नोएडा के कनॉट प्लेस सेक्टर 18 के ट्रांसफार्मर में ब्लास्ट, दो राहगीर झुलसे

जिसके चलते वहां से गुजर रहे दो राहगीर उसकी चपेट में आ गए। दोनों लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं और दोनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

नोएडा सेक्टर-18 में ट्रांसफार्मर धमाका
नोएडा सेक्टर-18 में ट्रांसफार्मर धमाका
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar27 Feb 2026 05:15 PM
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Noida News : नोएडा के कनॉट प्लेस कहे जाने वाले सेक्टर 18 में आज दोपहर बड़ा हादसा हुआ है। नोएडा के सेक्टर 18 में स्थित रेडिसन ब्लू होटल के सामने लगे ट्रांसफार्मर में आज दोपहर को धमाका हो गया। जिसके चलते वहां से गुजर रहे दो राहगीर उसकी चपेट में आ गए दोनों लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं और दोनों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है

रेडिसन ब्लू होटल के सामने हुआ धमाका

नोएडा के सेक्टर 18 में स्थित रेडिसन ब्लू होटल के सामने लगे ट्रांसफार्मर में शुक्रवार दोपहर को जबरदस्त धमाका हो गया धमाके के दौरान पास से गुजर रहे दो राहगीर उसकी चपेट में आ गए और दोनों लोग आग से झुलस गए मौके पर मौजूद लोगों ने आग की चपेट में आए दोनों राहगीरों को बचाया

दोनों की हालत गंभीर

बताया जा रहा है कि दोनों राहगीर 70 फीसदी से ज्यादा जले हुए हैं और दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है दोनों राहगीरों का अस्पताल में उपचार चल रहा है दोनों की अभी तक पहचान नहीं हुई हैNoida News

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नोएडा को “मिनी सिंगापुर” क्यों कहा जाता है?

इसी तेज बदलाव और सुव्यवस्थित ढांचे की वजह से नोएडा को अक्सर ‘मिनी सिंगापुर’ कहा जाता है एक ऐसा नाम जो शहर की रफ्तार, संरचना और बड़े सपनों को एक साथ बयां करता है।

नोएडा शहर
नोएडा शहर
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 03:14 PM
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Noida News : उत्तर भारत के शहरी नक्शे पर अगर किसी शहर ने योजनाबद्ध विकास, चौड़ी सड़कों और कॉरपोरेट चमक-दमक के सहारे अपनी अलग पहचान गढ़ी है, तो वह नोएडा है। बीते दो दशकों में यह शहर सिर्फ रिहायशी ठिकाना नहीं रहा, बल्कि आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, मीडिया और रियल एस्टेट का बड़ा हब बनकर उभरा है। इसी तेज बदलाव और सुव्यवस्थित ढांचे की वजह से नोएडा को अक्सर ‘मिनी सिंगापुर’ कहा जाता है एक ऐसा नाम जो शहर की रफ्तार, संरचना और बड़े सपनों को एक साथ बयां करता है।

योजनाबद्ध विकास की बुनियाद

नोएडा की नींव 1976 में एक नियोजित औद्योगिक टाउनशिप के तौर पर रखी गई थी। तभी से इसकी पहचान सेक्टर-आधारित प्लानिंग, चौड़े बुलेवार्ड, सर्विस लेन और ग्रीन बेल्ट जैसी सुव्यवस्थित शहरी संरचना से बनी। यहां अनियंत्रित फैलाव की बजाय कंट्रोल्ड और फेज-वाइज डेवलपमेंट को प्राथमिकता दी गई, जिससे शहर का विस्तार एक तय रोडमैप पर चलता रहा। नोएडा का मास्टर प्लान उद्योग, व्यापार और रिहायशी इलाकों के बीच संतुलन बनाकर चलता है और यही सिस्टम उसे कई भारतीय शहरों से अलग पहचान देता है, जिससे मिनी सिंगापुर वाली तुलना को मजबूती मिलती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, डीएनडी फ्लाईवे और मजबूत मेट्रो नेटवर्क ने नोएडा को दिल्ली-एनसीआर के दिल से जोड़ दिया है। वहीं, जेवर में बन रहा Noida International Airport शहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई उड़ान देने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। तेज कनेक्टिविटी, बेहतर रोड-इन्फ्रास्ट्रक्चर, कॉर्पोरेट पार्क और तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर्स ये सब मिलकर नोएडा को निवेशकों के लिए एक हाई-पोटेंशियल डेस्टिनेशन बना रहे हैं।

आईटी और कॉरपोरेट संस्कृति

नोएडा सेक्टर 62, 125 और एक्सप्रेसवे बेल्ट में फैले आईटी पार्क्स ने नोएडा को एक मजबूत टेक-हब की पहचान दिलाई है। यहां बहुराष्ट्रीय कंपनियों की मौजूदगी के साथ-साथ तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और बढ़ते को-वर्किंग स्पेस शहर में एक मॉडर्न बिज़नेस कल्चर की तस्वीर पेश करते हैं। वहीं, मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर में भी नोएडा की हलचल बढ़ी है खासकर फिल्म सिटी जैसी गतिविधियों ने शहर को राष्ट्रीय मंच पर अलग पहचान और विजिबिलिटी दी है।

हरित क्षेत्र और लाइफस्टाइल

जिस तरह सिंगापुर को लोग साफ-सुथरे माहौल और हरे-भरे स्पेस के लिए जानते हैं, उसी तरह नोएडा ने भी अपनी पहचान को ग्रीन बनाने की कोशिश तेज की है। शहर में फैले पार्क, ग्रीन बेल्ट और साइकिल ट्रैक एक अलग ही शहरी अनुभव देते हैं। वहीं दूसरी तरफ, मेगा मॉल्स, मनोरंजन पार्क और लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स नोएडा को एक ऐसी लाइफस्टाइल का चेहरा देते हैं, जिसमें लोकल से ज्यादा ग्लोबल टच नजर आता है।

क्या तुलना पूरी तरह न्यायसंगत है?

