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नोएडा शहर एक खास कार्यक्रम का गवाह बना है। नोएडा शहर के सेक्टर-27 क्लब में आयोजित इस खास कार्यक्रम का नाम ‘‘एकल को जानो” रखा गया था। दरअसल एकल अभियान भारत तथा नेपाल में एक साथ चलाया जा रहा है।

Noida News : नोएडा शहर एक खास कार्यक्रम का गवाह बना है। नोएडा शहर के सेक्टर-27 क्लब में आयोजित इस खास कार्यक्रम का नाम ‘‘एकल को जानो” रखा गया था। दरअसल एकल अभियान भारत तथा नेपाल में एक साथ चलाया जा रहा है। एकल अभियान एक गैर सरकारी जन आंदोलन है। एकल अभियान के द्वारा ग्रामीण तथा आदिवासी क्षेत्रों में संपूर्ण ग्रामीण विकास के लिए लम्बे अर्से से चलाया जा रहा है। एकल अभियान की पूरी जानकारी आम जनता को देने के मकसद से नोएडा शहर में ‘‘एकल को जानो” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। Noida News
नोएडा शहर के सेक्टर-27 स्थित नोएडा क्लब में 'एकल अभियान' के तहत एक विशेष कार्यक्रम ‘एकल को जानो’ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विचारकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देश के सुदूर, सीमांत और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन की अलख जगाने वाले ‘एकल अभियान’ के कार्यों, इसकी ऐतिहासिक यात्रा और भविष्य की योजनाओं से जनमानस को अवगत कराना था। कार्यक्रम में वक्ताओं ने एकल विद्यालय की पंचमुखी शिक्षा पद्धति की सराहना की और इसे राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का मुख्य आधार बताया। Noida News
एकल अभियान के सह-अभियान प्रमुख मनोहर लाल ने एकल अभियान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और इसके 37 वर्षों के गौरवशाली सफर को श्रोताओं के सामने रखा। उन्होंने आंकड़ों और अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक छोटे से विचार ने आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले लिया है। मनोहर लाल ने कहा, "पिछले 37 वर्षों की यह यात्रा त्याग, समर्पण और निरंतर सेवा की कहानी है। एक विद्यालय से शुरू हुआ यह सफर आज देश के लाखों गाँवों तक पहुँच चुका है। लेकिन हम यहीं रुकने वाले नहीं हैं।" उन्होंने भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले समय में एकल अभियान तकनीकी शिक्षा, डिजिटल साक्षरता और ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। हमारा लक्ष्य हर उस गाँव तक पहुँचना है जो आज भी विकास की मुख्यधारा से अछूता है। Noida News
आईटीबीपी के जनसंपर्क अधिकारी कमलेश कमल ने सीमांत और संवेदनशील क्षेत्रों में एकल अभियान की उपस्थिति और उसकी रणनीतिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "देश के जो क्षेत्र भौगोलिक रूप से अत्यंत दुर्गम हैं और जहाँ मुख्यधारा की सुविधाएँ देर से पहुँचती हैं, वहाँ एकल अभियान के स्वयंसेवकों ने सबसे पहले पहुँचकर शिक्षा की नींव रखी। सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले हमारे भाई-बहन देश के सजग प्रहरी हैं। एकल अभियान उन्हें न केवल साक्षर बना रहा है, बल्कि उनमें राष्ट्रवाद की भावना को भी सुदृढ़ कर रहा है। जब देश का अंतिम व्यक्ति सशक्त होगा, तभी राष्ट्र पूरी तरह सुरक्षित और समृद्ध होगा।" उन्होंने आगे कहा कि एकल के माध्यम से इन क्षेत्रों में हो रहा वैचारिक और सामाजिक बदलाव राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा और अखंडता के लिए एक मजबूत कवच की तरह काम कर रहा है। Noida News
प्रसिद्ध वक्ता एवं इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पवन विजय ने अपने संबोधन में एकल अभियान के शिक्षा मॉडल को भारत की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल किताबी ज्ञान से किसी राष्ट्र का कल्याण नहीं हो सकता, जब तक कि उसमें संस्कारों का समावेश न हो। पवन विजय ने कहा, "एकल की शिक्षा पद्धति केवल क ख ग या ए बी सी डी सिखाने तक सीमित नहीं है। यह 'संस्कार युक्त शिक्षा' है, जो बच्चों को अपनी जड़ों, अपनी संस्कृति और अपनी मातृभूमि से जोड़ती है। यही संस्कार हमारी राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत हैं। एकल अभियान आज के आधुनिक युग में भी हमारी प्राचीन गुरुकुल परंपरा के मूल तत्वों को संजोए हुए है, जो हर बच्चे के भीतर एक जिम्मेदार नागरिक की चेतना जागृत करता है।" Noida News
सीआरपीएफ के पूर्व महानिदेशक कमलकांत शर्मा ने एकल अभियान की रीढ़ मानी जाने वाली 'पंचमुखी शिक्षा' (प्राथमिक शिक्षा, आरोग्य, विकास, संस्कार और जागरण) के दर्शन को समझाया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर व्यक्ति और समाज के 'आत्मबल' से जोड़ा। उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि प्राथमिक शिक्षा और संस्कार बच्चे को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं जबकि आरोग्य और विकास ग्रामीण क्षेत्रों को शारीरिक और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाते हैं। वहीं जागरण शिक्षा ग्रामीणों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सचेत करती है। उन्होंने कहा, "जब एक वनवासी या ग्रामीण बच्चा इन पांचों आयामों से गुजरता है, तो उसका आत्मबल अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है। वह खुद को लाचार नहीं, बल्कि देश का भाग्यविधाता समझने लगता है। एकल अभियान इसी आत्मबल को जागृत करने का महायज्ञ है।" Noida News
इस वैचारिक उत्सव में कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में विशेष रूप से एकल अभियान के प्रभारी राजेश गोयल और एकल संस्थान की चेयरपर्सन श्रीमती मंजू श्रीवास्तव (दीदी) उपस्थित रहीं। इसके साथ ही, देश के प्रख्यात लेखक और राजनीतिक विश्लेषक शांतनु गुप्ता भी इस अवसर पर मौजूद रहे। उन्होंने समकालीन भारत के विकास में एकल जैसी संस्थाओं के जमीनी योगदान को अतुलनीय बताया। कार्यक्रम में नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के कई अन्य गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद और समाजसेवी भी शामिल हुए, जिन्होंने एकल के इस मिशन को गति देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन ऋतंभरा सचान ने किया एवं आभार वीणा भट्ट ने व्यक्त किया। Noida News
राष्ट्र निर्माण का मूक आंदोलन
नोएडा क्लब में आयोजित 'एकल को जानो' कार्यक्रम केवल एक बौद्धिक विमर्श नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि बिना किसी बड़े प्रचार-प्रसार के, देश के सुदूर अंचलों में राष्ट्र निर्माण का एक मूक आंदोलन कितनी खामोशी और दृढ़ता से चल रहा है। वक्ताओं के ओजस्वी विचारों ने वहाँ मौजूद हर व्यक्ति को प्रेरित किया और यह संदेश दिया कि भारत के समग्र विकास के लिए 'एकल' जैसे प्रयासों को हर नागरिक का समर्थन मिलना अनिवार्य है। Noida News
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