नोएडा में तकनीक की आड़ में चल रहे एक बड़े गैरकानूनी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने नोएडा के फेज-2 थाना क्षेत्र में स्थित एनएसईजेड के एक डाटा सेंटर से जुड़े अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया है।

Noida News : नोएडा में तकनीक की आड़ में चल रहे एक बड़े गैरकानूनी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने नोएडा के फेज-2 थाना क्षेत्र में स्थित एनएसईजेड के एक डाटा सेंटर से जुड़े अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह पूरा सिस्टम रिमोट तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसके जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग नेटवर्क का गैरकानूनी इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले में एटीएस के उपनिरीक्षक राजेश यादव की शिकायत पर नोएडा फेज-2 थाने में कथित आरोपी नजीबुल्हा और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। फिलहाल नोएडा पुलिस और एटीएस की टीमें सर्वर और कनेक्शन लेने वाले लोगों की पहचान में जुटी हैं। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क का संबंध साइबर ठगी करने वाले गिरोहों से भी है।
जांच के अनुसार, नोएडा के एनएसईजेड में स्थित एक निजी कंपनी डाटा सेंटर और क्लाउड सर्विस उपलब्ध कराती है। इसी कंपनी के माध्यम से सर्वर और नेटवर्क कनेक्टिविटी लेने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बताया जा रहा है कि नवंबर 2025 में कंपनी के सेल्स विभाग को एक ईमेल मिला, जिसमें एक्सलो टेक्नोलॉजी ओपीसी नाम की कंपनी के लिए सर्वर और कनेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इसके बाद 21 और 22 नवंबर 2025 को नजीबुल्हा नामक व्यक्ति से बातचीत हुई। सर्वर उपलब्ध कराने के लिए परचेज ऑर्डर भेजा गया और ऑनलाइन औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 18 फरवरी 2026 को 50 हजार रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। इसके बाद नोएडा स्थित डाटा सेंटर से सर्वर हैंडओवर कर दिया गया।
जांच में सामने आया है कि सर्वर मिलने के बाद 23 फरवरी 2026 को जिओ डिजिटल के जरिए 500 स्टेटिक आईपी कनेक्शन हासिल किए गए। शुरुआत में इनमें से 16 कनेक्शन सक्रिय किए गए। इसके साथ ही सर्वर पर रिमोट एक्सेस, इंटरनेट डाटा इन-आउट और जिओ कनेक्शन से जुड़ी केबलिंग कर पूरा तकनीकी ढांचा तैयार किया गया। यही ढांचा आगे चलकर नोएडा से संचालित अवैध टेलीफोन एक्सचेंज में बदल गया। सबसे अहम बात यह रही कि आरोपी इस पूरे सिस्टम को मौके पर मौजूद हुए बिना, रिमोट एक्सेस के जरिए नियंत्रित कर रहे थे। इससे साफ है कि नोएडा में बैठा यह नेटवर्क सिर्फ लोकल स्तर की गड़बड़ी नहीं, बल्कि संगठित तकनीकी दुरुपयोग का मामला है।
नोएडा से चल रहे इस अवैध कॉलिंग नेटवर्क ने जांच एजेंसियों की चिंता कई गुना बढ़ा दी है। शुरुआती पड़ताल में खुलासा हुआ है कि वीओआईपी के जरिए आने वाली अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को घरेलू कॉल्स में बदलकर टेलीकॉम सिस्टम को दरकिनार किया जा रहा था, जबकि इंटरनेशनल लॉन्ग डिस्टेंस गेटवे को भी चुपचाप बायपास किया जा रहा था। यह पूरा खेल सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि तकनीक के दम पर तैयार की गई एक गैरकानूनी कॉलिंग चेन का संकेत देता है। एजेंसियों को आशंका है कि नोएडा का यह नेटवर्क साइबर ठगों और संदिग्ध गिरोहों के लिए भी इस्तेमाल हो सकता था। यही वजह है कि एटीएस अब इस मामले की हर परत खोलने में जुट गई है और इसके संभावित साइबर फ्रॉड कनेक्शन को भी गंभीरता से खंगाल रही है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के अवैध नेटवर्क से सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचता है। लेकिन मामला सिर्फ आर्थिक क्षति का नहीं है। बिना वैध अनुमति और निगरानी के अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग सिस्टम को घरेलू नेटवर्क में बदलना देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में नोएडा का यह मामला केवल टेलीकॉम धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि एटीएस की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की गहन जांच की जा रही है। सर्वर और कनेक्शन लेने वाले लोगों की पहचान की जा रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि नोएडा से चल रहे इस गैरकानूनी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। Noida News