
नोएडा कॉमर्शियल हब : उत्तर प्रदेश का हाईटेक सिटी नोएडा वैसे तो पूरा शहर ही औद्योगिक और वाणिज्यक शहर है। इस शहर में स्टार्टअप शुरू करने का मन बनाने वाले लोगों के लिए एक सेक्टर बेहद ही अच्छा आप्शन हो सकता है। नोएडा के इस सेक्टर को कॉमर्शियल हब के रुप में विकसित किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस सेक्टर की दिल्ली व एनसीआर के अन्य शहरों से सीधे कनेक्टीविटी होगी।
आपको बता दें कि नोएडा का सेक्टर 18 सबसे बड़ा कॉमर्शियल हब है। इसके बाद अब नोएडा के सेक्टर 75 को कॉमर्शियल हब के रुप में डवलप किया जा रहा है। सेक्टर 75 को कॉमर्शियल हब के रुप में विकसित किए जाने के लिए नोएडा प्राधिकरण द्वारा तेजी से कार्य किया जा रहा है। जल्द ही यह पूरा सेक्टर कॉमर्शियल हब का एक बड़ा सेंटर होगा। सेक्टर-75 में मेट्रो स्टेशन के ठीक सामने स्पैक्ट्रम मॉल तैयार हो चुका है। सेक्टर-75 से कुछ दूरी पर सेक्टर-119 व सेक्टर-120 के बीच की रोड पर भी एक मॉल तैयार हो रहा है इसके अलावा सेक्टर-51 व सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बीच का प्लॉट आईकिया कंपनी ने अथॉरिटी से ले लिया था। यहां पर मॉल व ऑफिस स्पेस बनेगा जिसके बीच से सेक्टर-52 व सेक्टर-51 मेट्रो की डायरेक्ट कनेक्टिविटी के लिए स्काईवॉक भी बनाया जाना है।
सेक्टर-75 व उसके आसपास के सेक्टरों में बड़े स्तर पर कॉमर्शियल स्पेस तैयार हो रहा है। इसके तैयार होने से नोएडा के सेक्टर-18 के अलावा लोगों को यहां जाना ज्यादा रास आने वाला है क्योंकि सेक्टर 18 में ओपन पार्किंग की दिक्कत बनी रहती है वहीं सेक्टर-18 पुराना कॉमर्शियल हब होने की वजह से यहां भीड़ भाड़ भी ज्यादा रहती है जिसके चलते अब लोगों को ऐसी जगह की तलाश भी बनी हुई जहां पर ज्यादा भीड़ भाड़ न हो और उनकी जरूरत के अनुसार सुविधाएं भी मिल जाएं।
नोएडा का सेक्टर 75 स्टार्टअप के लिए बेस्ट आप्शन हो सकता है। इसके साथ ही यह सेक्टर कोचिंग सेंटरों का संचालन करने के लिए अच्छी जगह साबित हो सकती है। कोचिंग के लिए नोएडा में या तो बच्चे सेक्टर-62 की ओर जाते हैं या फिर सेक्टर-18 जाते हैं। इसके बाद बाकी बच्चे दिल्ली के कोचिंग सेंटरों में जाते हैं। यहां तैयार हो रहे कॉमर्शियल स्पेस में यदि विभिन्न प्रकार के कोचिंग सेंटर और स्टार्टअप के ऑफिस स्पेस खोले जाएं तो बहुत ही सफल साबित होंगे, क्योंकि यह एरिया एक तो हाईराईज सोसायटीज का हब है जहां हजारों की संख्या में छात्र है। अधिकांश छात्र आजकल 9 वीं से ही कोचिंग शुरु कर देते हैं। जो 9वीं से नहीं करते वह 11 वीं से हर हाल में शुरु करते हैं। ऐसे में पैरंट्स स्कूल गोईंग इस बच्चों को दूर के सेक्टरों में भेजना नहीं चाहते हैं।