
Noida News: नोएडा उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध शहर है। हर कोई नोएडा के विषय में जानना चाहता है। यहां नोएडा के प्रतिदिन के सभी समाचार अखबारों के हवाले से हम समाचार प्रकाशित करते हैं। नोएडा शहर से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों में 01 जुलाई को क्या खास समाचार प्रकाशित हुए हैं यहां एक साथ पढऩे को मिलेंगे।
Noida News: समाचार अमर उजाला से
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “बिल्डरों की मनमानी पर लगाम, 23 प्रोजेक्ट्स पर लगेगा ताला” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि नोएडा में बकाया वसूली को लेकर प्राधिकरण ने सख्ती बढ़ा दी है। बकाया राशि का भुगतान न करने वाले बिल्डरों की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं पर शिकंजा कसते हुए उनके नक्शों की स्वीकृति पर रोक लगा दी गई है। इसके चलते अब न तो निर्माण कार्य आगे बढ़ सकेगा, न ही परियोजनाओं में कोई संशोधन या सह-डेवलपर जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। नक्शों पर रोक लगाए जाने की कार्रवाई के दायरे में 23 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं आएंगी। इन बिल्डरों पर करीब 4000 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें से अधिकतर ग्रुप हाउसिंग परियोजनाएं 2009-2014 के बीच की हैं। अहम है कि पास नक्शे पर 5 साल के लिए निर्माण का समय होता है इसके बाद बिल्डर समय व वैधता बढ़वाते हैं। अब प्राधिकरण के फैसले के बाद नक्शा वैध नहीं माना जाएगा। प्राधिकरण ने तीन बिल्डरों की तरफ से नक्शे का समय और वैधता बढ़ाने का आवेदन खारिज कर दिया है।
प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों पर आई जीरो पीरियड पॉलिसी में शामिल होकर बकाया नहीं जमा करने वाले बिल्डरों पर यह सख्ती लागू की गई है। दिसंबर-2023 में यह पॉलिसी जब प्रभावी हुई तब 57 बकायेदार बिल्डर इसके दायरे में थे। इन बिल्डरों पर प्राधिकरण का 7,800 करोड़ रुपये बकाया था। प्राधिकरण ने दो साल के जीरो पीरियड का लाभ देते हुए करीब 1500 करोड़ रुपये सभी बिल्डरों के बकाये में कम किए थे। इसके साथ ही दूसरे चरण में एनजीटी प्रभाव क्षेत्र में आने वाले बिल्डर परियोजनाओं में और जीरो पीरियड का लाभ देने की शुरुआत प्राधिकरण कर चुका है। पॉलिसी के लाभ से 6 बिल्डरों का बकाया शून्य हो गया। अभी तक 23 परियोजनाओं के बिल्डर बकाया जमा करने को आगे नहीं आए हैं।
Noida News:
अमर उजाला अखबार ने अपने नोएडा संस्करण में मुख्य समाचार “पर्यावरण बचाने की मुहिम में सख्ती, जिले की गाड़ियों के लिए दिल्ली नो एंट्री” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग के आदेश के बाद मंगलवार से दिल्ली में डीजल व पेट्रोल के 10 व 15 साल पुराने वाहनों के संचालन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में इन वाहनों को पेट्रोल देने तक पर रोक लगाई गई है। संबंधित अधिकारियों ने वाहन न संचालित करने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही संचालित होता पाए जाने पर वाहन को सीज कर स्क्रैप कराने की चेतावनी भी दी है। साथ ही पड़ोसी जिलों को भी हिदायत दी गई है। नोएडा में ऐसे वाहनों की संख्या दो लाख से अधिक है। तो इन वाहनों को दिल्ली में किसी भी हालत में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके लिए दिल्ली बॉर्डर पर संबंधित विभागों की तैनाती भी रहेगी। एआरटीओ डॉ सियाराम वर्मा ने बताया कि जिले में कुल 2 लाख 8 हजार 856 वाहन समय सीमा पूरी कर चुके