 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था और 24 जून 1991 को कल्याण सिंह पहली बार भारतीय जनता पार्टी की तरफ से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में बनी कल्याण सिंह की यह सरकार 6 दिसंबर 1992 के बाद समाप्त हो गई। इसके बाद 1993 में सत्ता समीकरण बदले और 1997 में कल्याण सिंह दोबारा मुख्यमंत्री बने। उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में 21 सितंबर 1997 से 12 नवंबर 1999 तक उनके दूसरे कार्यकाल का उल्लेख विस्तार से दर्ज है। इसलिए वर्ष 1997 को भाजपा के उत्तर प्रदेश की सत्ता में लौटने का महत्वपूर्ण दौर कहा जा सकता है, लेकिन यह कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा कि भाजपा पहली बार उसी वर्ष सत्ता में आई थी।
जब कभी भी उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के नाम से स्थापित नोएडा क्षेत्र में भाजपा के पुराने संगठनात्मक विस्तार की चर्चा होती है तो नवाब सिंह नागर का नाम प्रमुखता से सामने आता है। उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों के अनुसार नवाब सिंह नागर ने छात्र जीवन में RSS से जुड़कर राजनीतिक सफर शुरू किया और भाजपा के गठन के बाद संगठन में सक्रिय हुए। उन्हें नोएडा का पहला मंडल अध्यक्ष बनने का ऐतिहासिक गौरव भी प्राप्त है। नवाब सिंह नागर ने दादरी विधानसभा से चुनावी राजनीति में प्रवेश किया। 1996 में उन्होंने दादरी से चुनाव जीता और 2002 में दोबारा विधायक बने। 2002 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर उन्हें सिंचाई मंत्री बनाया गया। यानी जिस दौर की बात पुराने भाजपा कार्यकर्ता करते हैं, उस दौर में नोएडा और दादरी क्षेत्र में पार्टी का संगठन आज जितना बड़ा नहीं था। संगठन खड़ा करने वाले नेताओं को स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक जमीन पर काम करना पड़ा।
25 जून 2026 को भाजपा ने नवाब सिंह नागर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया। इसी कड़ी में सितंबर 2026 में नबाब सिंह नागर ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश भाजपा की 37 सदस्यीय क्षेत्रीय टीम भी घोषित की, जिसमें 10 उपाध्यक्ष, चार महामंत्री, 10 मंत्री/सचिव स्तर के पदाधिकारी और 13 सदस्य शामिल हैं। यानी कभी नोएडा में भाजपा का झंडा उठाने वाले संगठनकर्ता आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विशाल संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। यह बात स्वागत योग्य है। भारतीय जनता पार्टी का इतिहास केवल उन नेताओं का इतिहास नहीं है जिन्हें चुनाव जीतने, मंत्री बनने अथवा संगठन में बड़े पद हासिल करने का अवसर मिला। भाजपा का वास्तविक संगठन उन हजारों-लाखों कार्यकर्ताओं से बनता है जो चुनाव से बहुत पहले से जमीन पर काम करते रहे हैं। नोएडा में भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं के संदर्भ में हरिश्चंद्र भाटी, जुगराज सिंह चौहान, योगेंद्र चौधरी और बिजेंद्र सिंह नागर जैसे बड़े प्रमुख नाम सामने आते हैं। इन नामों में भाजपा के बड़े नेता हरिश्चंद्र भाटी वर्ष 1999 से 2002 तक नोएडा शहर में भाजपा के अध्यक्ष रहे। इसी कड़ी में भाजपा के नेता जुगराज सिंह चौहान वर्ष 2004 से 2007 तक नोएडा भाजपा के अध्यक्ष रहे। आगे चलकर योगेंद्र चौधरी वर्ष 2007 से 2010 तक संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। इस प्रकार बिजेंद्र सिंह नागर वर्ष 2010 से 2013 तथा 2013 से 2016 तक नोएडा भाजपा के अध्यक्ष रहे।
नोएडा शहर में सक्रिय भारतीय जनता पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के बीच होने वाली निजी बातचीत में अक्सर यह भावना सुनाई देती है कि सत्ता में आने के बाद उनकी पार्टी की कार्यप्रणाली बदल गई है। स्थानीय भाजपा से जुड़े पुराने लोगों का कहना है कि संगठन के शुरुआती दौर में कार्यकर्ता और नेता एक-दूसरे के बेहद करीब रहते थे। कार्यक्रम छोटा हो या बड़ा, संसाधन कम हों या अधिक—कार्यकर्ता स्वयं व्यवस्था संभालते थे।वर्तमान में नोएडा क्षेत्र की भाजपा के पास सोशल मीडिया टीम है, वार रूम हैं, डेटा आधारित बूथ प्रबंधन है, डिजिटल प्रचार है, बड़े कार्यक्रम हैं, मीडिया मैनेजमेंट और “डामा” करने के लिए हजारों कार्यकर्ताओं वाला विस्तृत ढांचा है। ऐसे में पुराने कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा यह सवाल उठाता है कि क्या संगठन के विस्तार के साथ पुराने कार्यकर्ताओं और नए राजनीतिक चेहरों के बीच संतुलन बना हुआ है?
