सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार और मेधा रूपम की ओर से इस मामले में क्या दलीलें रखी गईं ? अदालत ने कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया को लेकर क्या सवाल उठाया ? क्या सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला हाईकोर्ट के आदेश की स्थिति बदल सकता है ?

Noida News : नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम को आकृति चौधरी NSA मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उस सवाल पर गंभीरता से विचार किया कि जब राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया कई अधिकारियों और संस्थाओं के स्तर से होकर गुजरी थी, तो केवल जिलाधिकारी मेधा रूपम को व्यक्तिगत रूप से 5 लाख रूपए की क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है। अदालत ने मेधा रूपम की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। Noida News
आकृति चौधरी की NSA हिरासत से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम की भूमिका पर गंभीर टिप्पणियां की थीं और ₹5 लाख की क्षतिपूर्ति उनकी व्यक्तिगत सैलरी से वसूलने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं। 23 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस बात पर सवाल उठाया कि NSA की कार्रवाई केवल जिलाधिकारी के स्तर पर तय नहीं हुई थी। अदालत के समक्ष बताया गया कि प्रक्रिया में SHO और DCP स्तर की रिपोर्ट शामिल थी और मामला एडवाइजरी कमेटी तक भी गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी में पूछा कि यदि पूरी प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरी थी, तो नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम को अलग करके व्यक्तिगत रूप से ₹5 लाख की जिम्मेदारी कैसे दी जा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि आकृति चौधरी द्वारा हिंसा भड़काने का आरोप था या नहीं तथा पहले से कोई इंटेलिजेंस रिपोर्ट मौजूद थी या नहीं, जैसे तथ्य मुकदमे के स्तर पर देखे जाने वाले विषय हैं। Noida News
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। उनके अनुसार, कार्रवाई पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर आगे बढ़ी और इस पूरी प्रक्रिया में कई संवैधानिक एवं प्रशासनिक स्तर शामिल थे। नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी इसी बिंदु को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। उनका तर्क था कि कार्रवाई एक निर्धारित पदानुक्रम के तहत हुई थी, जिसमें पुलिस अधिकारियों से लेकर DM, एडवाइजरी कमेटी, राज्यपाल और केंद्र सरकार तक के स्तर शामिल थे। Noida News
नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम को आकृति चौधरी NSA मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अदालत ने मेधा रूपम की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। इसलिए फिलहाल यह कहना उचित होगा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम की चुनौती को महत्वपूर्ण न्यायिक जांच के दायरे में ला दिया है। अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्पष्ट होगी। Noida News
नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम 2014 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं। इससे पहले IAS अधिकारी श्रीमती मेधा रूपम कासगंज की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। इससे पहले वह हापुड़ की जिलाधिकारी तथा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के पद पर भी काम कर चुकी हैं। मेधा रूपम की पहचान प्रशासनिक अधिकारी के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज के रूप में भी रही है। उन्होंने केरल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक जीते थे और वर्ष 2009 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भी हिस्सा लिया था। Noida News
नोएडा (गौतमबुद्ध नगर ) की जिलाधिकारी श्रीमती मेधा रूपम ने जुलाई 2025 में गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी का पद संभाला था और वह जिले की पहली महिला DM बनीं। उनका जन्म 21 अक्टूबर 1990 को आगरा में हुआ। उन्होंने केरल में स्कूली शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की। उनके पिता ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं और इस समय भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त है। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी बनने से पहले मेधा रूपम ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में काम कर चुकी हैं। इसके बाद वह कासगंज की जिलाधिकारी बनीं और फिर गौतमबुद्ध नगर की जिम्मेदारी संभाली। यही कारण है कि गौतमबुद्ध नगर में उनकी मौजूदा तैनाती को उनके पूर्व प्रशासनिक अनुभव से भी जोड़कर देखा जाता है। Noida News
आकृति चौधरी NSA प्रकरण में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद मेधा रूपम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई में सामने आया सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सवाल यही रहा कि *जब NSA कार्रवाई की प्रक्रिया में कई स्तरों के अधिकारी और संस्थाएं शामिल थीं, तो व्यक्तिगत आर्थिक जिम्मेदारी केवल जिलाधिकारी पर क्यों डाली जाए?* सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले से इस सवाल पर स्थिति स्पष्ट होगी। Noida News
चेतना मंच की नजर इस मामले पर बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही इस मामले का अगला अपडेट आपके सामने आएगा।
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