हैं। पहले यह संख्या अधिक थी लेकिन इसमें से 13 हजार वाहन दूसरे जिले में ट्रांसफर हो गए हैं। वहीं 17 हजार लोगों ने वाहन को स्क्रैप कर दिया है। बाकी के वाहन इस वजह से रुके हुए हैं क्योंकि इन वाहनों पर 100 करोड़ रुपये चालान बकाया है। वहीं केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग की ओर से दिल्ली में इन वाहनों को रोक लगाने की जानकारी दे दी गई है। इन वाहन मालिकों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। साथ लोगों को वाहन स्क्रैप कराने की सलाह दी जा रही है।
Hindi News:
अमर उजाला ने 01 जुलाई 2025 के अंक में प्रमुख समाचार “कांवड़ मार्ग पर शराब और मीट की दुकानें बंद रहेंगी” शीर्षक से प्रकाशित किया है। इस समाचार में बताया गया है कि कांवड़ यात्रा को लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए जा रहे हैं। कांवड़ मार्ग पर यात्रा के दौरान शराब व मीट की दुकाने बंद रहेगी। वहीं चिल्ला बॉर्डर पर अस्थाई पुलिस चौकी बनाई जाएगी। इसके साथ ही कांवड़ र्मार्गों पर 10 क्यूआरटी लगाई जाएगी। पुलिस की तरफ से कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। सावन महीने में नौ जुलाई से कांवड़ यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद कांवड़ मार्ग पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ती जाएगी। इसके लिए सेक्टर 14ए स्थित शनि मंदिर मार्ग पर कांवड़ियों की सुरक्षा के लिए एक अस्थाई पुलिस चौकी बनाई जाएगी। एक प्रभारी इंस्पेक्टर सहित 100 से अधिक पुलिसकर्मी व दो प्लाटून पीएसी की ड्यूटी लगेगी।
वहीं सुरक्षा के लिए कांस्टेबल, महिला कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल के साथ शहर के सभी कोतवाली में तैनात कुछ सब इंस्पेक्टरों को तैनात किया जाएगा। दो प्लाटून पीएसी में एक प्लाटून की ड्यूटी दिन में और एक प्लाटून की ड्यूटी रात के समय लगेगी। अधिकांश कांवड़िए सेक्टर 14ए चिल्ला बार्डर के पास से नोएडा में प्रवेश करते हैं और शनि मंदिर रोड होते हुए ओखला पक्षी विहार, कालिंदी कुंज बार्डर होकर दिल्ली और हरियाणा में प्रवेश करते हैं। डीसीपी नोएडा यमुना प्रसाद का कहना है कि कांवड़ यात्रा को सुरक्षित व शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए कमिश्नरेट पुलिस की तरफ से व्यापक तैयारी की गई है। पीएसी की भी तैनाती होगी और मार्गों पर 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। ड्रोन कैमरों से निगरानी की जाएगी।
Noida News: समाचार दैनिक जागरण से
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में 01 जुलाई 2025 का प्रमुख समाचार “छात्र शक्ति कंपनी 181 करोड़ से नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर तैयार करेगी दो अंडरपास” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे पर प्राधिकरण दो नए अंडरपास झट्टा (16.900 किमी चैनेज पर) व सुल्तानपुर गांव (6.10 किमी चैनेज पर) के सामने बनाएगा। दोनों अंडरपास के निर्माण के लिए पांच-पांच कंपनियां आई थीं, निर्माण के लिए छात्र शक्ति नामक कंपनी का चयन किया गया है, लेकिन अभी काम का आवंटन अनुमति सीईओ से नहीं मिल सकी है। सीईओ डा. लोकेश एम का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर पिछले तीन अंडरपास निर्माण में जो खामियां थीं, उन्हें यहां पर दोहराया न जाए। इसलिए एक सलाहकार कंपनी से अंडरपास का निरीक्षण कराया जा रहा है, रिपोर्ट आने के बाद ही चयनित कंपनी को अनुमति प्रदान की जाएगी। चयनित कंपनी करीब डेढ़ साल में दोनों अंडरपास का निर्माण 181 करोड़ रुपये में पूरा करेगी।
