नोएडा को आज विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाओं वाले शहर के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन इसी नोएडा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत कई जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है।

Noida News : नोएडा को आज विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक सुविधाओं वाले शहर के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन इसी नोएडा में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की हालत कई जरूरतमंद मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। नोएडा के सेक्टर-39 स्थित नोएडा जिला अस्पताल में पिछले करीब डेढ़ महीने से हड्डी से जुड़ी इम्प्लांट सर्जरी बंद पड़ी है। इसका सबसे ज्यादा असर उन गरीब और असहाय मरीजों पर पड़ रहा है, जिनके लिए सरकारी अस्पताल ही इलाज की आखिरी उम्मीद होता है। स्थिति यह है कि नोएडा जिला अस्पताल में समय पर सर्जरी न होने की वजह से मरीज दर्द सहते हुए दिल्ली, ग्रेटर नोएडा और दूसरे अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जो निजी अस्पतालों का खर्च उठाने की हालत में नहीं हैं, फिर भी उन्हें मजबूरी में जेब ढीली करनी पड़ रही है। अस्पताल में मदद की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले कई मरीज और उनके परिजन बार-बार गुहार लगाने के बाद भी राहत न मिलने से निराश लौट रहे हैं।
गौतमबुद्धनगर जैसे तेजी से बढ़ते जिले में बड़ी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर तबके की है, जो इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहती है। नोएडा के सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल का निर्माण भी इसी उद्देश्य से किया गया था कि जरूरतमंद लोगों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल सके। यहां पहले टूटी हड्डियों के मरीजों की इम्प्लांट सर्जरी नियमित रूप से की जाती थी, जिससे गरीब मरीजों को काफी राहत मिलती थी। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। लंबे समय से इम्प्लांट सर्जरी बंद होने के कारण मरीजों के सामने इलाज का संकट खड़ा हो गया है। हड्डी टूटने या गंभीर चोट की स्थिति में समय पर ऑपरेशन बेहद जरूरी होता है, लेकिन नोएडा जिला अस्पताल में यह व्यवस्था ठप होने से मरीजों का दर्द और इंतजार दोनों बढ़ गए हैं।
नोएडा जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि डॉक्टरों से परामर्श तो मिल रहा है, लेकिन सर्जरी की तारीख तय नहीं हो पा रही। कई मरीजों को इंतजार कराया जा रहा है, जबकि कुछ को दूसरे अस्पतालों में जाने की सलाह दी जा रही है। इससे सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों का आरोप है कि इम्प्लांट सर्जरी बंद रहने का सीधा असर रोजाना बड़ी संख्या में हड्डी रोग से पीड़ित लोगों पर पड़ रहा है। कई लोग ऐसे हैं जो नोएडा से ग्रेटर नोएडा और दिल्ली तक इलाज के लिए भटक रहे हैं। इलाज में देरी के कारण दर्द बढ़ रहा है और आर्थिक बोझ अलग से बढ़ता जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नोएडा जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात हैं, तो फिर इम्प्लांट सर्जरी आखिर क्यों बंद है। अस्पताल में ऑर्थोपेडिक विभाग मौजूद है और रोजाना सैकड़ों मरीज यहां परामर्श के लिए पहुंचते हैं। शुरुआती जांच और चिकित्सकीय सलाह की व्यवस्था भी जारी है, लेकिन ऑपरेशन सुविधा बंद रहने से पूरी चिकित्सा प्रक्रिया अधूरी हो गई है। बताया जाता है कि पहले यहां चौथे तल पर बने सर्जरी कक्ष में नियमित रूप से इम्प्लांट लगाए जाते थे। कई वर्षों तक यह व्यवस्था चलती रही और मरीजों को राहत मिलती रही। अब अचानक यह सुविधा बंद हो जाने से नोएडा के मरीजों में नाराजगी और असमंजस दोनों हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जो व्यवस्था पहले चल रही थी, वह अब क्यों ठप हो गई।
इस पूरे मामले को लेकर कुछ मरीजों और उनके परिजनों ने गंभीर आरोप भी लगाए हैं। आरोप है कि ऑपरेशन के नाम पर पैसे मांगे गए और शिकायत किए जाने के बाद इलाज टाल दिया गया या मरीजों को दूसरे अस्पताल भेज दिया गया। ऐसे आरोपों ने नोएडा जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। छलेरा निवासी एक मरीज के परिवार ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के लिए पहले रकम ली गई, फिर अतिरिक्त पैसे मांगे गए और बाद में सर्जरी नहीं की गई। आखिरकार उन्हें ग्रेटर नोएडा के एक निजी संस्थान में जाकर खर्च उठाकर इलाज कराना पड़ा। यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि जब नोएडा के सरकारी अस्पताल में व्यवस्था कमजोर पड़ती है, तो सबसे बड़ा नुकसान गरीब मरीजों को होता है। नोएडा के ही एक अन्य मरीज ने आरोप लगाया कि वह हड्डी की इम्प्लांट सर्जरी के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कई बार अधिकारियों से संपर्क किया गया, यहां तक कि इम्प्लांट खुद खरीदकर लाने की बात भी सामने आई, फिर भी सर्जरी शुरू नहीं हो सकी। आखिरकार उन्हें ग्रेटर नोएडा के मेडिकल कॉलेज में जाकर ऑपरेशन कराना पड़ा। Noida News