अपर आयुक्त राज्यकर (ग्रेड-1) संदीप भागिया के मुताबिक, नई कंपनियों में इस तरह की कार्रवाई “असामान्य नहीं” मानी जाती। क्योंकि दस्तावेजों की कमी, गलत/अधूरी जानकारी और सत्यापन प्रक्रिया में विफलता अक्सर रद्दीकरण की सबसे बड़ी वजह बनती हैं।

Noida News : नोएडा की कारोबारी हलचल के बीच एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। नोएडा की रफ्तार भरी कारोबारी दुनिया के बीच एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जो शहर की “ग्रोथ स्टोरी” पर कई सवाल भी खड़े करता है। देश के तेजी से उभरते औद्योगिक और स्टार्टअप हब माने जाने वाले नोएडा–ग्रेटर नोएडा में बीते आठ महीनों के दौरान 2254 कंपनियों का जीएसटी पंजीकरण समाप्त कर दिया गया। ये वे फर्म थीं, जिनका अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच ही रजिस्ट्रेशन हुआ था, लेकिन बाद में जांच में व्यावसायिक गतिविधि कमजोर, लगातार शून्य रिटर्न, या मानकों का पालन न होने जैसी वजहों से वे विभाग की कसौटी पर खरी नहीं उतर सकीं। साफ है कि नोएडा में जहां नए कारोबार तेजी से जन्म ले रहे हैं, वहीं नियमों की सख्ती “कागजी कंपनियों” और निष्क्रिय फर्मों पर भी उतनी ही तेज़ी से कार्रवाई कर रही है।
राज्य जीएसटी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया, उनमें बड़ी हिस्सेदारी उन फर्मों की रही जिन्होंने लगातार ‘शून्य जीएसटी रिटर्न’ दाखिल किए। इसके साथ ही फर्जी इकाइयों की पहचान, कारोबार शुरू ही न होना और दस्तावेजों की सत्यता/पते का सत्यापन पूरा न हो पाना जैसी गड़बड़ियां भी प्रमुख कारण बनीं। अधिकारियों के मुताबिक नोएडा जैसे हाई-एक्टिविटी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में यह ट्रेंड महज बंद होते कारोबार की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की कड़ी स्क्रीनिंग और सख्त निगरानी का संकेत भी है।
गौतमबुद्ध नगर में इस वक्त करीब 1.25 लाख कंपनियां जीएसटी में पंजीकृत हैं, जिनमें राज्य और केंद्रीय दोनों श्रेणियों के रजिस्ट्रेशन शामिल हैं। ऑटोमोबाइल से इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल से मशीनरी, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर तक का मजबूत इकोसिस्टम ही नोएडा को NCR का बड़ा आर्थिक इंजन बनाता है। आंकड़े बताते हैं कि 1 अप्रैल से 28 दिसंबर 2025 के बीच जिले में 22,294 नई फर्मों ने जीएसटी पंजीकरण कराया, जिनमें से 20,040 अभी सक्रिय हैं। यानी लगभग 10 फीसदी इकाइयों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है। अपर आयुक्त राज्यकर (ग्रेड-1) संदीप भागिया के मुताबिक, नई कंपनियों में इस तरह की कार्रवाई “असामान्य नहीं” मानी जाती। क्योंकि दस्तावेजों की कमी, गलत/अधूरी जानकारी और सत्यापन प्रक्रिया में विफलता अक्सर रद्दीकरण की सबसे बड़ी वजह बनती हैं।
जीएसटी अधिकारियों के मुताबिक, कई आवेदनों की जांच में गलत पैन विवरण, व्यवसाय की गलत कैटेगरी, दस्तावेज अधूरे, ओटीपी वेरिफिकेशन पूरा न करना और पते का ठोस प्रमाण न दे पाना जैसी गंभीर खामियां सामने आईं। अधिकारियों का संकेत साफ है कि नोएडा में जिस तेजी से स्टार्टअप्स और छोटे कारोबार पंजीकरण करा रहे हैं, उसी रफ्तार में अगर कागजी प्रक्रिया में लापरवाही हुई तो वह सीधे रजिस्ट्रेशन रद्द होने तक पहुंच सकती है। यानी ‘फास्ट ग्रोथ’ वाले इस कॉरिडोर में अब कंपनी बनाना जितना आसान दिखता है, नियमों पर खरा उतरना उतना ही जरूरी हो गया है।
व्यवसायी www.gst.gov.in पोर्टल के जरिए बिना किसी बिचौलिए के स्वयं जीएसटी पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल के ‘सेवाएं’ सेक्शन में जाकर ‘नया पंजीकरण’ विकल्प चुनना होता है, जहां आवश्यक विवरण भरकर पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जा सकती है। आवेदन जमा होने के बाद एआरएन नंबर के माध्यम से उसकी स्थिति भी आसानी से ट्रैक की जा सकती है। जीएसटी विभाग के अनुसार, पंजीकरण या सत्यापन से जुड़ी किसी भी तकनीकी या दस्तावेजी परेशानी पर कारोबारी नोएडा सेक्टर-148 स्थित राज्य जीएसटी कार्यालय में कार्यदिवसों के दौरान सीधे संपर्क कर सकते हैं,ताकि समय रहते त्रुटियां दूर हों और रजिस्ट्रेशन रद्द होने जैसी कार्रवाई से बचा जा सके। Noida News