नोएडा के हाजीपुर में 8 अरब रुपये मूल्य की जमीन पर प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद नया मोड़ आया है। कोर्ट में याचिका के बावजूद पहुंची टीम का ध्वस्तीकरण पुलिस ने सुरक्षा कारणों से रुकवा दिया।

नोएडा के हाजीपुर गांव में करीब 8 अरब रुपये मूल्य की जमीन से जुड़े विवाद में नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई के बाद अब पूरे मामले में एक नया मोड़ सामने आया है। जमीन पर अवैध निर्माण के खिलाफ प्राधिकरण की टीम कार्रवाई करने पहुंची। कार्रवाई के पीछे प्राधिकरण ने लंबी वैधानिक प्रक्रिया का हवाला दिया है। प्राधिकरण के मुताबिक इस मामले में संबंधित पक्ष को पहले भी कई बार नोटिस जारी किए गए, निर्माण को सील किया गया और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। मामला उस समय और महत्वपूर्ण हो गया, जब कार्रवाई के खिलाफ संबंधित बिल्डिंग पक्ष की ओर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। न्यायालय में याचिका दाखिल कर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। प्राधिकरण के अनुसार न्यायालय से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद उसकी टीम ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची। लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद घटनाक्रम एक बार फिर बदल गया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होने के दौरान पुलिस ने कार्रवाई रुकवा दी। इसके बाद सवाल उठने लगा कि आखिर जब प्राधिकरण अपनी पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का दावा कर रहा था और न्यायालय से भी तत्काल राहत नहीं मिली, तब मौके पर ध्वस्तीकरण क्यों रुक गया?
प्राधिकरण के अनुसार हाजीपुर की इस जमीन और उससे जुड़े निर्माण के मामले में कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। प्राधिकरण के रिकॉर्ड में वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक जारी किए गए विभिन्न नोटिसों और सीलिंग की कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। यानी प्राधिकरण का पक्ष यह है कि संबंधित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को पर्याप्त अवसर और कानूनी प्रक्रिया उपलब्ध कराई गई। नोटिस जारी करने से लेकर सीलिंग और आगे की कार्रवाई तक अलग-अलग चरणों में प्रक्रिया अपनाई गई। इसी बीच संबंधित बिल्डिंग पक्ष की ओर से न्यायालय में याचिका दाखिल की गई। याचिका में प्राधिकरण की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई। प्राधिकरण का कहना है कि न्यायालय से कार्रवाई पर तत्काल रोक की राहत नहीं मिलने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए टीम को मौके पर भेजा गया।
हाजीपुर में प्राधिकरण की टीम कार्रवाई के लिए पहुंची और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन इसी दौरान पुलिस ने कार्रवाई रुकवा दी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसे सीधे तौर पर नोएडा प्राधिकरण की कार्रवाई के विरोध में पुलिस की आपत्ति के रूप में नहीं देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पुलिस की प्राथमिक चिंता मौके पर मौजूद लोगों और आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर थी। दरअसल, जिस स्थान पर ध्वस्तीकरण किया जाना था, वहां किसी बड़े हिस्से को गिराने के दौरान मलबा आसपास की इमारतों तक पहुंचने या किसी अन्य संपत्ति को नुकसान होने की आशंका पैदा हो सकती थी। ऐसे में पुलिस ने बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और तकनीकी योजना के कार्रवाई आगे बढ़ाने के बजाय पहले सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत बताई। यही वजह है कि मौके पर शुरू हुई कार्रवाई फिलहाल रुक गई।
इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि नोएडा प्राधिकरण ने पुलिस को पत्र भेजकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए पर्याप्त पुलिस बल और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। प्राधिकरण के पत्र में केवल पुलिस बल की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि कार्रवाई के लिए आवश्यक मशीनरी और वाहनों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें जेसीबी, डम्पर, हाइड्रोलिक लोडर, मिनी बस/बोलेरो तथा अन्य आवश्यक संसाधन शामिल हैं। इससे साफ है कि प्राधिकरण इस कार्रवाई को केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई के तौर पर नहीं देख रहा, बल्कि पूरी तैयारी के साथ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
हाजीपुर गांव की जिस जमीन को लेकर यह पूरा मामला सामने आया है, उसकी अनुमानित कीमत करीब 8 अरब रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी कीमत वाली जमीन पर निर्माण और प्राधिकरण की कार्रवाई का मामला सामने आने के बाद यह प्रकरण नोएडा के महत्वपूर्ण भूमि विवादों में शामिल हो गया है। नोएडा में जमीन की कीमतें लगातार बढ़ने के कारण अरबों रुपये मूल्य की जमीन से जुड़े विवाद केवल जमीन तक सीमित नहीं रहते। इनके साथ निर्माण की वैधता, प्राधिकरण की अनुमति, भूमि उपयोग, न्यायालयी प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्रवाई जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल जुड़ जाते हैं। हाजीपुर का मामला भी इसी वजह से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पर्याप्त पुलिस बल, मशीनरी और तकनीकी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध होने के बाद नोएडा प्राधिकरण दोबारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा? दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि न्यायालय में दाखिल याचिका पर आगे क्या निर्णय आता है और संबंधित बिल्डिंग पक्ष को न्यायालय से कोई राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल प्राधिकरण का रुख स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उसका कहना है कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई लंबी वैधानिक प्रक्रिया के बाद की जा रही है और न्यायालय से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद टीम को ध्वस्तीकरण के लिए मौके पर भेजा गया। वहीं पुलिस की ओर से कार्रवाई रोके जाने के पीछे सामने आ रहा प्रमुख कारण सुरक्षा और तकनीकी तैयारी है।
हाजीपुर की इस बेशकीमती जमीन पर शुरू हुई कार्रवाई अब केवल एक सामान्य ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं रह गई है। एक तरफ करीब 8 अरब रुपये की जमीन, दूसरी तरफ वर्षों से चली आ रही प्राधिकरण की वैधानिक प्रक्रिया, उसके बाद न्यायालय में दाखिल याचिका और फिर मौके पर पहुंची प्राधिकरण की टीम—इन सभी घटनाक्रमों ने मामले को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। अब निगाह इस बात पर है कि प्राधिकरण अगली कार्रवाई के लिए कब और कितनी व्यापक तैयारी करता है। पुलिस बल और भारी मशीनरी की व्यवस्था के बाद क्या ध्वस्तीकरण फिर शुरू होगा, या न्यायालयी प्रक्रिया इस कार्रवाई की दिशा बदल देगी? हाजीपुर की इस 8 अरब रुपये की जमीन पर शुरू हुई कार्रवाई फिलहाल रुकी जरूर है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में इस प्रकरण में होने वाली अगली कार्रवाई पूरे नोएडा की नजर में रहेगी।
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