
Noida News : आज नोएडा का 50वां स्थापना दिवस है। आज यानि 17 अप्रैल 2025 को नोएडा शहर पूरे 49 साल का हो गया है। नोएडा शहर की स्थापना 17 अप्रैल 1976 को हुई थी। नोएडा शहर को उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम के तहत स्थापित किया गया था। पिछले 49 वर्षों में नोएडा तेजी के साथ विकसित हुआ है। आज नोएडा को एशिया का सर्वश्रेष्ठï नगर माना जाता है। भारत के सबसे बड़े प्रदेश के रूप में प्रसिद्घ उत्तर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के नाम से भी नोएडा की पहचान हुई है। नोएडा शहर को हॉर्ट ऑफ इण्डिया भी कहा जाता है। नोएडा के 50वें स्थापना दिवस के मौके पर हम आपको नोएडा के इतिहास से परिचित करा रहे हैं।
आपको बता दें कि नोएडा वो शहर है जिसने दिल्ली से सटे होने के बाद भी अपनी पहचान नहीं खोई। इसका इतिहास लगभग 50 साल पुराना है। इस शहर की शुरूआत उस समय हुई जब दिल्ली की जनसंख्या बढऩे लगी थी और इस कारण ये चिंता का विषय बन गया था कि आखिर इस बढ़ते खतरे को कम कैसे किया जाए। इस समय उत्तर प्रदेश में दिल्ली के पास स्थित 50 गांवों को यमुना-हिंडन-दिल्ली बॉर्डर रेगुलेटेड एरिया घोषित किया गया था। मार्च में ये घोषणा हुई और फिर दिल्ली के आस-पास के गांव धीरे-धीरे डेवलप होते चले गए। ये बहुत पुरानी बात नहीं है, लेकिन तब तक नोएडा नहीं बना था। इसके बाद आया वह काला साल जिसे इमरजेंसी के नाम से जानते है। इस साल को शायद ही कोई भूला हो। साल 1975 में कई बड़े-बड़े बदलाव हुए। सियासी उठा पटक के बीच आनन फानन में यमुना-हिंडन-दिल्ली बॉर्डर रेगुलेटेड एरिया को ओखला इंडस्ट्रियल एरिया बना दिया गया। ये 1976 के यूपी इंडस्ट्रियल एक्ट के तहत था। अब जब इंडस्ट्रियल एरिया बनाया गया था और वहां आस-पास के इलाकों में काम करने वाले लोग रहने लगे थे। फिर एक शहर और बेसिक सुविधाओं की जरूरत होने लगी। उस समय नोएडा (न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) की स्थापना की गई । नोएडा अथॉरिटी शहर को बनाने की प्लानिंग कर रही थी और उसके बाद इसी के नाम पर नोएडा नाम दिया गया।
आपको जानकार हैरानी होगी कि उस समय बुलंदशहर के डीएम रह चुके धीरेंद्र मोहन मिश्रा को नोएडा का ब्लूप्रिंट तैयार करने को कहा गया था। इस काम में उन्हें अप्रैल 1975 से अप्रैल 1976 तक का समय लग गया् था, आखिरकार नोएडा का ब्लू प्रिंट बनकर तैयार हो गया। उस समय नोएडा अथॉरिटी के सीईओ भी डीएम धीरेंद्र मोहन मिश्रा को बनाया गया था। उस वक्त ये सरकारी शहर नहीं बल्कि एक अथॉरिटी जैसा था। जिस दिन नोएडा बनाने की घोषणा हुई उसके बाद से 36 गांवों की जमीन जब्त करने का नोटिस भी जारी किया गया था। धीरे-धीरे शहर की शक्ल सामने आने लगी। इस शहर की प्लानिंग करते समय कई बार ऑफिस बदले गए और कई बार इस शहर की कहानी लिखी गई। दिल्ली के आस-पास के गांव एक पूरा शहर बनने लगे। नोएडा की कहानी बहुत ही सिस्टमैटिक थी और इसे प्लान करके तैयार किया गया था।
बता दें कि नोएडा का इतिहास पुराने होने के कारण यहां मौजूद कई प्राचीन मन्दिर आज भी वैसे ही है। दरअसल दनकौर में द्रोणाचार्य तथा बिसरख में रावण के पिता विश्रवा ऋषि का प्राचीन मन्दिर यहां आज भी मौजूद है। ग्रेटर नोएडा स्थित रामपुर जागीर गांव में स्वतन्त्रता संग्राम के समय 1919 में मैनपुरी षड्यंत्र करके फरार हुए राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ भूमिगत होकर कुछ समय के लिये यहीं रहे थे। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे के किनारे स्थित नलगढ़ा गांव में भगत सिंह ने भूमिगत रहकर कई तरह के बम-परीक्षण भी किये थे। यहां आज भी एक बहुत बड़ा पत्थर सुरक्षित तरीके से रखा हुआ है।
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सभी मायनों में नोएडा देश ही नहीं विश्व में रहने के लिए लोगों के लिए पसंदीदा ठिकाना बने इसके लिए प्राधिकरण काम करेगा। लोगों को रोजगार के मौके देना, कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करना लक्ष्य होगा। आम जन से जुड़ी सुविधाओं को भविष्य के शहर के हिसाब से योजना तैयार कर धरातल पर उतारा जाएगा। Noida News :
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