बता दें कि इसी कंपनी ने नोएडा ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की रिसरफेसिंग का काम किया था। वर्षा के बाद यहां खोदाई का काम शुरू कर दिया जाएगा। बाकी पेड़ और साफ-सफाई का कार्य काम अवार्ड होने के साथ होगा। करीब 20 गांव और 38 सेक्टर के लोगों को फायदा होगा, उनकी सीधी कनेक्टिविटी एक्सप्रेसवे से हो जाएगी। इन दोनों अंडरपास का निर्माण डाया फार्म तकनीक पर किया जाएगा। इस बार बनाए जाने वाले अंडरपास में तकनीक का बदलाव किया है। 2020 के बाद एक्सप्रेसवे पर कोंडली, एड्वेंट और सेक्टर-96 अंडरपास बाक्स पुशिंग तकनीक पर बनवाए गए थे। इसमें लगातार एक्सप्रेसवे की सड़क धंसने की समस्याएं सामने आई थीं।
इसलिए अब की बार अंडरपास निर्माण के लिए प्राधिकरण डायाफ्राम तकनीक का चयन किया है। सिविल विभाग के उपमहाप्रबंधक विजय कुमार रावल ने बताया कि बगैर खोदाई के डायाफ्राम वाल कास्ट की जाएगी। इसके बाद दो तरफ जमीन के अंदर यह दीवार बनाकर उसके ऊपर अंडरपास की छत ढाल दी जाएगी। नीचे दोनों दीवारों व छत के बीच की मिट्टी खोदाई कर निकाली जाएगी। इसके बाद नीचे की सड़क का काम शुरू होगा। इसी तरह से दोनों लेन का काम प्राधिकरण करवाएगी। इसके कारण कुछ दिनों तक यातायात का संचालन प्रभावित रह सकता है।
दैनिक जागरण के नोएडा संस्करण में प्रमुख समाचार “प्रदेश में होगा साइबर के नोएडा माडल पर काम” शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इस समाचार में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी राजीव कृष्ण ने कानून व्यवस्था व अपराध नियंत्रण के 11 प्राथमिकताएं तय की हैं। इसके लिए मुख्यालय के साथ-साथ फिल्ड के 21 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। सभी अधिकारी जिले और अपने विभागों को संभालने के अलावा इन प्राथमिकताओं पर भी काम करेंगे। अपने अनुभव से पुलिस सुधार का एक उदाहरण भी पेश करेंगे। गौतमबुद्ध नगर के साइबर अपराध पर काम को लेकर माडल को सराहा गया है। नतीजतन गौतमबुद्ध नगर पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह पर साइबर अपराध से मुकाबला करने की बतौर फिल्ड अफसर जिम्मेदारी रहेगी। विगत तीन साल कमिश्नरेट में साइबर ठगों की रिकार्ड गिरफ्तारी हुई हैं।
उत्तर प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो सहिष्णुता, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षा, साइबर अपराध से मुकाबला, कानून व व्यवस्था बेहतर पुलिस सेवाएं, पुलिस कल्याण, प्रतिभा व विशेषज्ञता का उपयोग, प्रौद्योगिकी और एआइ का पुलिसिंग में प्रयोग, प्रशिक्षण, यातायात व्यवस्था, जनशिकायत का निवारण जैसी 11 प्राथमिकताएं तय की हैं। इसमें गौतमबुद्ध नगर पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह साइबर अपराध नियंत्रण पर काम करेंगी। जिले में साइबर अपराध को लेकर प्राप्त किए अपने अनुभवों को अन्य जिले की पुलिस से भी साझा करेंगी। साइबर अपराध रोकने के लिए विस्तृत कार्य योजना बनाकर देंगी। पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया है। गौतमबुद्ध नगर के माडल को प्रस्तुत किया जाएगा। इसको अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है। उधर, इस पहल को पुलिस सुधार की दिशा में बेहतर कदम बताया जा रहा है। इसमें आरक्षी से लेकर एडीजी रैंक के अधिकारियों की भागीदारी होगी। पुलिस अधिकारियों के अनभव अन्य अधिकारियों को मिलेंगे। वह साथ-साथ मिलकर प्रदेश स्तर की पुलिस माडल बनाने में सहयोग करेंगे।
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