नोएडा में हुआ मुआवजा घोटाला एक बार फिर चर्चा में है। नोएडा के इस मुआवजा घोटाले में 10 या 20 नहीं बल्कि सैकड़ों करोड़ रूपए का खेल हुआ है। नोएडा का मुआवजा घोटाला कितना बड़ा है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट इस मामले की लगातार सुनवाई कर रहा है।

Noida News : नोएडा में हुआ मुआवजा घोटाला एक बार फिर चर्चा में है। नोएडा के इस मुआवजा घोटाले में 10 या 20 नहीं बल्कि सैकड़ों करोड़ रूपए का खेल हुआ है। नोएडा का मुआवजा घोटाला कितना बड़ा है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारत की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट इस मामले की लगातार सुनवाई कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नोएडा के मुआवजा घोटाले की जांच एक विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है। नोएडा मुआवजा घोटाले की जांच कर रही SIT ने सुप्रीम कोर्ट को महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
नोएडा के मुआवजा घोटाले की जांच कर रही SIT ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि फर्जी मुआवजा देने के नाम पर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी 10 प्रतिशत कमीशन की वसूली कर रहे थे। नोएडा के मुआवजा घोटाले की जांच कर रही SIT ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी आंशिक जांच रिपोर्ट रखते हुए 10 प्रतिशत कमीशन की वसूली की बात कही। तकनीकी तौर पर SIT की आंशिक रिपोर्ट को आरंभिक जांच रिपोर्ट कहा गया है।
नोएडा में हुए मुआवजा घोटाले की आरंभिक जांच रिपोर्ट को भारत के मुख्य न्यायधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में गठित बैंच के सामने रखी गई। इस बैंच में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं। मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने बेंच से कहा कि ‘अब तक की जांच में यह सामने आया है कि जमीन अधिग्रहण के बदले तय रकम से अधिक मुआवजा दिलाने के बदले में अफसरों के साथ 10 फीसदी कमीशन देने की बात तय हुई थी। सरकार की ओर से वकील रुचिरा गोयल ने आरंभिक रिपोर्ट की जानकारी देते हुए मामले की आगे की जांच पूरी करने के लिए शीर्ष अदालत से दो माह का समय देने की मांग की। बेंच को बताया गया कि जांच के दौरान कई किसानों ने अपने बयान में कहा है कि ‘तय रकम से अधिक मुआवजा दिलाने के बदले अधिकारियों ने 10 फीसदी रुपये नकद में लिए थे। हालांकि, एसआईटी ने बेंच से यह भी कहा है कि सालों पुराने इस मामले में रुपये का लेन-देन पता करना बेहद मुश्किल और समय लेने वाला है। एसआईटी ने बेंच से कहा है कि जिन 160 किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दिया गया है, उनमें से अधिकांश का बयान दर्ज हो गया है और जांच जारी है।
विशेष जांच दल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इस घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार के सक्षम प्राधिकार से अनुमति मांगी गई है। इसके बाद बेंच ने जांच धीमी गति से होने पर नाराजगी जाहिर की और एसआईटी को दो माह का वक्त देने से इनकार कर दिया। बेंच ने एसआईटी को छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने और रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। अब मामले की सुनवाई 13 जुलाई तय की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 10 दिसंबर, 2025 को नोएडा में जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को मुआवजा देने में हुई अनियमितता की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को पिछले 10 से 15 सालों में प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद पर रहे अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया था कि उन किसानों को जांच के दौरान परेशान नहीं किया जाएगा, जिन्हें कथित तौर पर तय रकम से अधिक मुआवजा मिला। चीफ जस्टिस ने साफ किया था कि जिन किसानों को अधिक भुगतान किया गया है, उन्हें सजा नहीं दी जाएगी और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ कर दिया था कि जांच के दौरान किसानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।’
आपको बता दें कि नोएडा में साल 1982 में किसान को उसकी 10-15 बीघा जमीन के लिए शुरुआती मुआवजा 10.12 रुपये प्रति वर्ग की दर से दिया गया। उसने 1993 में जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने दर बढ़ाकर 16.61 रुपये प्रति वर्ग गज भुगतान करने का आदेश दिया। मालिक को भुगतान कर दिया गया। साल 2015 में जमीन मालिक की कानूनी वारिस रामवती ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में फिर से मुआवजे का दावा दायर किया। अदालत ने याचिका खारिज कर दी। उसी वर्ष प्राधिकरण ने मुआवजा दर 297 रुपये प्रति वर्ग गज तय कर दी। इसी नीति का दुरुपयोग करते हुए नोएडा के दो अधिकारियों ने रामवती के खारिज दावे को लंबित दिखाकर 7.28 करोड़ रुपये की राशि जारी करवा ली। यहीं से खेल शुरू हुआ। देखते ही देखते रामवती की तरह अनेक किसानों के मामले में हजारों करोड़ का खेल कर डाला गया। Noida News