स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नोएडा की रैंकिंग तीन पायदान गिर गई। 184.2 अंक के साथ नोएडा 9वें स्थान पर रहा। जानिए नोएडा की हवा और प्रदूषण नियंत्रण पर क्या सवाल उठ रहे हैं।

Noida News : नोएडा में रहने वाले लाखों लोगों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। जिस नोएडा को देश के आधुनिक और हाईटेक शहरों में गिना जाता है, वही शहर हवा को साफ रखने के मामले में पिछड़ता ज रहा है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB ) के स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में नोएडा की रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले नीचे चली गई है। 200 में से 187.5 अंक हासिल कर नोएडा 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में 8वें स्थान पर पहुंच गया है। नोएडा शहर के लोगों को साफ सफाई तथा स्वच्छ हवा देने में नोएडा प्राधिकरण फिसडडी साबित हुआ है। यह स्थिति नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है।
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 के तहत शहरों का मूल्यांकन केवल हवा में प्रदूषण के तत्काल स्तर को देखकर नहीं किया जाता, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए प्रयासों, ठोस कचरा प्रबंधन, सड़क की धूल पर नियंत्रण, वाहनों एवं औद्योगिक उत्सर्जन में कमी तथा शहर की कार्ययोजना के क्रियान्वयन जैसे विभिन्न मानकों को भी देखा जाता है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत देश के 130 शहरों का मूल्यांकन किया गया था। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना और वायु प्रदूषण कम करने के प्रयासों को तेज करना है।
3 से 10 लाख आबादी वाली श्रेणी में उत्तर प्रदेश का हाईटेक शहर नोएडा के मुकाबले उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। मुरादाबाद और झांसी ने 198.5 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से दूसरा स्थान प्राप्त किया। गोरखपुर और फिरोजाबाद 195 अंकों के साथ पांचवें स्थान पर रहे, जबकि बरेली 189.5 अंकों के साथ सातवें स्थान पर रहा। इसके मुकाबले नोएडा को 184.2 अंक मिले और वह नौवें स्थान पर रहा।
मुरादाबाद/झांसी — 198.5 अंक
गोरखपुर/फिरोजाबाद — 195 अंक
बरेली — 189.5 अंक
नोएडा — 184.2 अंक
यानी हाईटेक सिटी नोएडा से छोटे और अपेक्षाकृत कम संसाधनों वाले कई शहर स्वच्छ वायु के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे।
नोएडा की पहचान देश के सबसे सुनियोजित और आधुनिक शहरों में होती है। चौड़ी सड़कें, हरित पट्टियां, सेक्टरों की व्यवस्थित योजना और मजबूत आर्थिक ढांचा नोएडा को दूसरे शहरों से अलग बनाते हैं। इसके बावजूद यदि स्वच्छ वायु के लिए किए जा रहे प्रयासों की रैंकिंग में शहर लगातार नीचे जा रहा है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर कमी कहां रह गई? सड़क किनारे उड़ती धूल, निर्माण कार्यों से निकलने वाला धूल-कण, बढ़ते वाहनों का दबाव, कूड़ा प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने की घटनाएं और निर्माण स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण जैसे मुद्दे नोएडा के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं। नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन को अब केवल शहर को सुंदर बनाने पर नहीं, बल्कि शहर की हवा को सांस लेने लायक बनाने पर भी उतनी ही गंभीरता से काम करना होगा।
नोएडा को हाईटेक सिटी कहने भर से शहर आधुनिक नहीं बन जाता। असली विकास तब माना जाएगा जब यहां रहने वाले नागरिकों को बेहतर सड़क, स्वच्छ वातावरण और प्रदूषण से राहत मिले। रैंकिंग में तीन पायदान की गिरावट एक चेतावनी है। इसे महज एक सरकारी सर्वेक्षण का आंकड़ा मानकर नजरअंदाज करने के बजाय नोएडा के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल की नई रणनीति बनाने की जरूरत है। शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने, सड़क की धूल नियंत्रित करने, निर्माण स्थलों की निगरानी बढ़ाने, कचरा प्रबंधन मजबूत करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन पर प्रभावी कार्रवाई के साथ नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है।
नोएडा के नागरिकों का सवाल सीधा है कि जब शहर के पास आधुनिक संसाधन और मजबूत प्राधिकरण है, तो फिर स्वच्छ हवा के मामले में रैंकिंग क्यों गिर रही है? यह सवाल सिर्फ नोएडा प्राधिकरण का नहीं, बल्कि पूरे जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली से जुड़ा है। हाईटेक नोएडा को अब 'स्मार्ट सिटी' के साथ-साथ 'क्लीन एयर सिटी' बनाने की चुनौती स्वीकार करनी होगी। Noida News
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