नोएडा के सेक्टर-26 में रहने वाली 79 वर्षीय महिला ने करीब 77.88 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी की शिकायत की है। आरोप है कि ‘फिनसोल सारथी प्लान’ में निवेश का झांसा देकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई और बाद में कथित निवेश ऐप की पहुंच बंद कर दी गई।

Noida News: नोएडा में ऑनलाइन निवेश के नाम पर साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। सेक्टर-26 निवासी 79 वर्षीय महिला ने साइबर क्राइम पुलिस थाने में शिकायत देकर करीब 77 लाख 88 हजार 830 रुपये की कथित साइबर ठगी का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था से जुड़ा बताकर महिला को कथित ‘फिनसोल सारथी प्लान’ में निवेश करने के लिए तैयार किया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। पीड़िता का आरोप है कि बड़ी रकम ट्रांसफर कराने के बाद कथित निवेश ऐप पर उसकी कार्रवाई करने की पहुंच बंद कर दी गई। महिला ने पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों, बैंक खातों और धनराशि के लेनदेन की जांच करने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, साइबर ठगों ने ऑनलाइन माध्यम से महिला से संपर्क किया। उसे कथित तौर पर एल्गोरिदमिक वेल्थ मैनेजमेंट स्कीम में निवेश करने का प्रस्ताव दिया गया। आरोप है कि ठगों ने ‘फिनसोल सारथी प्लान’ का नाम इस्तेमाल करते हुए स्वयं को Finsol Securities Private Limited से जुड़ा बताया।
प्रतिष्ठित वित्तीय संस्था से जुड़ाव का दावा कर आरोपियों ने कथित तौर पर महिला का विश्वास हासिल किया और निवेश के नाम पर रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई। Noida News:
महिला ने अपनी शिकायत में कुल 77,88,830 रुपये की कथित वित्तीय धोखाधड़ी का उल्लेख किया है। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों के निर्देश पर अलग-अलग निर्धारित बैंक खातों में रकम भेजी गई। पीड़िता ने कथित लेनदेन से संबंधित तारीख, बैंक खाते और UTR (Unique Transaction Reference) नंबर सहित अन्य विवरण पुलिस को उपलब्ध कराने की बात कही है। ये जानकारियां जांच में रकम के वास्तविक प्रवाह का पता लगाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।
शिकायत में सबसे महत्वपूर्ण आरोप यह है कि जब महिला से बड़ी रकम ट्रांसफर करा ली गई, तो कथित निवेश ऐप पर उसकी कार्रवाई करने की पहुंच रोक दी गई। इससे महिला को अपने निवेश और रकम की स्थिति को लेकर संदेह हुआ। पुलिस जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि जिस ऐप के माध्यम से कथित निवेश दिखाया जा रहा था, उसका संचालन कौन कर रहा था, उसका सर्वर और तकनीकी ढांचा कहां था तथा उसमें दिखाई जा रही निवेश संबंधी जानकारी वास्तविक थी या केवल ठगी के लिए तैयार किया गया इंटरफेस।
पीड़िता ने शिकायत में यह भी बताया है कि कथित आरोपियों से उसका WhatsApp के माध्यम से अभी भी संपर्क बना हुआ है। इस पहलू को जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि WhatsApp चैट, मोबाइल नंबर, कॉल रिकॉर्ड और भेजे गए दस्तावेज कथित गिरोह की पहचान तक पहुंचने में पुलिस के लिए अहम डिजिटल साक्ष्य बन सकते हैं। हालांकि, आरोपियों की वास्तविक पहचान और उनके द्वारा किए गए दावों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
महिला के अनुसार, मामले की शिकायत केंद्रीय गृह मंत्रालय के National Cyber Crime Reporting Portal पर भी दर्ज कराई जा चुकी है। शिकायत में आधिकारिक acknowledgment number का उल्लेख होने की बात कही गई है। इसके अलावा, पीड़िता ने HDFC Bank और IDFC Bank की संबंधित शाखाओं अथवा साइबर सेल को भी मामले की जानकारी ऑनलाइन माध्यम से दिए जाने की बात कही है।
इस पूरे मामले में पुलिस के सामने कई ऐसे डिजिटल और वित्तीय सुराग हैं, जिनके आधार पर कथित साइबर गिरोह तक पहुंचने की कोशिश की जा सकती है।
जांच में खास तौर पर—
महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि रकम कई खातों में घूमाई गई है तो बैंकिंग ट्रेल के माध्यम से कथित साइबर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की संभावना भी बन सकती है।
इस मामले में शिकायतकर्ता की उम्र 79 वर्ष होना भी गंभीर चिंता का विषय है। साइबर ठगी के मामलों में वरिष्ठ नागरिकों को विश्वास में लेकर निवेश, ट्रेडिंग, अधिक रिटर्न अथवा विशेष वित्तीय योजनाओं के नाम पर रकम ट्रांसफर कराने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में ठग पहले पीड़ित को छोटे निवेश अथवा कथित मुनाफे का भरोसा दिलाकर विश्वास कायम कर सकते हैं और बाद में बड़ी रकम निवेश कराने का दबाव बना सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ऐसा ही हुआ या नहीं, यह पुलिस की जांच से स्पष्ट होगा।
करीब 78 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी के इस मामले में अब पुलिस जांच महत्वपूर्ण होगी। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला से रकम किन-किन खातों में मंगाई गई और वहां से पैसा कहां गया। साथ ही, कथित ‘फिनसोल सारथी प्लान’ वास्तव में किसी वैध वित्तीय सेवा से जुड़ा था या उसके नाम का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया, यह भी जांच का अहम हिस्सा होगा। पीड़िता ने साइबर क्राइम पुलिस से मामले में FIR दर्ज कर आरोपियों की पहचान, बैंक खातों की जांच, धनराशि की ट्रेसिंग और कथित निवेश ऐप की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
चेतना मंच की अपील: ऑनलाइन निवेश करते समय किसी भी व्यक्ति या संस्था के दावे पर केवल नाम या ब्रांड देखकर भरोसा न करें। निवेश से पहले संबंधित संस्था की आधिकारिक जानकारी और नियामकीय स्थिति की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। संदिग्ध लेनदेन होने पर तुरंत बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन/पोर्टल को सूचना देना महत्वपूर्ण है। Noida News:
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