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UP News: आरोपी मौसेर भाई हैं और अयोध्या की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहे हैं।

UP News: पुलिस ग्रेजुएशन कर रहे दो छात्रों को गांजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है। दोनों के पास से करीब 37 किलो गांजा मिला है। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 25 लाख बताई गई है। पुलिस का कहना है कि बरामद गांजा सामान्य गांजे की तुलना में अधिक नशे वाला है और इसकी बाजार में कीमत भी काफी ज्यादा है।
आरोपी मौसेर भाई हैं और अयोध्या की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहे हैं। पुलिस ने इन्हें कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। इनमें से एक बीएससी और एक एलएलबी का छात्र है।
आरोपी मूल रूप से अयोध्या के रहने वाले
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि आरोपी शुभम पाठक और शिवम दुबे नोएडा के सेक्टर-17 से गिरफ्तार किया गया है। दोनों मूल रूप से अयोध्या के रहने वाले हैं और दिल्ली के मयूर विहार फेज-2 इलाके में रहते हैं। शुभम करीब तीन साल से गांजा तस्करी में शामिल है और पूरे नटर्वक को संचालन भी वही करता था।
शुभम के खिलाफ पहले से कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या के प्रयास, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट जैसी धाराओं के केस शामिल है। मुख्य आरोपी का मौसेरा भाई शिवम दूबे अयोध्या में रहता है। जब गांजे की बड़ी खेप नोएडा आती है तो वह यहां आ जाता है।
गांजा मंगवाने के लिए साड़ियों वाली ट्रिक
पुलिस ने बताया कि आरोपी पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के रास्ते गांजा मंगाते थे। गांजे को साड़ियों की पैकिंग में छिपाकर कोरियर कंपनियों के जरिये नोएडा और दिल्ली-एनसीआर में भेजा जाता था। अक्सर अधूरे या फर्जी पते पर पार्सल मंगवाए जाते थे और कोरियर कंपनी से संपर्क कर बीच रास्ते में ही पार्सल ले लिए जाते थे। पुलिस को मौके से 39 साड़ियां भी मिली है, जिनका इस्तेमाल गांजा छिपाने के लिए किया जाता था।
वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए तस्करी
पुलिस पूछताछ में शुभम ने बताया कि मुख्य सरगना बिहार में रहता है। वह फोन पर गांजा ऑर्डर करता है। इसके बाद दिल्ली-एनसीआर में इसे भेजा जाता है। बताया जा रहा है कि इन लोगों ने गांजे की तस्करी के लिए कई वॉट्सऐप ग्रुप भी बना रखे थे।
पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े है और अब तक कितने गांजे की सप्लाई की जा चुकी है।
आरोपी होटल, निजी यूनिवर्सिटी, हॉस्टल और झुग्गी-झोपड़ी में गांजे की सप्लाई करते थे। ये लोग डिमांड के हिसाब से तुरंत सप्लाई भेज देते थे। युवाओं के बीच इसकी ज्यादा मांग होने के कारण उन्हें अच्छा मुनाफा मिलता था।
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