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नोएडा के श्रमिक आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा की जांच अब केवल एक स्थानीय उपद्रव की कहानी नहीं रह गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ ऐसे संकेत सामने आ रहे हैं, जो इस पूरे मामले को कहीं ज्यादा व्यापक और गंभीर बनाते हैं।

Noida News : नोएडा के श्रमिक आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा की जांच अब केवल एक स्थानीय उपद्रव की कहानी नहीं रह गई है। जांच आगे बढ़ने के साथ ऐसे संकेत सामने आ रहे हैं, जो इस पूरे मामले को कहीं ज्यादा व्यापक और गंभीर बनाते हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि अशांति फैलाने की यह कोशिश सिर्फ नोएडा या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं थी, बल्कि आने वाले वर्षों में कई राज्यों में इसी तरह के उग्र प्रदर्शन खड़े करने की एक सुनियोजित रूपरेखा तैयार की गई थी। बताया जा रहा है कि इस कथित रणनीति की शुरुआती जमीन हरियाणा और उत्तर प्रदेश में तैयार की गई। इसके बाद मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों तक इसी मॉडल को आगे बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा था। Noida News
जांच में एक अहम खुलासा यह भी हुआ है कि प्रदर्शन के दौरान पहचान छिपाने और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए बाकायदा तैयारी की गई थी। पुलिस को मिले कुछ सीसीटीवी फुटेज और वीडियो में महिलाएं कैमरों पर दुपट्टा या कपड़ा डालती हुई दिखाई दी हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि यह कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि कैमरों की नजर से बचने के लिए पहले से तय रणनीति का हिस्सा हो सकता है। नोएडा पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या उपद्रव के दौरान कुछ लोगों को विशेष भूमिकाएं दी गई थीं। जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे ऑडियो क्लिप और संदेश भी मिले हैं, जिनसे इस पूरे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है। सूत्रों का दावा है कि इनमें हिंसा भड़काने, फायरिंग जैसी गतिविधियों और निर्देशों के आदान-प्रदान के संकेत मिले हैं। हालांकि इन डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच अभी जारी है, लेकिन शुरुआती स्तर पर इन्हें बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस को यह भी संदेह है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विरोध-प्रदर्शन के जरिए उत्तर प्रदेश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित करने की कोशिश की गई। Noida News
जांच के तहत कुछ महिला सदस्यों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने में जुटी है कि प्रदर्शन के दौरान उनकी क्या भूमिका थी, उन्हें किसने निर्देश दिए और वे किन-किन लोगों के संपर्क में थीं। साथ ही, कुछ प्रमुख नामों और कथित कोर ग्रुप के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कुछ संगठनों ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म, पोर्टल और वेबसाइट का इस्तेमाल श्रमिकों को लामबंद करने और माहौल भड़काने के लिए किया। इस पहलू की भी गहराई से जांच की जा रही है कि ऑनलाइन माध्यमों के जरिए किस तरह संदेश फैलाए गए और किस उद्देश्य से लोगों को जोड़ा गया। नोएडा हिंसा मामले में हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कुछ ट्रेड यूनियन संगठनों ने नाराजगी जताई है। इसी कड़ी में 24 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर संयुक्त धरने का ऐलान किया गया है। कुछ संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी शिकायत ले जाने की बात कही है। इससे साफ है कि नोएडा से उठी यह बहस अब प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकलकर राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनती जा रही है। Noida News
जांच के दौरान उत्तराखंड के हल्द्वानी क्षेत्र से भी कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आई है। वहां पुलिस ने समय रहते कथित उपद्रव की कोशिश को नाकाम करने का दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोगों के तार नोएडा हिंसा से जुड़े आरोपियों से मिलने के संकेत मिले हैं। इस कड़ी ने जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि इससे यह आशंका मजबूत होती है कि औद्योगिक और श्रमिक मुद्दों की आड़ में कई शहरों में तनाव भड़काने की समान रणनीति अपनाई जा सकती थी। Noida News
आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच जारी है। कुछ महत्वपूर्ण और संवेदनशील डाटा तक पहुंच के लिए जिला पुलिस ने गूगल से संपर्क किया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जवाब मिलने के बाद कई और तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनसे इस पूरे नेटवर्क, उसकी कम्युनिकेशन चेन और संभावित फंडिंग पैटर्न को समझने में मदद मिलेगी। इससे पहले सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को लेकर भी जांच एजेंसियों को अहम सूचनाएं मिली थीं। अब पुलिस डिजिटल सबूतों, सीसीटीवी फुटेज, संदिग्ध संदेशों और पूछताछ के आधार पर पूरे मामले की परतें खोलने में जुटी है। Noida News
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