नोएडा को “मिनी सिंगापुर” कहना जितना ग्लैमरस लगता है, उतना ही यह एक कड़ा रिमाइंडर भी है कि मंज़िल अभी दूर है। ट्रैफिक की बढ़ती भीड़, हवा में घुलता प्रदूषण, जगह-जगह अवैध निर्माण और सिस्टम की चुनौतियां शहर के सामने अब भी खड़ी हैं। सिंगापुर की तरह डिसिप्लिन्ड गवर्नेंस, स्ट्रॉन्ग एनफोर्समेंट और ज्यादा व्यापक पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बिना यह टैग बस एक तुलना बनकर रह जाएगा। Noida News

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नोएडा में 8 हजार फ्लैट बायर्स की रजिस्ट्री फिर अटकी, प्राधिकरण ने लगाई रोक

प्राधिकरण के इस फैसले का असर नोएडा के करीब 8,000 फ्लैट बायर्स पर पड़ रहा है। इनमें से करीब 4,500 फ्लैटों के लिए पहले ही NOC जारी की जा चुकी थी, जबकि बाकी लगभग 3,000 फ्लैटों की रजिस्ट्री फिलहाल रोक दी गई है।

नोएडा प्राधिकरण की रोक
नोएडा प्राधिकरण की रोक
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar26 Feb 2026 11:36 AM
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Noida News : नोएडा के हजारों फ्लैट खरीदारों के लिए एक बार फिर रजिस्ट्री का सपना अधर में लटक गया है। करीब डेढ़ साल से ‘NOC’ के इंतजार में बैठे बायर्स को ताजा झटका तब लगा, जब नोएडा प्राधिकरण ने 21 ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्टों में रजिस्ट्री के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने पर रोक लगा दी। प्राधिकरण ने इन प्रॉजेक्टों के बिल्डरों को नोटिस भेजकर साफ कर दिया है कि तय शेड्यूल के अनुसार बकाया किस्तें जमा किए बिना न तो रजिस्ट्री की एनओसी मिलेगी और न ही किसी तरह का नीतिगत लाभ दिया जाएगा। प्राधिकरण के इस फैसले का असर नोएडा के करीब 8,000 फ्लैट बायर्स पर पड़ रहा है। इनमें से करीब 4,500 फ्लैटों के लिए पहले ही NOC जारी की जा चुकी थी, जबकि बाकी लगभग 3,000 फ्लैटों की रजिस्ट्री फिलहाल रोक दी गई है।

अमिताभ कांत पॉलिसी से मिली थी राहत

दिसंबर 2024 में उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र की अमिताभ कांत पॉलिसी को संशोधित रूप में अपनाकर नोएडा के रियल एस्टेट में जमी बर्फ पिघलाने की कोशिश की थी। मकसद यही था कि सालों से अटके ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्ट फिर रफ्तार पकड़ें और नोएडा के हजारों फ्लैट बायर्स को रजिस्ट्री की लंबी प्रतीक्षा से राहत मिले। इस नीति के तहत नोएडा के 57 प्रॉजेक्ट चिन्हित किए गए, जिनमें से 36 बिल्डरों ने नोएडा अथॉरिटी के साथ बकाया भुगतान का समझौता किया। लेकिन नोएडा की इसी राहत योजना में अब भुगतान की देरी सबसे बड़ी रुकावट बन गई। 36 में से 21 प्रॉजेक्टों के बिल्डर पहली किस्त जमा करने के बाद शेष रकम समय पर नहीं दे सके। नतीजा यह हुआ कि अथॉरिटी ने इन्हें डिफॉल्टर मानते हुए NOC पर रोक लगा दी और जिन परिवारों को लग रहा था कि अब नोएडा में उनके घर की रजिस्ट्री बस होने ही वाली है, उनके लिए उम्मीद फिर से फाइलों में उलझ गई।

1200 करोड़ से ज्यादा बकाया

नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, इन 21 प्रॉजेक्टों पर 1,200 करोड़ रुपये से अधिक बकाया फंसा हुआ है। अब तक करीब 257 करोड़ रुपये ही जमा हो पाए हैं। 25% भुगतान आने के बाद ही करीब 4,500 फ्लैटों की रजिस्ट्री के लिए NOC जारी की गई थी, लेकिन शेष रकम अटकते ही बाकी रजिस्ट्री फ्रीज कर दी गई। ग्रुप हाउसिंग के ओएसडी क्रांति शेखर के अनुसार, जब तक बिल्डर तय शेड्यूल के अनुसार शेष 75% बकाया जमा नहीं करते, तब तक NOC जारी नहीं की जाएगी। यानी नोएडा में रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब पूरी तरह भुगतान की समयसीमा से जुड़ गई है।

नोएडा के इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा असर

रोक का असर नोएडा के सेक्टर-137, 78, 108, 143, 76, 168, 61, 45, 93B, 75, 107, 50, 70 और 77 सहित कई इलाकों के ग्रुप हाउसिंग प्रॉजेक्टों पर पड़ा है। प्रभावित बिल्डरों में इम्पीरियल हाउसिंग, नेक्सजेन इफाकॉन, लॉरिएट बिल्डवेल, गुलशन होम्स, स्काईटेक कंस्ट्रक्शन, सनवर्ल्ड रेजीडेंसी, गार्डेनिया शेल्टर्स, जेएम हाउसिंग, प्रतीक बिल्डटेक, ओमेक्स ग्रुप समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं। Noida News

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