मंगलवार को यूपीडा की सलाहकार एजेंसी ने पूरे संभावित कॉरिडोर का निरीक्षण कर जमीनी स्थिति का आकलन किया। नोएडा प्राधिकरण का दावा है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डीपीआर अगले करीब दो महीने में तैयार हो सकती है।

Noida News : नोएडा के लिए बड़ी राहत वाली खबर सामने आई है। नोएडा शहर को ट्रैफिक जाम से निकालने और ग्रेटर नोएडा व यमुना क्षेत्र से तेज कनेक्टिविटी देने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। यमुना पुश्ते के किनारे प्रस्तावित 6 लेन एक्सप्रेसवे परियोजना अब कागजों से निकलकर जमीन पर पहुंचती दिख रही है। मंगलवार को यूपीडा की सलाहकार एजेंसी ने पूरे संभावित कॉरिडोर का निरीक्षण कर जमीनी स्थिति का आकलन किया। नोएडा प्राधिकरण का दावा है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की डीपीआर अगले करीब दो महीने में तैयार हो सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित एक्सप्रेसवे का रूट नोएडा के सेक्टर-94 गोलचक्कर से शुरू होकर यमुना पुश्ते के साथ-साथ सेक्टर-150 तक जाएगा। इस कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 31.2 किलोमीटर बताई जा रही है। इस परियोजना का मकसद नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच सफर को अधिक तेज, सुगम और व्यवस्थित बनाना है। नोएडा के बढ़ते शहरी विस्तार और लगातार बढ़ते वाहनों के दबाव को देखते हुए यह एक्सप्रेसवे भविष्य की जरूरत माना जा रहा है। पिछले वर्ष हुई बोर्ड बैठक में इस परियोजना को सिद्धांततः मंजूरी मिल चुकी थी, जिसके बाद अब इसे तकनीकी रूप देने की प्रक्रिया तेज हुई है।
काफी समय तक फाइलों में सीमित रही यह परियोजना अब अमल की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। मंगलवार को यूपीडा की कंसल्टेंसी एजेंसी के तीन अधिकारी नोएडा पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले सेक्टर-6 स्थित नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में एसीईओ सतीश पाल समेत अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के बाद टीम दोपहर में फील्ड विजिट पर निकली और नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक यमुना पुश्ते की मौजूदा स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया। अधिकारियों ने यह भी देखा कि मौजूदा पुश्ते को चौड़ा करना व्यावहारिक होगा या फिर इसके ऊपर एलिवेटेड रोड विकसित करना ज्यादा उपयुक्त रहेगा। निरीक्षण के दौरान आसपास चल रहे निर्माण कार्यों, जमीन की उपलब्धता और रूट की तकनीकी चुनौतियों का भी आकलन किया गया।
परियोजना केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे नोएडा की भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। इसी वजह से एजेंसी मौजूदा ढांचे का विस्तार, नई सड़क, एलिवेटेड विकल्प और इंटरकनेक्टिविटी जैसे कई मॉडल पर विचार कर रही है। निरीक्षण में नोएडा प्राधिकरण के साथ-साथ सिंचाई विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे, क्योंकि जिस पुश्ते पर यह परियोजना प्रस्तावित है, वह सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया में विभागीय अनुमति और तकनीकी सहमति अहम भूमिका निभाएगी। अधिकारियों ने बताया कि यूपीडा की सलाहकार एजेंसी को मौके का निरीक्षण करा दिया गया है और परियोजना से जुड़े प्राथमिक दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए हैं। अब एजेंसी ट्रैफिक लोड, भूमि की स्थिति, निर्माण मॉडल, लागत और कनेक्टिविटी जैसे बिंदुओं को शामिल करते हुए विस्तृत डीपीआर तैयार करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्माण का स्वरूप और वित्तीय ढांचा तय होगा।
इस परियोजना की एक अहम बात यह भी है कि इसके निर्माण पर आने वाला खर्च किसी एक एजेंसी पर नहीं रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर होने वाला व्यय तीनों प्राधिकरण मिलकर उठाएंगे। चूंकि पुश्ता सिंचाई विभाग के दायरे में आता है, इसलिए इस पूरी प्रक्रिया में यूपीडा को एनओसी लेकर आगे बढ़ना होगा। यह मॉडल इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र की आपसी कनेक्टिविटी अब अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साझा शहरी ढांचे के रूप में देखी जा रही है।
नोएडा की ट्रैफिक समस्या केवल एक नए एक्सप्रेसवे से पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सबसे बड़ा दबाव अभी भी चिल्ला बॉर्डर से महामाया फ्लाईओवर तक के हिस्से पर देखा जाता है। इसी कारण इस नए एक्सप्रेसवे को शहर के मौजूदा रोड नेटवर्क से किस तरह जोड़ा जाए, इस पर भी गंभीर चर्चा चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, इस कॉरिडोर को महामाया फ्लाईओवर से प्रभावी रूप से जोड़ने की योजना पर भी मंथन हो रहा है। इसके साथ ही डीएनडी से महामाया फ्लाईओवर के बीच एलिवेटेड रोड या वैकल्पिक सड़क संपर्क विकसित करने पर भी विचार किया जा रहा है। यदि ये योजनाएं साथ में आकार लेती हैं, तो नोएडा के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों में ट्रैफिक दबाव काफी हद तक कम हो सकता है। Noida News