नोएडा भाजपा की दिशा, दशा, चाल, चरित्र तथा चेहरे को समझने के लिए तथा भाजपा की पुरानी राजनीति के संदर्भ में वर्ष—2007 से 2010 तक भाजपा के नोएडा में अध्यक्ष रहे योगेंद्र चौधरी की हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात का प्रसंग बेहद महत्वपूर्ण है। इस मुलाकात में योगेंद्र चौधरी ने मुख्यमंत्री के सामने पुराने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्थिति का मुद्दा रखा तथा यह बात कही कि जिन लोगों ने लंबे समय तक संगठन के लिए काम किया, उन्हें सरकार और संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने पर विचार होना ही चाहिए।
वर्तमान में नोएडा क्षेत्र में भाजपा का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। नोएडा विधानसभा सीट 2012 में अस्तित्व में आई और उसके बाद से इस सीट पर पूर्व में भाजपा के डॉ. महेश शर्मा, बिमला बाथम तथा वर्तमान में पंकज सिंह विधायक रहे हैं। इससे पहले नोएडा क्षेत्र दादरी विधानसभा का हिस्सा था। यानी जिस क्षेत्र में कभी भाजपा का संगठन खड़ा करना चुनौती माना जाता था, वहां आज भाजपा की चुनावी और संगठनात्मक मौजूदगी बेहद व्यापक है। सितंबर 2026 में नोएडा महानगर अध्यक्ष के रूप में महेश चौहान की नियुक्ति भी संगठन में नए चेहरे और नई जिम्मेदारियों के दौर को दर्शाती है। इसके साथ ही 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नोएडा में भाजपा के विभिन्न प्रकोष्ठों और संगठनात्मक पदों को लेकर सक्रियता बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। यह वही नोएडा है जहां तीन दशक पहले भाजपा के पास आज जैसा मजबूत राजनीतिक आधार नहीं था। या यूं कहें कि नोएडा में भाजपा को “अछूत” पार्टी माना जाता था।
वर्तमान में पूरे देश की तरह ही नोएडा में भी भाजपा के सामने अब एक दिलचस्प संगठनात्मक चुनौती है। एक तरफ पार्टी को युवा चेहरे चाहिए। नई पीढ़ी के कार्यकर्ता चाहिए। सोशल मीडिया और डिजिटल राजनीति समझने वाले लोग चाहिए। नए सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने वाले नेता चाहिए। दूसरी तरफ ऐसे पुराने कार्यकर्ता भी हैं जिन्होंने संगठन को उस समय संभाला जब पार्टी के पास सत्ता और संसाधनों की आज जैसी ताकत नहीं थी। योगेन्द्र चौधरी हों, हरिश्चन्द्र भाटी हों, बिजेन्द्र सिंह नागर हों अथवा जुगराज चौहान हों अपनी जवानी को भाजपा के लिए जलाने वाले इन नेताओं को पार्टी में वर्तमान में कहीं भी पूछा नहीं जा रहा है। राजनैतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि आखिर भाजपा के इन नेताओं की क्या गलती है जिन्होंने “अछूत” भाजपा को सबकी पसंद वाली भाजपा बनाने के काम में अपना जीवन खपा दिया है। भाजपा के इन नामों में भाजपा के नोएडा में अध्यक्ष रह चुके राकेश शर्मा तथा बड़े धनपति के रूप में स्थापित नोएडा शहर में “मेढ़की” के उपनाम से चर्चित मनोज गुप्ता के नाम भी कुछ विश्लेषक ले रहे हैं। नोएडा में भाजपा की राजनीति के जानकार यह भी कहते हैं कि यही विरोधाभास नोएडा भाजपा की मौजूदा कहानी को रोचक बनाता है। एक ही राजनीतिक पीढ़ी के एक नेता के पास पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कमान है और दूसरी तरफ उसी दौर के कई पुराने कार्यकर्ता आज अपने राजनीतिक योगदान की पहचान तलाश रहे हैं। यहां सवाल यह भी है कि क्या भाजपा की राजनीति करने वाले पुराने कार्यकर्ता हमेशा पद की अपेक्षा रखते हैं? आज भाजपा जिस आकार और प्रभाव के साथ खड़ी है, उसके पीछे केवल आज के चेहरे नहीं हैं। उसके पीछे उन पीढ़ियों के कार्यकर्ताओं की मेहनत भी है जिन्होंने कठिन समय में संगठन को संभाला था। नोएडा की भाजपा की कहानी इसी बदलाव की कहानी है—संघर्ष से सत्ता तक, दरी से डिजिटल वार रूम तक और पोस्टर चिपकाने वाले कार्यकर्ता से विशाल संगठन चलाने वाले नेताओं तक।
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